‘संघर्ष इतना ख़ामोशी से करो कि कामयाबी शोर मचा दे’

दिव्यांग पिता जो चलने में असमर्थ थे लेकिन बेटी को भरपेट खाना खिलाने के लिए खुद पशुओं को डालने वाली घास खाते थे. गांव में सुविधाओं के नाम पर टूटी-फूटी सड़क थी और सुबह 4:30 बजे नजदीकी शहर जाने वाली बस. प्रतियोगिता की तैयारी के लिए न भारत सरकार और न ही राज्य सरकार आगे आई लेकिन फ़ोन पर दिल्ली के एक कोच ने मदद की. प्रतियोगिता में भाग लेने गयी तो प्रवासी भारतीयों ने मदद को हाथ बढ़ाया. उनकी मदद और हौसले से यह एथलीट प्रतियोगिता में भाग लेती है और स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच देती है. संघर्ष और मजबूत इरादों का नाम है गोमथी मरीमुथु (Gomathi Marimuthu).

गोमथी ने क़तर के दोहा शहर में आयोजित एशियाई एथलेटिक चैंपियनशिप में 800 मीटर की प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता है. गोमथी ने 800 मीटर दौड़ने के लिए 2 मिनट 02.70 सेकेंड का वक्त लिया जो उन्हें स्वर्ण पदक दिलाने के लिए काफी था.

 


हालांकि, इस दौड़ की शुरुआत में किसी ने शायद ही सोचा था कि वो स्वर्ण पदक जीतेंगी. क्योंकि दौड़ के दौरान वो पीछे चल रही थीं, लेकिन अंतिम 150 मीटर वो ऐसे दौड़ीं कि उन्होंने अपने पुराने रिकॉर्ड को तोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया. तमिलनाडु से आने गोमथी के पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन इस जीत का सारा श्रेय वो उनकी कड़ी मेहनत को ही देती हैं.

गोमथी कहती है कि ‘जब मैं दौड़ती थी, तो पिता के पैरों में दिक्कत होने की वजह से वो चल नहीं पाते थे. लेकिन उनके पास एक TVS XL थी. उस वक्त शहर जाने के लिए बसों की सुविधा अच्छी नहीं थी. न गांव में बिजली थी और ना ही बढ़‍िया सड़कें थीं.’

4:30 बजे की बस पकड़ने के लिए 4 बजे उठना पड़ता था. यही वजह थी कि मेरे पिता रोज 4 बजे मुझे उठा देते थे. इतना ही नहीं, जब मां की तबीयत खराब रहती, तो वो ही मां बनकर मुझे दुध, पानी और खाना आदि दिया करते थे.

Gaumathi Marinuthu
प्रतिस्पर्धा में भाग लेती हुई गोमथी मारीमुथु

गरीब परिवार से आने के चलते हमारे पास खाने को ज्यादा नहीं होता था. वो मेरे लिए खाना अलग रख देते थे और खुद पशुओं का चारा खाते थे. मैं उनके संघर्षों को कभी नहीं भूल सकती. ‘अगर आज मेरे पिता आस-पास होते तो मैं उन्हें भगवान का दर्जा देती.’

एशियाई खेलो में जबरदस्त प्रदर्शन के बाद गोमथी की मदद के लिए केंद्र एवं राज्यों के खेल संघों के साथ ही कई सामाजिक संस्थाए भी उनकी मदद के लिए आगे आयी है. अभी चोट से जूझ रही गोमथी का लक्ष्य 2020 के टोक्यो ओलिंपिक में पदक जीतना है.

बी पॉजिटिव इंडिया, भारतीय एथलीट गोमथी को एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने पर बधाई देता है और उम्मीद करता है कि 2020 के टोक्यो ओलिंपिक में भी पदक जीतेंगी.

News Inputs : ESPN & The News Minute

Comments

comments