उत्तर प्रदेश के एक गांव में एक किसान परिवार रहता है जिनमे कुल आठ सदस्य है। अकाल एवम् महंगाई के दौर में इस परिवार के लालन पालन में इस परिवार के मुखिया को संघर्ष करना पड़ता है। हर आम भारतीय ग्रामीण की तरह यह परिवार भी कमाई करने के लिए शहर (दिल्ली) आ जाता हैं।

लेकिन गांव से निकला यह परिवार दिल्ली की झुग्गी बस्ती में बसर करने के लिए मजबूर हो जाता है। पिता लुहार का काम करते है और उनका आठ साल का एक बच्चा अपने पिता की मदद करके परिवार की सहायता करता है।

उसके लिए स्कूल एक सपना बनकर रह जाता है। वहीं आठ साल का बच्चा आज महीने के दो लाख रुपए कमाता है। इसके साथ ही वो एक प्रोफेशनल साइकोलॉजी ट्रेनर है। एक फ़िल्मी कहानी की तरह ज़िन्दगी है इस नौजवान – हेरी (Harry) की।

दिल्ली की झुग्गियों से कॉरपोरेट जगत में कदम रखना इनके लिए काफी मुश्किल रहा। कदम-कदम पर उन्होंने कठिन परीक्षाओं का सामना किया । यहां तक कि उन्होंने एक बार आत्महत्या का प्रयास भी किया।

एक कंप्यूटर सेंटर पर हेल्पर का काम करने वाला हैरी आज डिजिटल मार्केटिंग गुरु बन चुका है। डिजिटल मार्केटिंग, कंसल्टिंग और ऑनलाइन एवम् ऑफलाइन साइकोलॉजी ट्रेनिंग के जरिए हैरी अच्छी खासी कमाई करते हैं।

इस मुकाम पर पहुंचे हैरी को सफलता एक दिन में नहीं मिली बल्कि उन्होंने समय रहते मौकों को शानदार तरीके से भुनाया है। पैसे कमाने के लिए कई तरह के काम किए और एक बार तो अपनी सारी जमा पूंजी गंवा दी लेकिन हैरी फिर खड़ा हुआ। आज लोग उनको अपनी प्रेरणा मानते हैं।

अब कहानी वहीं से शुरू करते है जहां पर छोड़ दी थी। हैरी और उसके पिता रोजगार की तलाश में दिल्ली की झुग्गियों में पहुंच जाते हैं। हैरी अपने पिता की मदद करके खुश था। तभी एक एनजीओ ने हैरी के पिता को उस स्कूल भेजने के लिए मनाया। मुफ्त में बच्चों को पढ़ाने के साथ ही यह एनजीओ बच्चों को फ्री खाना और एक सौ पचास रुपए भी देते थे।

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ट्रेनिंग सेशन के दौरान हैरी । Image Source : YourStory

हैरी पढ़ने में होशियार था इसलिए वो कक्षा में हमेशा प्रथम आता था । हैरी की प्रतिभा को देखते हुए उन्हें जल्द ही एक कक्षा से दूसरी कक्षा में बिठा दिया गया। हैरी की ज़िन्दगी कुछ अच्छी चल रही थी। वो हर कक्षा में प्रथम आता और उसे स्कॉलरशिप मिलती ।

छठी कक्षा में उसे दूसरी स्कूल में भेजा गया। नए वातावरण और माध्यम के चलते हैरी इस बार प्रथम की जगह कक्षा में तृतीय आया। इसके चलते उसे स्कॉलरशिप मिलना बंद हो गई। इससे उनके पिता बहुत नाराज़ हो गए और उनकी जम कर पिटाई कर दी। पीटने के बाद हैरी का ध्यान पढ़ाई से हट गया और वो धीरे-धीरे स्कूल जाने से बचने लगा।

यह खबर जब उनके पिता को चली तो उन्होंने एक बार फिर हैरी की खबर ले ली। इससे नाराज़ होकर हैरी ने उनके पिता का घर छोड़ दिया। अगले दो से तीन दिन पास के पार्क में भूखे सोकर निकाले। इसी के साथ हैरी का पढ़ाई से नाता छूट गया।

अब वो छोटे- मोटे काम करके अपना काम कर रहे थे। इसी बीच उनके पिता को टीबी की बीमारी हो गई। इसके चलते घर की जिम्मेदारी उनकी मां पर आ गई। उनकी मां ने घरों में बर्तन साफ करके परिवार को चलाना शुरू किया। छह माह के बाद उनकी मां को भी कैंसर ही गया जिनकी इलाज के अभाव में अगले कुछ महीनों में मौत हो गई।

उनके पिता भी टीबी से ज्यादा दिन संघर्ष नहीं कर पाए और वो भी चल बसे । इस सदमे के चलते उनके दादाजी की भी मौत हो गई। परिवार में अब केवल हैरी और उनके भाई-बहन बचे थे। छोटा-मोटा काम करके ज़िन्दगी चला रहे थे।

हैरी को एक कंप्यूटर सेंटर पर हेल्पर की नौकरी मिल गई। हैरी ने पहली बार कंप्यूटर को इतनी पास से देखा। वो ऑफिस में साफ सफाई के साथ ही चाय एवम् पानी पिलाने जैसे छोटे- मोटे काम करते थे। लेकिन उनको कंप्यूटर सीखने की ललक पैदा हो गई। वो जब भी समय मिलता, कंप्यूटर सीखना शुरू कर देते थे। साथ ही वो अंग्रेजी भाषा भी सीख रहे थे।

एक दिन हुई एक घटना ने उनकी ज़िन्दगी बदल दी। हुआ यूं कि एक कंप्यूटर टीचर सेंटर पर लेट पहुंचे तो हैरी बच्चों को उनकी समस्याएं सुलझाने में मदद कर रहा था। यह देखकर कंप्यूटर टीचर नाराज़ हो गया और उसने कंप्यूटर सेंटर के डायरेक्टर से हैरी की शिकायत कर दी।

डायरेक्टर ने हैरी को नौकरी से निकालने के बजाय उसे ट्रेनर की नौकरी करने का ऑफर दिया। हैरी के लिए यह बहुत ही बड़ी उपलब्धि थी। अगले कुछ वर्षों में उसने कंप्यूटर सीखना और पढ़ाना जारी रखा। इसके साथ ही कंप्यूटर प्रोग्रामिंग में भी अपने आप को कुशल बना दिया।

अब हैरी ने एमएनसी (मल्टी नेशनल कंपनी जैसे इनफ़ोसिस, TCS, विप्रो आदि) कंपनी में नौकरी करने का प्लान बनाया लेकिन डिग्री के अभाव में उसे कहीं पर जॉब नहीं मिली। उसने फर्जी मार्कशीट भी बनाई लेकिन वो सफल नहीं हुए।

इसके बाद ज्यादा पैसे कमाने के चक्कर में उन्होंने मल्टीलेवल मार्केटिंग में अपनी सारी जमा पूंजी गंवा दी। उन्हें अपने कमरे के किराए के लिए भी पैसे जुटाने में भी दिक्कत हुई। इसके चलते उन्हें कई दिन एक समय भूखा तक रहना पड़ा।

लेकिन हैरी हार मानने वाले कहां थे। उन्होंने एक बार फिर शून्य से शुरुआत करने का निश्चय किया। उन्होंने अपने कमरे पर ही कंप्यूटर सिखाने का काम शुरू किया। पहले ही महीने उनके पास सत्रह बच्चे आ गए जिससे कि हैरी की गाड़ी चल निकली।

हैरी ने इसके साथ ही प्रोफेशनल ट्रेनिंग कराना शुरू कर दिया। इस बार हैरी ने पिछले बार की तरह गलती नहीं की। समय के साथ उन्होंने डिजिटल मार्केटिंग में भी हाथ आजमाया। अपने कड़े परिश्रम से इस क्षेत्र में भी हैरी बहुत जल्द एक्सपर्ट बन गए।

आज हैरी डिजिटल मार्केटिंग, वेब डिजाइनिंग, SEO के साथ ही कंसल्टेंट का काम करते हैं। अलग- अलग क्षेत्रों में काम करते हुए वो आज महीने के दो लाख रुपए से ज्यादा की कमाई करते हैं।

हैरी से संपर्क करने के लिए आप उन्हें इस नंबर +91-8285909385 पर कॉल कर सकते है या उनकी वेबसाइट पर लॉगिन कर सकते है

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