उत्तर प्रदेश में प्रतापगढ़ के अनिल प्रकाश मिश्र के बमुश्किल दो कमरों के मकान में क़ामयाबी की इतनी बड़ी इमारत खड़ी हो जाएगी, ऐसा शायद उन्होंने भी नहीं सोचा होगा. अनिल प्रकाश मिश्र प्रतापगढ़ ज़िले के लालगंज अझारा क़स्बे में रहते हैं और ग्रामीण बैंक में मैनेजर हैं. उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं. four IAS Officer from family

चारों ने क़ामयाबी की ऐसी मिसाल पेश की है कि न सिर्फ़ इलाक़े के बल्कि पूरे देश में उसकी चर्चा हो रही है. देश की कठिनतम परीक्षाओं में से एक मानी जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा में उनके चारों बच्चों ने सफलता हासिल की है.

बच्चों की सफलता से प्रसन्न अनिल प्रकाश मिश्र BBC से बातचीत के दौरान काफी भावुक हो जाते हैं और इसका श्रेय वो बेहद विनम्रता के साथ इनके अध्यापकों को देते हैं. उनकी सबसे बड़ी बेटी क्षमा मिश्रा का चयन इस बार आईपीएस के लिए हुआ है.

kshama and madhavi mishra
क्षमा मिश्रा और माधवी मिश्रा

क्षमा बताती हैं कि सबसे बड़ी होने के नाते उन्होंने अपने भाई बहनों का मार्गदर्शन भी किया और सभी साथ में रहकर इस परीक्षा के तैयारी में जुटे. दो साल के भीतर ही सभी ने सफलता हासिल करके दिखा दिया.

अनिल प्रकाश मिश्र के इन बच्चों ने क़स्बे के ही स्कूलों में पढ़ाई की और सफलता का परचम इन लोगों ने कोई पहली बार नहीं लहराया है बल्कि ऐसा वो बचपन से करते आए हैं.

सबसे छोटे बेटे लोकेश मिश्र ने आईआईटी से बीटेक किया और एक साल पहले ही उनका चयन यूपीपीसीएस में भी हुआ था. योगेश मिश्र भी इंजीनियर हैं और पिछले साल सिविल सेवा में चयनित हुए थे. वहीं बेटी माधवी मिश्रा मसूरी में ट्रेनिंग कर रही हैं और इससे पहले उनका चयन भारतीय राजस्व सेवा में चयन हुआ था.

IAS brothers
योगेश और लोकेश मिश्रा

अच्छे पद पर नौकरी करने के बावजूद अनिल प्रकाश मिश्र का घर आधुनिक सुख सुविधाओं से काफी दूर है. उनके इस दावे की पुष्टि के लिए किसी प्रमाण की ज़रूरत नहीं है बल्कि उनके घर को देखकर कोई भी इसका अनुमान सहज ही लगा सकता है.

यूपीएससी अफसर योगेश अब गरीब बच्चों की मदद करना चाहते हैं. उनकी प्लानिंग एक ऐसी संस्था शुरू करने की है, जहां पैसों की कमी की वजह से पिछड़ रहे बच्चों को एजुकेट किया जा सके.

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