देश में बेरोजगारी के कारण कई युवाओं को सरकारी नौकरी की तलाश में समय बर्बाद करना पड़ रहा है तथा बढ़ती प्रतिस्पर्धा के दौर में एक नौकरी पाना ही उनका अंतिम लक्ष्य बन गया है । भारतीय शिक्षा प्रणाली की खामी इन युवाओं को चुकानी पड़ रही है और नौकरी प्रधान शिक्षा में आज कल के युवा अन्य क्षेत्रों में जाने से कतराते है लेकिन गुडगाँव के 20 वर्षीय नौजवान ने न केवल अपनी नौकरी को ना कहा बल्कि आधुनिक खेतीबाड़ी सीखकर आज महीने के हज़ारों रुपये कमा रहा है । हम बात कर रहे है देश के नौजवान किसान विपिन यादव (Vipin Yadav)  की ।

गुडगाँव के पास ही सैदपुर के रहने वाले विपिन यादव ने अपने गांव से ही प्रारंभिक शिक्षा की पढाई की तथा आगे की पढाई के लिए गुडगाँव के एक कॉलेज में बीएससी कंप्यूटर साइंस के पाठ्यक्रम में दाखिला ले लिया । अपनी ग्रेजुएशन ख़त्म करने के बाद जब विपिन ने आईटी सेक्टर में जॉब के लिए आवेदन शुरू किया तो उसको बहुत ही कम पैसे की नौकरी मिल रही थी जिसमे गुडगाँव में रहने का सिर्फ खर्चा निकल सकता था ।

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विपिन के पोली हाउस की एक झलक

इस मुसीबत की घड़ी में विपिन के पास दो विकल्प थे, पहला – कम पैसे में भी आईटी सेक्टर में नौकरी करे और भविष्य में अच्छी आमदनी की उम्मीद करे और दूसरा विकल्प था कि दूसरे क्षेत्रों में भी छुपे हुए अवसरों को ढूढ़े। विपिन ने कम उम्र में भी बड़ा जोखिम लेते हुए आईटी सेक्टर की नौकरी को ठुकरा दिया और अन्य क्षेत्रों में कार्य करने के लिए रिसर्च करना शुरू कर दिया ।

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इसी बीच अपने एक मित्र की सहायता से उसकी मुलाकात कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से मुलाकात हुई और इसके बाद विपिन ने खेतीबाड़ी के क्षेत्र में ही काम करने का फैसला ले लिया । किसान परिवार से आने वाले विपिन को परम्परागत खेती के बारे में तो पूरी जानकारी थी ही लेकिन आधुनिक खेती के लिए विपिन  KVK (कृषि विज्ञान केंद्र)  पर अन्य खेतीबाड़ी की विधियों के बारे में भी सीखा । वहां पर ट्रेनिंग के दौरान उन्हें बिना मिट्टी के खेती करने का आईडिया मिला जिसे उन्होंने एक सफल बिज़नेस आईडिया बना दिया ।

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विपिन के पोली हाउस में लगे पौधे

विपिन ने शुरुआत में 800 स्क्वायर फ़ीट की जगह गुडगाँव में ही किराये पर ली और वहां पर पोली हाउस का निर्माण करवाया । अपने परिवार एवं दोस्तों की मदद से 35000 के शुरुआती निवेश से उन्होंने खेती-बाड़ी करना शुरू कर दिया और शहर के नजदीक होने के कारण उनको बहुत जल्द ही सफलता मिल गयी क्योंकि अच्छे उत्पादों की मांग हमेशा मार्केट में रहती है ।

एक साल पहले विपिन ने शुरुआत करके आज आधुनिक तकनीक से बिना मिट्टी के खेतीबाड़ी कर रहे है । वो इसमें कई प्रकार के सजावटी पौधे एवं फूलों के पौधों की खेती करते है जिससे उनको महीने के लगभग 40 हज़ार की आमदनी हो जाती है तथा अभी वो अपने खेतों के विस्तार पर काम कर रहे है ।

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विपिन ने Be Positive से खास बातचीत में बताया कि शुरुआत में खेतीबाड़ी को एक नौकरी के विकल्प के रूप में चुनना मुश्किल था लेकिन KVK (कृषि विज्ञान केंद्र) के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग से उन्होंने ये नया और मुश्किल रास्ता चुना और कड़ी मेहनत से एक वर्ष के अंदर ही मैने अच्छा-खासा मुनाफा कमाना शुरू कर दिया है ।

कम उम्र होने के कारण सभी लोग मुझे प्रोत्साहित करते है जिससे मेरा मनोबल बढ़ जाता है । अभी जगह किराये लेकर नया पोली हाउस लगाने की योजना पर काम कर रहे है तथा ऐसे पोली हाउस का निर्माण करना जिससे पुरे वर्ष फूलों की खेती हो पाए । अभी अप्रैल से लेकर जून तक उत्तर भारत में पड़ने वाली भयंकर गर्मी के कारण हमें भी अपना काम बंद करना पड़ता है जिससे हमारे मुनाफे में कमी आती है । व्यापार और मार्केट में डिमांड की कोई कमी नहीं है लोग पोली हाउस से ही पौधे एवं फूल ले जाते है ।

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पोली हाउस की झलक

विपिन ने अपनी खेती के सबसे बड़े रहस्य “बिना मिट्टी की खेती” के बारे में भी हमें बताया । उनके अनुसार खेती करने के लिए लोहे और लकड़ी के छोटे-छोटे हॉलनुमा खांचे बनाये जाते है जिनमे नारियल के बुरादे, वर्मीकुलिट और पेर्लाइट को एक निश्चित अनुपात ने मिलाकर मिट्टी की जगह उपयोग में लिया जाता है जिसमे सब्जियों , फूलों और पौधों के बीज डाल दिए जाते है । उचित समय पर पानी और खाद देने के बाद कुछ ही समय में उनके बीज एक पौधे के रूप में परिवर्तित हो जाते है । पोली हाउस का उपयोग करने से अन्य मौसमी बीमारिया और मिट्टी के अनुपयोग से कवक एवं बैक्टीरिया की दिकक्त नहीं आती है जिससे उन्हें बहुत ही कम नुकसान होता है ।

विपिन आगे बताते है कि जो भी युवा बेरोज़गार है वो एक बार अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र जरूर जाये क्योंकि वहाँ से आपको आपके क्षेत्र के अनुसार कोई न कोई रोजगार का आईडिया जरूर मिलेगा जिससे न केवल आप खुद कामयाब होंगे बल्कि लोगों को भी रोजगार प्रदान कर सकेंगे । इस तरह हम एक छोटी शुरुआत करके देश को बेरोज़गारी की समस्या से निजात दिला सकेंगे ।

विपिन अपने पोली हाउस के विस्तार के साथ ही अन्य किसानों को मुफ्त में प्रशिक्षण भी देते है जिससे उनके जीवन स्तर में भी सुधार आ सके । विपिन का कहना है कि आधुनिक तकनीक एवं पूरी जानकारी के अभाव में किसान कई गलत तरह की खेतीबाड़ी की विधिया काम में लेता है जिससे न केवल उनकी उपज में कमी आती है बल्कि खेत की मिट्टी भी बंजर हो जाती है ।

Be Positive विपिन यादव के जज्बे को सलाम करता है तथा मात्र 20 वर्ष की उम्र में अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर एक सफल किसान बनकर देश के युवाओ और खासकर किसान वर्ग के सामने एक मिसाल पेश की है ।

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