चित्र साभार : The Better India

भारत के किसानो की हालत आज किसी से छुपी हुई नहीं है, बढ़ती लागत और बढ़ते कर्ज ने लाखों किसानों को आत्महत्या जैसे कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया है ।

कम समर्थन मूल्य और मौसम में निर्भरता ने किसानो की हालत कमजोर कर दी है जिससे वो शहरों की और पलायन कर रहे है तथा मजदूरी करके अपना पेट भर रहे है । भारत में लगातार किसानों की संख्या में कमी हो रही है और हालत अभी बद से बदतर होते जा रहे है ।

आज शिक्षक का बेटा शिक्षक बनना चाहता है लेकिन आज एक किसान अपने बेटे को किसान नहीं बनाना चाहता है क्योंकि उसकी हालत अब दयनीय हो चुकी है ।

लेकिन इसी मुसीबत की घडी में एक युवां उद्यमी है जो इन किसानो में उम्मीद की नयी किरण जगा रहा है । खेतीबाड़ी करने के लिए उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी तक छोड़ दी है और आज एक आधुनिक किसान बनकर उदाहरण पेश कर रहे है ।

हरीश धनदेव जो कि 2013 तक राजस्थान सरकार में एक इंजीनियर की जॉब कर रहे थे, ने अपने क्षेत्र में जो कि थार रेगिस्तान में स्थित जैसलमेर जिले के अंतर्गत आता है । उन्हें अपने क्षेत्र में अपार संभावनाए नजर आयी और इस मौके को हरीश चूकना नहीं चाहते थे ।

हरीश के पास लगभग 80 एकड़ पुश्तैनी ज़मीन थी और उनके पिता खेती-बाड़ी का काम करते थे । हरीश ने आर्य कॉलेज से सिविल में इंजीनियरिंग की और राजस्थान सरकार में J. En.  के पद पर कार्य कर रहे थे । अपनी जॉब के कारण हरीश अपने पिता की ढंग से मदद नहीं कर पा रहे थे लेकिन वो खेतीबाड़ी में कुछ नया करना चाहते थे ।

हरीश ने एकदम से जॉब छोड़ने के बजाय खेतीबाड़ी के आधुनिक तरीकों के बारे में रिसर्च करना उचित लगा और उन्होंने विभिन्न माध्यमों से सूचनाए जुटाना शुरू किया । उसके लिए उन्होंने कई प्रर्दशनियों के अलावा सेमिनार में भी भाग लिया तथा आधुनिक किसानों से मीटिंग्स की और नए तरीकों से खेतीबाड़ी करने के गुर सीखना शुरू किया ।

हरीश ने सबसे पहले खेतों की मिट्टी की जाँच करवाई और कृषि विभाग के अधिकारीयों ने साइल रिपोर्ट के आधार पर उन्हें मूंग,बाजरा या ग्वार की खेती करने की सलाह दी लेकिन हरीश को अपनी जमीन ऐलोवेरा की खेती के लिए उपयुक्त लगी लेकिन सबसे बाड़ी मुसीबत अपनी फसल को मार्केट में बेचना था क्योंकि तब तक जैसलमेर में ऐलोवेरा के लिए कोई खरीददार नहीं था ।

लेकिन हरीश कहाँ पर हार मानने वाले थे , अपने इंजीनियरिंग के अनुभव से उन्होंने indiamart और अन्य ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी फसल बेचने का फैसला किया और लग गए खेतीबाड़ी करने में ।

हरीश ने शुरुआत में 15 से 20 एकड़ में ही ऐलोवेरा बोने का फैसला किया क्योंकि ऐलोवेरा प्लांटिंग की कॉस्ट ज्यादा होती है लेकिन बाद में ऐलोवेरा प्लांट ने प्राकृतिक रूप से पुरे खेतों में फ़ैल गया । सत्तर हज़ार पौधे कब सात लाख में बदल गए पता ही नहीं चला ।

हरीश ने अपने खेतो में कोई कीटनाशक या रसायनों का प्रयोग नहीं किया है और वो जैविक खाद के साथ ही गाय और भैंसों के गोबर का प्रयोग ही किया जिससे उनकी पैदावार भी बढ़ी और मिट्टी की उर्वरकता भी कम नहीं हुई ।

हरीश ने छह महीनो के भीतर ही ऐलोवेरा की पत्तियों को बेचना शुरू कर दिया और राजस्थान के ही 10 क्लाइंट्स को अपनी फसल बेचना भी आरम्भ कर दिया । धीरे -धीरे हरीश को पता चला कि ऐलोवेरा की पत्तियों से ज्यादा उसके पल्प की कीमत मिलती है तो उन्होंने एलोवेरा की पत्तियों से पल्प निकालने का काम शुरू करने का फैसला किया ।

सही तकनीक और संयंत्रों के दम पर हरीश ने देखते ही देखते उन्होंने सफलता का स्वाद चखना शुरू कर दिया तथा धनदेव ग्लोबल ग्रुप नाम से कंपनी स्थापित जो “Naturealo” ब्रांड से ऐलोवेरा पल्प बेचते है तथा लगभग तीन करोड़ सालाना का टर्नओवर होता है ।

हरीश ने और ज़मीन खरीद कर लगभग 100 एकड़ में ऐलोवेरा की खेती करना शुरू कर दिया है। हरीश अपने खेतों में ऐलोवेरा के साथ अब अनार , आवला और गुन्दा भी उगाते है ।

हरीश का यह सफर कतई आसान नहीं था क्योंकि किसान हो या आम आदमी कभी भी अपने कम्फर्ट जोन से बाहर नहीं निकलते है और नए आईडिया के लिए रिस्क उठाने का साहस नहीं जुटा पाते लेकिन हरीश ने आरामदायक सरकारी जॉब छोड़ कर एक नई पहल कायम की और साबित किया की अगर मेहनत और समझदारी से काम किया जाये तो सफल हुआ जा सकता है ।

हरीश अपनी कंपनी के जरिये लगभग 100 किसान परिवारों को रोजगार दे रहे है और विभिन्न किसानो को ऐलोवेरा की खेती करने के लिए प्रेरित भी कर रहे है ।

Be Positive हरीश की मेहनत और लगन को सलाम करते है और उम्मीद करते है कि अन्य किसान भी उनसे प्रेरणा लेकर अपना जीवनस्तर उठाएंगे ।।

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