कभी-कभी आप पूरी मेहनत करते है और आपको अवसर भी मिलते है अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर होता है । किस्मत के चलते आपको मिले मौको से भी हाथ धोना पड़ता है और आप टूट जाते हो लेकिन कुछ लोग होते है जो शुरुआती विफलताओं से नहीं घबराते है और सारी विपरीत परिस्थितियों में भी आप अपने पसन्दीदा क्षेत्र से जुड़े रहते है और आखिर में आपको पहचान भी आपके क्षेत्र में आपके द्वारा किये गए कार्यों से मिलती है , ऐसी ही कुछ कहानी है विवेक राजदान (Vivek Razdan) की ।

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जम्मू-कश्मीर से आकर टीम इंडिया में जगह बनाने वाले वे पहले क्रिकेटर बने थे। इस राइट आर्म मीडियम फास्ट बॉलर ने मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर (Sachin Tendulkar)  के साथ अपना वनडे डेब्यू किया था। लेकिन जहां सचिन दुनिया के महान क्रिकेटर्स में से एक बन गए, वहीं विवेक का करियर बदकिस्मती से तीन मैचों बाद ही खत्म हो गया।

भारतीय क्रिकेट टीम 1989 में पाकिस्तान टूर पर गई थी। इसी सीरीज के दौरान दूसरे वनडे में विवेक राजदान और सचिन तेंडुलकर ने डेब्यू मैच खेला था। डेब्यू के वक्त विवेक जहां 20 साल के थे, वहीं सचिन की उम्र केवल साढ़े 16 साल थी। पहले मैच में विवेक बुरी तरह फ्लॉप रहे थे। उन्हें ना तो कोई विकेट मिला था और रन भी उन्होंने केवल 1 बनाया था।

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इस मैच के बाद विवेक केवल दो मैच और ही खेल सके। तीन मैचों के बाद उनका वनडे करियर खत्म हो गया। करियर में उन्होंने कुल 23 रन बनाए और केवल 1 विकेट ही लिया। पाकिस्तान के खिलाफ इसी सीरीज के दौरान उन्होंने टेस्ट डेब्यू भी किया था। करियर का दूसरा टेस्ट मैच खेलते हुए उन्होंने सियालकोट में 5 विकेट झटके थे। हालांकि यही मैच उनके टेस्ट करियर का आखिरी मैच भी साबित हुआ।

इसके बाद उनका सिलेक्शन न्यूजीलैंड टूर के लिए हुआ तो लेकिन उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला। अपने टेस्ट करियर में उन्होंने दो मैच खेलकर 6 रन बनाने के अलावा कुल 5 विकेट लिए। विवेक ने अपने इंटरनेशनल करियर का आखिरी मैच दिसंबर 1990 में श्रीलंका के खिलाफ वनडे के रूप में खेला था।

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विवेक MRF पेस फाउंडेशन, चेन्नई से निकले टीम के चुनिंदा बॉलर्स में से एक हैं। पाकिस्तान टूर के लिए सिलेक्ट होने से पहले उन्होंने सिर्फ 2 फर्स्ट क्लास मैच खेले थे। एक दुलीप ट्रॉफी में और दूसरा ईरानी ट्रॉफी में। 1991-92 में वे रणजी ट्रॉफी जीतने वाली दिल्ली की टीम का हिस्सा थे और अपनी टीम को ट्रॉफी दिलाने में उन्होंने लीड रोल प्ले किया था।

उस साल उन्होंने जबरदस्त ऑलराउंडर परफॉर्मेंस दी थी। इस दौरान दो सेन्चुरी लगाने के साथ ही फाइनल में तमिलनाडु के खिलाफ 93 रन भी बनाए थे। इसके अलावा टूर्नामेंट में उन्होंने 23 विकेट भी झटके थे। हालांकि अगले दो रणजी सीजन के बाद ही उनका फर्स्ट क्लास करियर भी खत्म हो गया। इसके बाद वे दिल्ली टीम के कोच बने और फिर टीवी कमेंट्री करने लगे।

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इस तरह अपने क्रिकेट करियर में असफल होने के बाद भी विवेक ने क्रिकेट से अपना नाता नहीं छोड़ा और क्रिकेट कोचिंग के साथ ही दिल्ली रणजी टीम के साथ लम्बे समय तक जुड़े रहे । जब भारत में टीवी पर मैच दिखाए जाने लगे तो विवेक ने अपना हाथ हिंदी कमेंट्री में आजमाया और इस क्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखते हुए आज विवेक देश के जाने-माने हिंदी कॉमेंटेटर बन चुके है । अपनी कमेंट्री में अपने क्रिकेटिंग स्किल्स के साथ ही अपने बुद्धिमता पूर्ण किये गए कमैंट्स के कारण विवेक को दर्शकों से जबरदस्त प्यार मिला ।

25 अगस्त 1969 को दिल्ली में जन्मे विवेक राजदान ने अपनी कड़ी मेहनत और प्रतिभा के डैम पर इंडिया टीम में जगह बनाई और एक छोटे से क्रिकेट करियर में भी अपनी छाप छोड़ने में सफल रहे है । विवेक ने उन लोगों के लिए एक नजीर पेश की है जो अपने क्षेत्र में सफल नहीं हो पाते है और मेहनत करना छोड़ देते है । विवेक ने न केवल अपने क्षेत्र में सफलता के झंडे गाड़े बल्कि क्रिकेट से जुड़े रहकर उन्होंने अपने पहले प्यार (क्रिकेट) से कभी भी दूर नहीं रहे ।

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