हर इंजीनियर का सपना होता है कि उसे गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल जैसी कंपनियों में काम करने का मौका मिले, मौका मिल जाए तो कोई इसे छोड़ने का सपने में भी नहीं सोच सकता है। लेकिन नगा कटारू की कहानी सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। दरअसल ये एक ऐसे भारतीय इंजीनियर है जिन्होंने गूगल में नौकरी पाई और फिर कुछ ही समय बाद इसे अपनी मर्जी से इसे छोड़ भी दिया।

ऐसा नहीं है कि उन्हें इससे भी बेहतर कहीं नौकरी मिल गई थी, बल्कि उन्होंने नौकरी इसलिए छोड़ी क्योंकि वो खेती करना चाहते थे। नागा कटारू आंध्रप्रदेश के कृष्णा जिले के गंपालागुडम गांव के रहने वाले हैं और उस समय गांव में संसाधनों की कमी की वजह से बहुत कम बच्चे ही अपनी पढ़ाई पूरी कर पाते थे। उनके पिता गांव के स्कूल के ही प्रिंसिपल थे। इसलिए उनकी स्कूली पढ़ाई पूरी हुई, कॉलेज भी गए।  आईआईटी में दाखिला लिया।

कटारू कहते हैं ‘मैंने सालों तक अपने दिमाग के एक हिस्से का इस्तेमाल किया था। अब मैं दूसरे हिस्से का भी इस्तेमाल करना चाहता था।’

आज उनकी गिनती अमेरिका के बड़े किसानों में होती है। नागा आज खेती से हर साल 18 करोड़ का टर्नओवर करते हैं। नागा अमेरिका में कैलीफोर्निया में बादाम व खुबानी की खेती करते हैं।

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बहुत सारे इंजीनियर अमेरिका में काम करके भारत लौटने की सोचते है लेकिन कटारु ने वही पर रहकर खेती करने का निर्णय लिया । गूगल में मौटे पैकेज के सामने खेती को चुनना बहुत ही साहसिक निर्णय होता है क्योंकि खेतीबाड़ी में इतना पैसा कमाना आसान नहीं होता है । कटारु ने नौकरी में रहते हुए ही खेतीबाड़ी के बारे में रिसर्च करना शुरू कर दिया और विभिन्न फसलों की किस्मों एवं उनके उत्पादन के बारे में गहन अध्ययन करके जानकारी जुटाई। जब उन्हें लगा कि कैलिफोर्निया के मौसम के हिसाब से खुबानी एवं बादाम सबसे ज्यादा उपयुक्त है तो उन्होंने किराये पर खेत लेने का निश्चय किया । उन्होंने कैलिफोर्निया में ही 320 एकड़ का फार्म किराए पर लिया और बादाम और खुबानी की खेती करने लगे, उसके बाद उन्होंने वह जमीन खरीद ली। आज कटारु के खेत में पहले से ज्यादा सुविधाएं हैं।

कटारु खुद एक तकनीकी के अच्छे जानकर है,  यही कारण है कि उन्होंने अपने खेत में आधुनिकतम तकनीकों का प्रयोग करने के साथ ही ऑर्गेनिक उत्पाद पैदा करने पर जोर दिया । वर्तमान में फार्म का उत्पादन पहले से कहीं गुना ज्यादा हो गया है। साल 2015 और 2016 में उन्होंने इस फार्म से क्रमशः 17 व 18 करोड़ रुपए टर्नओवर किया। कटारू का सपना है कि वह भारत में भी इस तरह की एडवांस खेती करें ताकि खेती करने के तरीके में बदलाव हो सके।

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उन्होंने जब पहली बार गूगल अलर्ट का आइडिया दिया तो उनके सीनियर ने खारिज कर दिया लेकिन कटारू को अपने आप पर विश्वास था। वह आइडिया गूगल के संस्थापकों के पास लेकर गए। उन्हें यह बेहद पसंद आया और 2003 में ‘गूगल अलर्ट’ लांच किया। नगा कटारू ने गूगल में बतौर इंजीनियर आठ साल तक काम किया।  गूगल अलर्ट बेहद ही पसंदीदा सॉफ्टवेयर है, जो काफी उपयोगी है।

आठ साल तक नौकरी करने के बाद जब काम में मन नहीं लगा, तो उन्होंने गूगल को छोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा। डॉक्युमेंटरी, लघु फिल्म व ‘इम्प्रोव’ थिएटर करने लगे।  ‘इम्प्रोव’ थिएटर में प्लॉट, कैरेक्टर, डायलॉग आदि सब तत्काल तैयार करना पड़ते हैं। थिएटर व फिल्में करते-करते उन्हें गांव की याद आने लगी। उन्होंने कैलिफोर्निया में ही 320 एकड़ का फार्म खरीदा व खेती शुरू कर दी।  कटारू स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए भी कर चुके है।

वह कहते हैं, ‘सिलिकॉन वैली से खेत महज 150 किमी दूर हैं, पर वहां टेक्नोलॉजी पूरी तरह नहीं पहुंच सकी है। टेक्नोलॉजिस्ट होने के नाते मुझे लगता है कि मैं कुछ कर सकता हूं।

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