मेहनत इतनी ख़ामोशी से करो की कामयाबी शोर मचा दे !

यह पंक्ति बिहार के पटना के रहने वाले 17 वर्षीय छात्र पर सटीक बैठती है. बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाले इस छात्र ने अपनी प्रतिभा और मेहनत से ऐसे अविष्कार किये है जिन्हे देखकर लोग दांतो तले अंगुली दबा दे. अपने भाई को रोबोटिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण बनाते हुए देखकर इन्होने आठवीं क्लास से हाथ आजमाने शुरू किये है. आज वो न केवल रोबोटिक्स, IOT , आर्टिफीसियल इंटेलीजेन्स (AI) में एक्सपर्ट है जबकि अपनी खुद की कंपनी चला रहे है. Vicube कंपनी के सह-संस्थापक और युवा उद्यमी का नाम है हर्षिल आनंद (Harshil Anand).

हर्षिल आनंद ने रोहित दयानी (Rohit Dayani) के साथ मिलकर Vicube की स्थापना की. आज उनकी कंपनी वेब सर्विसेज, रोबोटिक्स, ड्रोन के साथ ही कई आइडियाज पर काम कर रही है. उनके बनाये हुए स्मार्ट टी-शर्ट को देश भर में खूब सराहा गया है. उनके स्मार्ट टी-शर्ट का प्रोटोटाइप तैयार है और पेटेंट के बाद उसका व्यावसायिक उत्पादन शुरू करेंगे.

बी पॉजिटिव से ख़ास बातचीत में हर्षिल आनंद ने बताया कि मेरे पिता बैंकर है और उनकी पोस्टिंग झारखण्ड में थी. मेरी दादी हृदय की मरीज थी जिसके चलते उन्हें हर वीकेंड पर यात्रा करनी पड़ती है. इसी से मुझे स्मार्ट टी शर्ट बनाने का आईडिया आया और मेने प्रोटोटाइप पर काम करना शुरू किया. इंटरनेट पर रिसर्च और Vicube Team के साथ मिलकर यह स्मार्ट टी-शर्ट डिज़ाइन की है.

vicube team
Vicube Team

इस टी-शर्ट को पहनने के बाद यह शरीर के तापमान के साथ ही, ब्लड प्रेशर, स्ट्रेस लेवल और ह्रदय गति को हर पांच सेकंड में क्लाउड पर भेजती है. यह डाटा स्मार्ट टी शर्ट मोबाइल एप्लीकेशन के जरिये कही से भी देखा जा सकता है. इसके साथ ही जब भी बुजुर्ग की पल्स रेट या तापमान एक सीमा से ज्यादा हो जाते है तो आटोमेटिक अलर्ट भेज दिया जाता है.

इस टी-शर्ट में एक पैनिक बटन भी दिया गया है जो मुसीबत के समय बुजुर्ग दबा सकते है जिससे उनके बेटे या बेटी की अलर्ट चला जाता है. यह टी-शर्ट न केवल हेल्थ डाटा को मापने के लिए बल्कि घर से दूर रह रहे बेटे-बेटी को उनके माँ-बाप के स्वास्थ्य की जानकारी देता है.

हम इसका प्रोटोटाइप बना चुके है और इसका जल्द ही व्यावसायिक उत्पादन भी शुरू करेंगे. इस प्रोटोटाइप को बनाने में Vicube के साथी रोहित दयानी, रंजन कुमार (Ranjan Kumar) और त्रिशित प्रमाणिक (Trishit Pramanik) ने सहयोग किया. इस टी-शर्ट के लिए हमें बिहार सरकार से अवार्ड भी मिल चूका है.

हर्षिल आगे बताते है कि हमारा उद्देश्य ऐसे ही यूनिक प्रोडक्ट्स बनाना है जिससे की आम लोगो की समस्याओं का हल हो सके. AI और IOT के इस्तेमाल से लोगो का जीवन आसान बनाना है.

अपनी यात्रा के बारे में हर्षिल बताते है कि मेरा जन्म बिहार के पटना में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ. पिता बैंक में काम करते है जबकि माँ गृहणी है. बड़े भाई बैंगलोर एक कॉलेज से इंजीनियरिंग कर रहे है. मैं अक्सर अपने भाई को रोबोट और मशीनों से खेलते हुए देखा तो मेरा भी इनमें इंटरेस्ट जगा.

आठवीं कक्षा में अपने भाई की मदद से मैंने पहला रोबोट बनाया और अपने स्कूल के साथियों के साथ हमने आईआईटी दिल्ली के रोबोटिक्स कांटेस्ट में भाग लिया. उस प्रतियोगिता में हम भले ही हार गए हो लेकिन वहाँ से बहुत कुछ सिंखने को मिला. इसी प्रतियोगिता में जब ड्रोन देखा तो ड्रोन बनाने का ख्याल आया.

घर लौटने के बाद पिताजी से दस हज़ार रुपये लेकर के ड्रोन बनाने में जुट गया. इसके लिए मेने C ++ नाम की कंप्यूटर प्रोग्रामिंग भी सिंखी. इंटरनेट से सींखकर कुछ ही दिनों में मेने खुद का ड्रोन बनाया और नाम दिया ‘मेडी रोबोट’.

इस ड्रोन के जरिये आपात स्थितियों में मेडिकल सुविधाए पहुंचाई जा सकती है. बाढ़ या भूकंप के समय हेलीकाप्टर से मेडिकल और फ़ूड पैकेट्स गिराए जाते है लेकिन तकनिकी रूप से यह महंगा पड़ता है. इस ड्रोन के जरिये कम लागत में लोगो को आवश्यक सुविधाए पहुंचाई जा सकती है. इस ड्रोन के लिए भी हमें सम्मानित किया गया.

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एक अवार्ड समारोह में हर्षिल आनंद

इसके बाद मेरा इंटरेस्ट ड्रोन के साथ ही AI और IOT में जगा लेकिन मैं खुद ही अपना काम करना चाहता था क्योंकि बार-बार अपने परिवार से पैसा नहीं ले सकते है. इसके लिए मैंने वेब डेवलपमेंट सिंखा और फ्रीलांसिंग के जरिये कमाई करने लगा. उससे जो भी पैसा मिलता उसे मैं पाने प्रयोगो और आइडियाज पर खर्च करता.

यह काम करते-करते ही मेरी मुलाकात रोहित दयानी से हुई और हमने साथ मिलकर काम करना शुरू किया. रोहित के बाद रंजन कुमार और त्रिशित भी टीम से जुड़े तो हमने Vicube नाम से कंपनी बना ली. अभी हम चारो साथ में काम करते है और स्मार्ट टी-शर्ट के साथ ही कई अन्य आइडियाज पर काम कर रहे है.

हर्षिल की उम्र महज 17 वर्ष है और अभी बारहवीं की पढाई शुरू की है लेकिन उनके आइडियाज और विज़न इतने शानदार है कि वो कई लोगों के जीवन में बदलाव ला सकते है. हर्षिल को आईआईटी पटना, बीआईटी मेसरा और बीआईए में हाल ही में हुई प्रतियोगिता में अपने इनोवेशन के लिए पुरस्कार मिल चुका है.

बी पॉजिटिव, हर्षिल आनंद और Vicube की पूरी टीम की सफलता पर बधाई देता है और उम्मीद करता है कि आप से प्रेरणा लेकर देश में ही विज्ञान और रिसर्च का माहौल बनेगा.

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