देश की कठिनतम परीक्षाओं में शुमार यूपीएससी परीक्षा में सफल होना आसान नहीं है लेकिन एक ही परिवार से तीन बहनें अगर IAS अधिकारी बने और राज्य की मुख्य सचिव बन जाए तो विश्वास करना मुश्किल है. लेकिन हरियाणा के एक परिवार से तीन बहनें IAS बनीं और बड़े प्रशासनिक पदों में से एक मुख्य सचिव तक पहुँचाना वाकई काबिलेतारीफ हैं.

हरियाणा के अलग राज्य बनने के 25 साल बाद, 1983 बैच की आईएएस अधिकारी केशनी राज्य की पहली महिला डिप्टी कमिश्नर बनीं.अब वो राज्य की मुख्य सचिव बनीं. लेकिन ये पल उनके और उनके परिवार के लिए बहुत ही ख़ास था क्योंकि ये अपने परिवार की तीसरी बहन थीं जो कि किसी राज्य की मुख्य सचिव बनी थीं.

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IAS केशनी आनंद अरोड़ा

हरियाणा की केशनी आनंद अरोड़ा मुख्य सचिव बनीं हैं. उनकी बड़ी बहनें मीनाक्षी आनंद चौधरी एवं उर्वशी गुलाटी उनसे पहले राज्य की मुख्य सचिव रह चुकी हैं. तीनों बहनें इस कामयाबी का पूरा श्रेय वो अपने माता-पिता और ख़ासकर पिता प्रोफ़ेसर जीसी आनंद को देती हैं.

आपको बता दे कि केशनी आनंद अरोड़ा का परिवार रावलपिंडी (पाकिस्तान) से बंटवारे के समय भारत आ गया था. उनका परिवार उस राज्य में विस्थापित हुआ जो देश में सबसे कम लिंगानुपात के लिए बदनाम हैं. वहां एक ही परिवार की तीन सगी बहनों का आईएएस बनना और फिर बाद में तीनों का मुख्य सचिव बनना बहुत बड़ी बात है.

BBC की रिपोर्ट के अनुसार केशनी आनंद अरोड़ा कहती हैं कि ये उनका सपना था जो आज पूरा हो गया. उन्होंने घर में ऐसा माहौल बनाया था जिससे हमें अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान देने का मौक़ा मिला.’

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अपने परिवार के साथ IAS केशनी आनंद अरोड़ा

केशनी कहती हैं कि उन दिनों हालात उतने आसान नहीं थे. जब उनकी बड़ी बहन मीनाक्षी ने 10वीं क्लास पास की तो उनके रिश्तेदारों ने उनके माता-पिता पर दबाव डालना शुरू कर दिया कि अब वे उनकी शादी कर दें. लेकिन उनकी मां ने कहा कि बुरे समय में आपकी पढ़ाई- लिखाई ही काम आती है.

पुरुष-प्रधान समाज पर तंज कसते हुए केशनी कहती हैं कि लोग महिलाओं को अहम पदों पर बैठते हुए देखने के आदी नहीं हैं. जब मैं किसी इलाक़े का दौरा करने जाती थी तो लोगों को लगता था कि डिप्टी कमिश्नर साहब की पत्नी आईं हैं. मुझे याद है लोग गांव के पटवारी से पूछते थे कि क्या डीसी साहब ने अपनी बेटी को काम पर लगा रखा है.

अपनी पहली पोस्टिंग को याद करते हुए केशनी कहती हैं, ”जब पहली बार मुझे डिप्टी कमिश्नर बनाया गया तो मुझसे कहा गया कि अगर मैं बढ़िया प्रदर्शन नहीं करूंगी तो फिर किसी और महिला अफ़सर को ये पोस्ट नहीं मिलेगी. अगले साल जब ट्रांसफ़र लिस्ट निकली तो मुझे ये देखकर ख़ुशी हुई कि उनमें दो महिलाओं को डिप्टी कमिश्नर बनाया गया था.

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अपनी बहनो के साथ IAS केशनी आनंद अरोड़ा

वो कहती हैं कि हालात बेहतर ज़रूर हुए हैं लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाक़ी है. उनका कहना है कि लोगों की मानसिकता बदलनी चाहिए. उनके अनुसार अगर महिलाओं को सही माहौल मिले तो वो कुछ भी हासिल कर सकती हैं.

बी पॉजिटिव इंडिया, IAS केशनी आनंद अरोड़ा एवं उनकी बहनों की सफलता पर बधाई देती हैं. उम्मीद हैं आप से प्रेरणा लेकर देश की लड़कियां प्रशासनिक सेवाओं में जाने के लिए प्रेरित होगी.

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