अपनी पढाई के अंतिम सेमेस्टर में एक नौजवान को पता चला कि वो कैंसर से ग्रसित है. एक ऊर्जावान युवा के लिए यह एक ज़िन्दगी बदल देने वाला अनुभव रहा. कैंसर के प्रति जो धारणाए भारतीय समाज में बनी हुई है. उसने इस युवा को परेशान करके रख दिया. लगभग दो साल के उपचार एवं डॉक्टर्स के मार्गदर्शन से इस युवा ने कैंसर पर विजय प्राप्त की. लेकिन इस घटना ने इस युवा को पूरी तरह से बदल दिया.

अपने कैंसर के अनुभवों से सींखते हुए इस युवा ने देश में कैंसर के प्रति जागरूकता फ़ैलाने का काम शुरू किया. देखते ही देखते यह पहल एक आंदोलन का रूप ले चुकी है. इस युवा ने 15 से ज्यादा राज्यों और बीस शहरों में उन्होंने वर्कशॉप और जागरूकता अभियान शुरू किया. उन्होंने अपनी बाइक से अब तक लगभग 30,000 किलोमीटर की यात्रा की. इस कैंसर यौद्धा का नाम है हर्टीज भारतेश (Harteij Bhartesh).

मध्यप्रदेश के रीवा से आने वाले भारतेश ने कैंसर की जागरूकता के लिए राइड ऑफ़ होप (Ride of Hope) नाम से कैंपेन शुरू किया. छत्तीसगढ़ के रायपुर शहर से शुरू हुआ सफर अब तक भारत के 15 राज्यों के 20 शहरों के हज़ारों लोगों तक पहुँच चूका है. वो कैंसर के साथ ही लोगों को आम चुनावों में वोट डालने के लिए भी प्रेरित कर रहे है. उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार के साथ मिलकर मतदाताओं को जागरूक करने के लिए कैंपेन शुरू किया.

भारतेश ने बी पॉजिटिव से खास बातचीत में बताया कि कैंसर से लड़ना आसान है लेकिन समाज में इसके लिए फैली भ्रांतियों से लड़ना मुश्किल. उनके परिवार ने उनका हर संघर्ष में साथ दिया. जिसके चलते उन्होंने कैंसर से अपनी लड़ाई में विजय प्राप्त की.

भारतेश ने अपनी शुरुआती पढाई रीवा के केंद्रीय विद्यालय से पूरी की. उसके बाद उन्होंने आर्ट्स में ग्रेजुएशन पूरा किया. साथ ही लॉ मेंभी उन्होंने ग्रेजुएशन किया. कानून की पढाई के दौरान ही उन्हें कैंसर के बारे में पता चला.वो होडग्किन्स लिंफोमा नाम के कैंसर से पीड़ित थे. उनको थर्ड स्टेज का कैंसर था.

साधारण कैंसर उपचार के साथ उन्होंने अपनी पढाई पूरी की. कैंसर उपचार के साथ ही वो 2014 में अपने पोस्ट ग्रेजुएशन की पढाई के लिए वो बैंगलोर पहुँच जाते है.उसके बाद उनकी समस्याए और बढ़ गयी. उनकी हालत दिन-ब-दिन ख़राब होती जा रही थी. उसके चलते उन्हें हैदराबाद के हॉस्पिटल में इलाज करना उचित समझा.

हैदराबाद आने के बाद उन्हें कीमोथेरेपी के जटिल प्रोसेस से गुजरना पड़ा. मई 2014 से उन्होंने प्रत्येक पंद्रह दिन में एक बार कीमो लेना शुरू किया.

cancer awareness
कैंसर पीड़ितों के साथ भरतेश

भारतेश के अनुसार ” यह उपचार मेरे लिए न कठिन था और न ही आसान. जो भी हुआ मेरे परिवार ने सहा और कैंसर से लड़ाई लड़ी .अगर परिवार का साथ हो तो इंसान किसी भी कठिनाई से पार पा सकता है.

इस दौरान उनके कुछ मित्रों ने साथ भी छोड़ा लेकिन उससे ज्यादा लोगों ने उनका साथ निभाया. दिसंबर 2014 में जाकर उनका उपचार सफल हुआ और उसके बाद वो अपनी बड़ी बहन के पास रायपुर शिफ्ट हो गए.अगले एक साल तक उन्होंने अपनी सेहत के ऊपर काम किया और योग एवं कसरत के जरिये अपने शरीर को फिट करने में जुट गए.

2016 में उन्होंने नौकरी पाने के लिए पुणे का रुख किया लेकिन उन्हें हर बार पिछले तीन साल का हिसाब देना पड़ा. लोग कैंसर के कारण उन्हें कम आंक रहे थे.

जॉब में उन्हें काबिलियत से ज्यादा उन्हें हुए कैंसर के कारण रिजेक्ट किया जा रहा था. यही बात भारतेश के दिल में बैठ गयी . उन्होंने पढ़े-लिखे लोगों का कैंसर यौद्धा के प्रति व्यवहार को देखकर जागरूकता अभियान शुरू करने का फैसला किया.

पुणे में तीन महीने बिताने के बाद वो वापस रायपुर लौट आये, मई 2016 से उन्होंने राइड ऑफ़ होप नाम से एक कैंपेन शुरू किया. इस अभियान के तहत वो अलग-अलग शहरों में स्कूलों, कॉलेजों और ऑफिस में जाकर लोगों को कैंसर के प्रति जागरूक कर रहे थे. अपने अभियान के दौरान उन्हें कई सेलिब्रिटीज से मिलने का मौका भी मिला.

nagpur travelling
अपने कैंपेन के दौरान साथी bikers के साथ

उन्होंने छह महीने अंतराल में 30000 किलोमीटर की यात्रा करके देश के 15 राज्य, 20 शहर और लाखों लोगों के पास अपनी बात पहुंचाई. उन्होंने Riders Of Hope नाम से एक ग्रुप भी बनाया है जिसके जरिये वो निशुल्क में ब्लड देने का काम कर रहे है.

इसी के साथ वो पिछले दो साल से एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में भी काम कर रहे है .वो देश के बाकी बचे 14 राज्यों में भी अपनी यात्रा के जरिये कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाना चाहते है. उनका सपना है कि देश के हर कैंसर पीड़ित से वो मिल सके और उनको सम्बल प्रदान कर सके .

Be Positive, हर्टीज भारतेश (Harteij Bhartesh) के हौसले एवं जज्बे को सलाम करते है और उम्मीद करते है कि आप से सींख लेकर देश के अन्य लोग भी कैंसर जैसी बीमारी के प्रति जागरूक हो सके.

Comments

comments