देश में शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए कई लोग लगे हुए है लेकिन कुछ लोग ऐसे भी है जो अपनी शारारिक कमजोरी या आर्थिक दिक्कत के बावजूद देश को शिक्षित बनाने के यज्ञ में अपने संघर्षो के जरिये आहूति दे रहे है. ऐसे ही एक शख्स है 49 साल के गोपाल खंडेलवाल (Gopal Khandelwal) . भले ही वो दिव्यांग हो लेकिन जज्बे में किसी से कम नहीं है.

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के छोटे से गांव पत्ती का पुर में रहने वाले गोपाल खंडेलवाल बीते 20 साल से गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षित बना रहे है. अपने गुरुकुल में सुबह 5:30 बजे से शाम के 6 बजे तक हर दिन क्‍लासेज चलती हैं.

एक घटना ने बदल दिया जीवन

गोपल खंडेलवाल मुलत: बनारस के रहने वाले है. बचपन से पढ़ने में तेज गोपाल डॉक्टर बनना चाहते थे और इसी के चलते उन्हें आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में दाख‍िला मिल गया. एक दिन वह बाइक से जा रहे थे, तभी पीछे से आ रही एक कार ने उन्‍हें टक्‍कर मार दी.

इस घटना के कारण गोपाल खंडेलवाल की कमर के नीचे का पूरा हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया. लेकिन उन्‍होंने बीते 20 वर्षों में सैकड़ों बच्‍चों को इस लायक बना दिया है कि वो अपने पैरों पर खड़े हो सके.

सड़क दुर्घटना के छह महीने बाद ही उनकी मां का भी निधन हो गया. गोपाल पर जैसे पहाड़ टूट पड़ा हो लेकिन माँ ने अंतिम दिनों में अपने बेटे को ‘कभी भी जीवन में हार न मानने’ की सींख दी.

नावेल शिक्षण संस्थान में शिक्षा ग्रहण करते बच्चे | तस्वीर साभार : नावेल शिक्षण संस्थान के फेसबुक पेज से

गोपाल कहते हैं, ‘मेरे लिए सामान्य जीवन बहुत मुश्किल हो गया था. मुझे लगने लगा था कि मैं अपनों के लिए भी बोझ बन गया हूं. लेकिन मैं जीना चाहता था. मेरी मां ने मुझसे यही कहा कि कभी हार नहीं मानना.’

डॉक्टर मित्र की मदद से पहुंचे बनारस से मिर्ज़ापुर के गांव

द बेटर इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, गोपाल की मदद के लिए उनके दोस्त डॉ. अमित दत्ता आगे आए. वह उन्हें लेकिन ‘पत्ती का पुर’ गांव ले आए. गांव के बाहरी इलाके में गोपाल के लिए एक छोटा-सा कमरा बनाया गया और उनके खाने-पीने का इंतजाम किया गया.

कुछ दिनों तक अकेलापन ही गोपाल का साथी रहा, लेकिन फिर गांव वाले धीरे-धीरे उन्‍हें जानने-पहचानने लगे. गोपाल ने देखा कि गांव में बच्चों की शिक्षा के कोई खास उपाय नहीं हैं. इसलिए उन्‍होंने बिस्तर पर लेटकर ही बच्चों को पढ़ाना शुरू किया.

गोपाल कहते हैं, ‘यह इलाका नक्सलवाद से प्रभावित है. यहां बच्चों को पढ़ाई की बजाय बचपन में ही किसी ना किसी काम पर लगा दिया जाता है. गरीबी और जातिवाद दंश भी बच्‍चों को बेहतर श‍िक्षा से रोकता है.’ गोपाल ने सबसे पहले एक पांच साल की बच्‍ची को पढ़ाना शुरू किया.

गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए खोला शिक्षण संस्थान

नोवल श‍िक्षा संस्‍थान के नाम से गुरुकुल की शुरुआत की. तब सबसे बड़ी समस्‍या बच्‍चों के मां-बाप को समझा-बुझाकर उन्‍हें इस बात के लिए राज़ी करना था कि वह अपने बच्‍चों को पढ़ने के लिए भेजे.

गोपाल की कड़ी मेहनत रंग लाई और गोपाल गांव के ‘मास्‍टरजी’ बन गए. बताया जाता है कि 20 वर्षों में गोपाल ने गांव के करीब 2,500 बच्चों को मुफ्त श‍िक्षा दी है. अब वह व्‍हीलचेयर पर बैठते हैं और सुबह 5:30 बजे से शाम के 6 बजे तक क्‍लासेज लेते हैं.

बच्चों को पढ़ते हुए गोपाल खंडेलवाल | तस्वीर साभार : नावेल शिक्षण संस्थान के फेसबुक पेज से

गोपाल की श‍िक्षा की बदौलत बहुत-से छात्रों का अच्‍छी स्‍कूलों में भी दाख‍िला हो गया. जिन बच्‍चों के माता-पिता फीस नहीं भर पाते, उनके लिए गोपाल सोशल मीडिया की मदद से पैसे जुटाते हैं.

गोपाल खंडेलवाल की कहानी टीवी शो ‘इंडियाज बेस्ट ड्रामेबाज 2018’ में भी दिखाई गई. इसी शो के प्रोडक्शन हाउस ने गोपाल को उपहार में इलेक्‍ट्र‍िक व्‍हीलचेयर दी.

गोपाल कहते हैं, ‘मैंने अभी तक यही सीख ली है कि जिंदगी में कभी हार नहीं माननी चाहिए.’ वह कहते हैं कि समाज से जातिवाद, अमीरी-गरीबी इन सब के भेद को शिक्षा के जरिए ही खत्म किया जा सकता है.

आप भी कर सकते है मदद

गोपाल खंडेलवाल से संपर्क करने के लिए 8090498162 पर डायल करें या फिर gurukulgopalsirji1969@gmail,com पर ईमेल करें। उनकी इस पहल में किसी भी तरह की आर्थिक मदद करने के लिए यहाँ क्लिक करें

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