अपने पुश्तैनी व्यापार छोड़कर अपनी खुद की एक कंपनी बनाते है तथा कुछ ही दिनों में ऐसे क्षेत्रों में अपने प्रोडक्ट उतारते है जिनमे बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ प्रतियोगिता में कही नहीं थी । तीन दशक के लम्बे संघर्ष और मेहनत के बाद आज हर तीसरा भारतीय उनके प्रोडक्ट्स अपने दैनिक जीवन में उपयोग में लेता है ।

50 लाख के शुरुआती निवेश से शुरू हुए उनके सफर ने 2017 के अंत तक लगभग 3500 करोड़ रुपये का बिज़नेस साम्राज्य खड़ा कर दिया । अपने व्यापरिक कौशल के बदौलत उन्होंने न केवल अपने प्रतिद्वंदियों को पछाड़ा बल्कि उनके प्रोडक्ट्स को अपनी कंपनी में अधिग्रहण के द्वारा मिला भी दिया । इस व्यापरिक कौशल की प्रतिमूर्ति ने Marico Industries नाम से अपनी कंपनी बनाई तथा उस उद्यमी का नाम है – हर्ष मरीवाला (Harsh Mariwala)

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माया नगरी मुंबई में एक बिज़नेस परिवार में जन्मे हर्ष ने Marico Industries की छत के नीचे कई नामी-गिरामी बॉन्ड्स पैदा किये जिन्हे करोड़ो भारतीय उपयोग में लाते है । पैराशूट (Parachute) , निहार (Nihar) , काया(Kaya) , मेडिकर (Medikar), शांति(Shanti) , सफोला (Saffola), हेयर एंड केयर(Hair and Care) , Revive, HairCod आदि ब्रांड्स marico Industries ही बनाती है तथा 2010 में उन्होंने पारस फार्मा (Paras Pharma) का भी अधिग्रहण कर लिया जिससे उनके ग्रुप में भारत के कई जाने – माने ब्रांड्स आ गए है । हर्ष की कंपनी भारत समेत 25 देशों में व्यापार करती है तथा आपको जानकर आश्चर्य होगा कि बांग्लादेश की हेयर आयल इंडस्ट्री में पैराशूट की हिस्सेदारी लगभग 80 % से अधिक है ।

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PC :India Retailing

हर्ष ने अपनी कंपनी के जरिये मध्य एवं पश्चिमी अरब देशों के साथ ही नेपाल , भूटान एवं बांग्लादेश में अपने प्रोडक्ट्स निर्यात किये जाते है । अभी वो यूरोप एवं आसियान देशों में अपनी कंपनी की विस्तार की योजना पर काम कर रहे है । आज उनके कुल टर्नओवर में पैराशूट और सफोला ब्रांड की लगभग 30 % हिस्सेदारी है जबकि Kaya ब्रांड्स से लगभग 600 करोड़ रुपये का टर्नओवर होता है ।

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1971 में मुंबई यूनिवर्सिटी से कॉमर्स में स्नातक हर्ष ने अपने पुश्तैनी व्यापार जो कि Bombay Oil Industries Limited में कमेडिटी का काम करती है , को ज्वाइन किया । बिना कोई मार्केटिंग की शिक्षा हासिल किये हुए हर्ष ने ब्रांडिंग और ग्राहकों की संतुष्टि के साथ ही अपने डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को सही करने में अपने शुरुआती साल खपा दिए । यहाँ उनसे कई गलतिया हुई लेकिन गलतियों से सीखते हुए उन्होंने 1990 तक अपने परिवार की कंपनी को शीर्ष पर पहुंचाने का काम किया ।

उनके पुश्तैनी व्यापार में उनके पिता के अलावा अन्य पारिवारिक सदस्य भी सम्मिलित थे इसलिए हर्ष ने अपना कुछ अलग काम करने के लिए 1990 में अपनी पुश्तैनी कंपनी छोड़ दी और marico नाम से एक नयी कंपनी शुरू करने के लिए निकल पड़े । FMCG सेक्टर में काम करने का उन्हें बड़ा फायदा हुआ और 40 वर्ष की उम्र में एक नयी कंपनी शुरू करने का हौसला भी उनकी सफलता का मुख्य कारण रहा ।

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marico ने सबसे पहले सफोला नाम से खाद्य तेल बेचना शुरू किया । आक्रामक मार्केटिंग रणनीति और उच्च गुणवत्ता मानकों के कारण उनका बिज़नेस चल निकला और जल्द ही वो मार्केट लीडर बन गया । खाद्य तेल में सफलता के बाद उन्होंने हेयर आयल में अपना हाथ आजमाने की कोशिश की और मार्केट रिसर्च से उन्हें यह पता चला कि उस वक्त नारियल तेल में कोई भी प्रोडक्ट मार्केट में उपलब्ध नहीं है । इसी का फायदा उठाते हुए उन्होंने पैराशूट ब्रांड से नारियल तेल लांच किया जो कुछ ही समय में हर घर की जरूरत बन गया ।

पैराशूट ब्रांड के बाजार में आने के बाद ही कुछ लोगों ने नकली नाम और सामान पैकिंग के रूप में नारियल तेल बेचना शुरू कर दिया जिससे हर्ष की कंपनी को कुल सेल्स का लगभग 20 % नुकसान होना शुरू हो गया । इसके हल के लिए हर्ष ने भारत में पहली बार प्लास्टिक पैकेजिंग एवं नए तरह की डिज़ाइन शुरू की जो दिखने में आकर्षक होने के साथ ही कॉपी करने में बहुत मुश्किल थी । इस नवीनीकरण को उन्होंने एक रुपये की पैकेट से लेकर 5 लीटर के पैक में अपनाया । यह तकनीक भले ही महँगी थी लेकिन इससे मार्केट में नकली ब्रांड मिलना लगभग नामुमकिन हो गया ।

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हेयर आयल की सफलता के बाद उन्होंने कई अन्य ब्रांड भी लांच किये जो अपने क्षेत्र में एक नया आयाम स्थापित करने वाले ब्रांड बन गए । हर्ष के व्यापारिक कौशल की बदौलत ही 2005 में हिंदुस्तान यूनिलीवर के हेयर आयल ब्रांड “निहार” का उन्होंने अधिग्रहण कर लिया । अब मरिको के पास वो सारे ब्रांड मौजूद थे जो हेयर आयल में उनकी श्रेष्ठता साबित करते है ।

अपने बिज़नेस को बड़ा बनाने के लिए उन्होंने एक और आक्रामक मार्केटिंग रणनीति को बनाये रखा तथा दूसरी तरफ उन्होंने सभी को चौकांते हुए 2010 में पारस फार्मा का अधिग्रहण कर लिया जो भारतीय मार्केट में Moov , Crack के साथ अन्य प्रोडक्ट्स के साथ मौजूद थी और इससे मरीको इंडस्ट्रीज को दूरगामी परिणाम हुए तथा आज उनकी कंपनी भारत के साथ ही अन्य देशों में अपने गुणवत्ता पूर्ण प्रोडक्ट्स के लिए जानी जाती है ।

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हर्ष मरीवाला अपनी सफलता का राज़ जोखिम उठाने की क्षमता के साथ ही मार्केट में मौजूद बेस्ट टैलेंट का अपनी टीम में होना बताते है । उनके अनुसार अगर आपका एक प्रोडक्ट नहीं चला तो दूसरा चल जायेगा लेकिन अगर आपकी टीम आपके दृष्टिकोण का समर्थन नहीं करती है तथा टीम में से कुछ लोग चले जाये तो यह कंपनी के लिए बड़ा नुकसान है ।

68 वर्षीय हर्ष ने मरिको इंडस्ट्रीज की कमान नयी पीढ़ी को सौपते हुए 2014 में सीईओ के पद से इस्तीफा दे दिया है लेकिन मार्गदर्शन के लिए बोर्ड मेंबर बने हुए है । हर्ष के एक पुत्र और पुत्री के रूप में दो संतान है , ऋषभ जो कि अपनी खुद की कंपनी चलाते है और मरिको में अपना कोई दखल नहीं देते है । उनकी पुत्री राजवी भी अपने काम में व्यस्त है ।

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2.2 बिलियन डॉलर के मालिक हर्ष अभी अपना फॅमिली ऑफिस संभालने के साथ ही युवा पीढ़ी के मार्गदर्शन के लिए सदैव तत्पर रहते है । हर्ष मानते है कि ” विकल्प विहीन संकल्प के साथ अथाह मेहनत से सभी लक्ष्यों को पाया जा सकता है ।

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