विफलताएँ जिनके साथ हर पल खड़ी रही है लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय मुसीबतों का सामना किया । इस उद्यमी के संघर्षों की लिस्ट बहुत लम्बी है चाहे वो विभाजन के दौर में अपना घर-बार और बिज़नेस छोड़ कर पाकिस्तान से हिंदुस्तान आना हो या भारत की नंबर एक साइकिल बनाने के लिए मैकेनिक एवं कंपनियों के दर पर ठोकरे खाना हो या संघर्ष के समय में अपने परिजनों को खोना हो या नंबर एक होने के बाद साझेदार कंपनी से रिश्ता तोड़ना हो लेकिन इस उद्यमी ने अपनी ज़िद नहीं छोड़ी ।

संघर्ष में भी अपने आप को टूटने से बचाते हुए उन्होंने देश की सबसे बड़ी साइकिल और मोटर-साइकिल कंपनी खड़ी कर दी । आज हम बात कर रहे है देश की धड़कन के नाम से मशहूर हीरो मोटोकॉर्प और उसके संस्थापक तथा असली ज़िन्दगी के हीरो बृजमोहनलाल मुंजाल (B M Munjal)  की । अगर आप भी बिज़नेस करना चाहते हो तो इनकी स्टोरी आपको एक बार जरूर पढ़नी चाहिए ।

हीरो ग्रुप ऑफ कंपनीज औऱ हीरो होंडा के चेयरमैन बृजमोहनलाल मुंजाल (जन्म-1923) और उनके भाई ओमप्रकाश मुंजाल (जन्म-1928) ने 1956 में हीरो ब्रांड की साइकिलें लॉन्च की थी, तब से आज तक वह दुनिया में नंबर1 बने हुए हैं।

उनकी फैक्ट्रियों में एक भी दिन काम नहीं रुकता क्योंकि उनके अपने साथ काम करने वालों के साथ रिश्ते ही इतने मजबूत हैं। मुंजाल इतने बिजनेस फ्रेंडली थे कि अपने 1000 से ज्यादा डीलर्स के नाम जबानी याद थे। ये रिश्ता इतना मजबूत था कि कई बार उन्हें लेने स्टेशन चले जाते थे।

पद्मभूषण से सम्मानित बीएम कहते थे- हीरो ग्रुप को रिलायंस जैसा नहीं बनना है। हम तो देश की धड़कन बनना चाहते हैं। और, साइकिल से लेकर टू-व्हीलर तक के सफर में उन्होंने ये कर दिखाया।

पाकिस्तान के लायलपुर जिले के एक छोटे से गांव कामलिया के बहादुरचंद मुंजाल के घर जन्में ‘मुंजाल्स’ को खेत-खलिहान, घर-मकान और कारोबार छोड़कर भागना पड़ा था। दुनिया की सबसे बड़ी टू-व्हीलर कंपनी हीरो ग्रुप के संस्थापक व चेयरमैन ब्रिजमोहन लाल मुंजाल भारत और पाकिस्तान के बंटवारें के दौरान लाहौर से अमृतसर आ गए थे। उस समय उनके पास केवल एक बैग था जिसमें साइकिल के कुछ कल-पुर्जे थे। तनाव के उस दौर में रहने-खाने तक के लाले थे।

hero_honda_plant
हीरो हौंडा के प्लांट में BM मुंजाल अपने साथियों के साथ | Image Source : Forbes India

वे इंडिया आए और अंग्रेजों की ऑर्डिनेंस फैक्टरी में काम करने लगे। अंग्रेजों के लिए काम करना रास नहीं आया तो साइकिल पार्ट्स की ट्रेडिंग का काम शुरू किया। भारत आने से पहले पाकिस्तान में भी उनके बड़े भाई साइकिल के कल-पुर्जो का व्यापार करते थे, लेकिन विभाजन ने उनसे वह कारोबार छीन लिया। यहां आकर उन्होंने जैसे तैसे बाजार से पुर्जे खरीदकर कारीगरों को बेचने शुरू किए।

आजादी के बाद अमृतसर से राजनीति परिस्थितियां कुछ इस तरह बदलीं कि मुंजाल को अपना बिजनेस अमृतसर से लुधियाना शिफ्ट करना पड़। फिर साइकिल खुद ही बनाने लगे। मुंजाल परिवार पहले साइकिल पार्ट्स बनाता और उनकी ट्रेडिंग करता था। सब कुछ छोड़कर लुधियाना पहुंचे मुंजाल्स यानी चार भाई दयानंद, सत्यानंद, बृजमोहनलाल और ओमप्रकाश मुंजाल ने मिलकर हीरो ग्रुप की नींव रखी । आगे के 60 साल में 21 से परिजनों ने उसे आगे बढ़ाया।

आजादी के बाद देश आगे बढ़ रहा था और इस बीच मुंजाल भाईयों ने भारत को हीरो साइकिल का तोहफा दिया। मुंजाल ने बिजनेस को जमाने के लिए भारत के कई शहरों का दौरा किया और इसी एक यात्रा के दौरान उन्हें साइकिल मैन्यूफैक्चरिंग का आइडिया आया। पंजाब आने पर उन्होंने तब के सीएम प्रताप सिंह केरो की सलाह पर पूरी साइकिल बनानी शुरू की। 1956 में पहली हीरो साइकिल मार्केट में आई।

first-cycle-plant
हीरो साइकिल के प्लांट की स्थापना के दौरान BM मुंजाल और उनके साथी | Image Source : Hero Motocorp

उस समय के कॉम्पीटिटर्स रेलीग व एटलेस साइकिल को मात देने मुंजाल के छोटे भाई ओम प्रकाश ने देश भर में डीलर्स का नेटवर्क बनाया। जहां बाकी भाई साइकिलें बनाने और उन्हें बेचने पर ध्यान दे रहे थे, तब खुद ब्रिजमोहन विश्व भर से वर्ल्ड-क्लास कॉम्पोनेंट्स व मशीनें जुटाने में लग गए।

दुनिया में सबसे ज्यादा साइकिलें बनाने का रिकार्ड हीरो के नाम है। 1986 में गिनीज बुक में उनका नाम दर्ज किया गया था जो आज भी कायम है।  बीएम मुंजाल के बड़े भाई सत्यानंद मुंजाल कहा करते थे कि, हजारों भारतीयों की तरह मुंजाल परिवार की संपन्नता भी साइकिल के कैरियर पर सवार होकर आई।

वर्ष 1968 में मुंजाल भाईयों में सबसे बड़े दयानंद का निधन हो गया। इस घटना ने तीनों भाईयों को अंदर से तोड़ दिया, लेकिन उन्होंने भी बड़े भाई के सपने को जिंदा रखने की कसम खाई थी, इसलिए तीनों भाई एक बार फिर खड़े हुए। इस बार वर्ष 1971 में उन्होंने रिम-मेकिंग डिवीजन की स्थापना की और हाईवे साइकिल्स नाम की एक और कंपनी शुरू की। इसके बाद छह से सात साल में ही हीरो साइकिल्स के प्लांट में प्रोडक्टशन डबल हो गया और यह देश की सबसे बड़ी साइकिल मैन्यूफैचरर कंपनी बन गई।

मुंजाल भाईयों ने 80 के दशक के शुरूआती सालों में जापानी ऑटोमोबील कंपनी हॉन्डा से हाथ मिलाए और यहां जन्म हुआ हीरो-हॉन्डा का। तब तक भारतीय बाजार में हीरो ब्रांड भी अपनी अच्छी धाक कायम कर चुकी थी। उस समय भारत में टू व्हीलर का मतलब होता था स्कूटर और इस क्षेत्र में बड़ा नाम था बजाज ऑटो लिमिटेड का। हीरो भी हॉन्डा के साथ मिलकर स्कूटर ही बनाना चाहता था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। कंपनी ने मोटरसाइकिल बनाना शुरू किया।

first-motorcycle-from-hero
प्रथम हीरो-हौंडा मोटर साइकिल के साथ BM मुंजाल और उनके साथी | Image Source : Hero Motocorp

पंजाब में 1984 में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार के चलते मुंजाल भाईयों ने पहली बार पंजाब से बाहर कदम रखा और हरियाणा के धारूहेड़ा में एसेम्बली लाइन की स्थापना की। इस एसेम्बली लाइन से अप्रेल 1985 में पहली 100 सीसी हीरो हॉन्डा मोटरसाइकिल बन कर बाजार में आई। 1985 में शुरू हुआ यह सफर करीब तीन दशकों तक अच्छा चला।

इसके बाद अगस्त 2011 में हीरो ने हॉन्डा से किनारा कर हीरो मोटोकॉर्प लिमिटेड की स्थापना की और अपने नाम से बाइक्स बनाना शुरू किया। हालांकि वर्ष 2013 तक हीरो हॉन्डा नाम ही इस्तेमाल किया गया, लेकिन वर्तमान में हीरो अपने नाम से बाइक्स बना रहा है और इस कंपनी का सालाना टर्नओवर करीब 10,000 करोड़ रूपए का है।

हीरो ग्रुप को तराशकर बुलंदियों पर पहुंचाने वाले असली हीरो बृज मोहन लाल मुंजाल का 01 नवंबर , 2015 को लम्बी बीमारी के बाद  निधन हो गया। उनके चार बेटों रमन कांत मुंजाल, सुनील कांत मुंजाल, पवन कांत मुंजाल और सुमन कांत मुंजाल में से रमनकांत का पहले ही निधन हो गया था।

Comments

comments