राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में आने वाले एक छोटे से गांव के छात्र ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा पास कर तहलका मचा दिया. सामान्य परिवार से आने वाले बच्चे के पिता गांव से क़स्बे के बीच में जीप चलाते है. शुरुआती पढ़ाई सरकारी विद्यालय से हिंदी माध्यम में हुई. प्रवेश परीक्षा के लिए तैयारी करने के लिए बेटा तैयार था तो पिता ने ब्याज पर पैसे उधार लाकर फीस भरी. दो बार परीक्षा में असफल हुआ लेकिन परिवार एवं कोचिंग संस्थान के सहयोग एवं प्रेरणा से इस बार सफलता हासिल की. एक छोटे से गांव से निकलकर यह छात्र डॉक्टर बनेगा. इस प्रतिभावान छात्र का नाम हैं हाशिम कुरैशी.

हाशिम कुरैशी ने NEET – 2019 में सफलता हासिल की और अब मेडिकल की पढ़ाई करके डॉक्टर बनेंगे. राजस्थान के सीकर जिले के खंडेला क़स्बे के चौकड़ी गांव के रहने वाले हाशिम कुरेशी ने शुरुआती पढ़ाई गांव के ही सरकारी स्कूल से की. इसके बाद स्कूल के शिक्षकों के मार्गदर्शन के बाद सीकर स्थित कोचिंग संस्थान में प्रवेश लिया. फीस के लिए पैसो की कमी पड़ी तो पिता ने ब्याज पर पैसे उधार लाकर व्यवस्था की. दो बार परीक्षा में असफल होने के बावजूद हाशिम ने हौसला नहीं खोया और तीसरे प्रयास में सफलता हासिल की.

Hashim Quereshi NEET SIkar Rajasthan
अपने परिजनों के साथ हाशिम

बी पॉजिटिव इंडिया से बातचीत में हाशिम कुरेशी ने बताया कि पिता इरफान कुरेशी स्वयं की जीप किराये पर चलाते हैं और माता गृहणी हैं. परिवार में मेरे अलावा दो और भाई हैं. गांव के ही सरकारी विद्यालय में पढ़ाई की और गुरुजनों के मार्गदर्शन के चलते आगे डॉक्टर बनने के लिए प्रवेश परीक्षा की तैयारी की. मुझे ख़ुशी हैं कि मैं गांव और अपने समुदाय का पहला डॉक्टर बनूँगा. डॉक्टर बनकर समाज सेवा करना मेरा लक्ष्य हैं.

हाशिम कुरेशी के शिक्षक राकेश कुमार शर्मा ने भी उनके सफर में उनकी काफी मदद की. राकेश कुमार बताते हैं कि मैं सरकारी सेवा में 20 सितंबर 2012 को उनके गांव के विद्यालय में पहुंचा था. बरसो बाद कोई अंग्रेजी भाषा का नियमित अध्यापक उनके विद्यालय में पहुंचा था. हाशिम के पिताजी एक सामान्य ड्राइवर थे जो अक्सर हम से मिलते रहते थे.

hashim with his friends
अपने सहपाठियों के साथ हाशिम कुरैशी

फिर एक दिन उसके पिताजी हमारे पास आये और कहने लगे बच्चे को कंप्यूटर के क्षेत्र में भेज देते हैं. तब हमने कहा कि आप साधारण परिवार से हैं. कम्प्यूटर क्षेत्र में अगर बच्चा गया तो हमेशा घर से बाहर रहेगा. आप उसे चिकित्सा के क्षेत्र में भेजिए ताकि वो घर के आस-पास रहकर समाज की सेवा कर सके. कक्षा 9 में हाशिम थोड़ा भटकाव का शिकार हुआ पर समझाने के बाद कक्षा 10 में वो विद्यालय टॉप कर गया.

हाशिम शुरुआत से पढ़ने में तेज थे और उन्हें आठवीं एवं दसवीं में विद्यालय टॉप करने के चलते दो लैपटॉप मिल चुके हैं. अब हाशिम डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना चाहते हैं. उन्हें पूरी उम्मीद हैं कि राजस्थान के ही किसी मेडिकल कॉलेज में उन्हें प्रवेश मिल जायेगा.

बी पॉजिटिव इंडिया, हाशिम कुरैशी की सफलता पर बधाई देता हैं और उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामनाए देता हैं.

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