तमिलनाडु के सेलम जिले के दूरदराज के गांव से आने वाले इस युवा ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर अपने गांव को बदलने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल (SalemMango) बनाया है जो न केवल गांव वासियों को उनकी फसल का उचित दाम दिलवा रहा है बल्कि उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है । गांव के भोले-भाले किसानो को दलालों के चक्कर से बचाने के लिए इस युवा ने जॉब करने की जगह एक ऐसा रास्ता खोजने का फैसला किया जो कि उन्हें अपनी फसल का उचित दाम दिलाये तथा ग्राहकों को उच्च गुणवत्ता वाले प्रोडक्ट मुहैया करवा सके , इस दूरदर्शी युवा का नाम है – सतीश रामासामी (Sathis Ramasamy)

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तमिलनाडु के सेलम के आम भारत ही नहीं लेकिन विदेश में भी अपनी गुणवत्ता और स्वाद के लिए जाने जाते है । स्टील और टेक्सटाइल मार्केट में अपनी छाप छोड़ने के बाद सेलम को मैंगो सिटी (Mango City) के नाम से पहचाना जाता है । आम उत्पादन में विशिष्ट श्रेणी में आने वाले सेलम के किसानों की हालत भी भारत के अन्य किसानों जैसी ही है । उच्च लागत, रसायनो के प्रयोग एवं मौसम पर निर्भरता के बाद दलालों के चक्कर में पड़ने के लिए अलावा इन किसानों के पास कोई विकल्प नहीं है । इस स्थिति में सतीश और उनकी टीम ने टेक्नॉलजी के इस्तेमाल से जो प्लेटफार्म बनाया है वो इन किसानों के लिए वरदान से कम नहीं है ।

सतीश ने अपने दोस्तों दिनेश कुमार और संगीत कुमार से मिलकर एक ऑनलाइन पोर्टल SalemMango.com बनाया जो किसानों के खेत से उच्च गुणवत्ता वाले आर्गेनिक प्रोडक्ट्स आसपास के शहरों में उपलब्ध करवाते है । आर्गेनिक खेती बाड़ी को बढ़ावा देते हुए सतीश की कंपनी आम के साथ ही गुड़ , शुद्ध देशी गाय एवं भैंस का घी , हल्दी पाउडर , मूंगफली , दालें एवं निम्बू आदि खाने के पदार्थ आपको एक क्लिक पर उपलब्ध करवाते है । मिलावट के इस दौर में भी सतीश ने अपनी कंपनी में स्वाद एवं गुणवत्ता को सर्वोपरि रखा है । इसी के चलते आसपास के शहरों जैसे कोयम्बटूर , सेलम , बेंगलुरु , मदुरै तथा चेन्नई में उनके प्रोडक्ट्स की अच्छी मांग बनी हुई है ।

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इस मुकाम पर पहुंचने के लिए सतीश को कड़े संघर्ष से गुजरना पड़ा और अपने सफर में उन्हें पग-पग पर कड़ा इम्तेहान देना पड़ा लेकिन अपने जुझारू व्यक्तित्व और दोस्तों के साथ ने उन्हें कभी हार नहीं मानने दी । सतीश का जन्म तमिलनाडु के सेलम जिले के दूरदराज गांव मोट्टानडीपालयम में एक किसान परिवार में हुआ और आप उनके गांव के हालात के बारे में इसी से अंदाजा लगा सकते है कि आजादी के लगभग 70 वर्षों के बाद भी उनके गांव में कोई न्यूज़पेपर या टीवी कनेक्शन नहीं है । भारत जहाँ अभी 4G के बाद 5G के लिए टेस्टिंग कर रहा है लेकिन यहाँ इंटरनेट के नाम पर 2G सुविधा भी बमुश्किल उपलब्ध है ।

अपने गांव के ही सरकारी विद्यालय से पढाई करने वाले सतीश ने बड़ी चुन्नोतियों के बाद इंजीनियरिंग का कोर्स किया तथा इंजीनियरिंग के बाद उनकी एक आईटी कंपनी में जॉब लग गयी लेकिन 2008 और उसके बाद के मंदी के दौर में सतीश को भी अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। इस मुश्किल हालत में सतीश ने हार नहीं मानी और उसके बाद उन्होंने सरकारी क्षेत्र और बैंकिंग में जाने का फैसला किया लेकिन वहां पर भी उन्हें आशातीत सफलता नहीं मिली । लगभग एक साल के संघर्ष के बाद सतीश ने वापस अपने गांव लौटने का फैसला किया और खेतीबाड़ी में अपने पिता का हाथ बटाने लग गए ।

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शहर से लौटने के बाद सतीश ने खेतीबाड़ी के प्रोसेस को बदलने के लिए कोशिश करना शुरू कर दिया । जब उन्होंने कुछ समय खेतीबाड़ी करने में बिताया तो उन्हें पता चला कि किसानो के सामने दो महत्वपूर्ण समस्याए है , पहली – उच्च गुणवत्ता के प्रोडक्ट्स का उत्पादन नहीं होता है और दूसरी गांव या क़स्बे के स्थानीय व्यापरियों के द्वारा फसल का उचित मूल्य नहीं दिया जाता है ।

इन समस्याओं से जूझते सतीश ने जब अपने स्कूल में दोस्त रहे दिनेश कुमार से बात की तो वो भी इन समस्याओं के हल खोजने में लग गए । ऐसे ही कई दिनों तक उनकी बात चलती रही और एक दिन ऐसे ही बातचीत में उन्हें अपने खेतों में उगाये आम और अन्य पदार्थों को गांव से सीधे शहर में ऑनलाइन बेचने का आईडिया मिला । दिनेश जो कि बेंगलुरु में एक आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्यरत था और आईटी डोमेन के अनुभव से उन्हें ये पता था कि अगर उच्च गुणवत्ता के प्रोडक्ट्स ग्राहकों को दिया जाये तो उन्हें कोई सफल होने से कोई रोक नहीं सकता ।

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दिनेश और सतीश ने इसके बाद ऑनलाइन मार्केट और आम की उपलब्धता के बारे में रिसर्च किया और रिसर्च से पता चला कि आम सामान्यतया: एक फिक्स समय में ही आते है इसलिए ऑफ सीजन में हम अन्य आर्गेनिक प्रोडक्ट्स बेच सकते है । मार्केट रिसर्च के बाद मई 2016 में उन्होंने ऑनलाइन पोर्टल बनाने का काम शुरू कर दिया और नवंबर 2016 में आम की सीजन से पहले उन्होंने अपनी वेबसाइट लांच कर दी । वेबसाइट लांच होने के बाद धीरे-धीरे उनके पास ऑर्डर्स आना शुरू हो गया तथा इनका यह आईडिया चल निकला ।

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Salem Mango working system

सतीश ने संगीत कुमार (Sangeeth Kumar) और दिनेश कुमार(Dinesh Kumar) , पेशे से दोनों सॉफ्टवेयर इंजीनियर है तथा बहुराष्ट्रीय आईटी कंपनी में काम कर रहे है । सतीश जहाँ पैकेजिंग , ट्रांसपोर्टेशन तथा क्वालिटी पर ध्यान दे रहे है, वही संगीत और दिनेश कंपनी की मार्केटिंग के साथ ही उसके विस्तार की रणनीति पर काम कर रहे है । अपने अनुभव का भरपूर इस्तेमाल करते हुए संगीत और दिनेश ने आईटी क्षेत्र को एक बेसिक समस्या के हल करने में उपयोग किया ।

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सतीश के साथ संगीत और दिनेश के साथ उनका पूरा गांव जुड़ा हुआ है तथा फलों एवं खाने की सामग्री के उत्पादन के साथ ही उसकी पैकेजिंग , प्रोसेसिंग और ट्रांसपोर्ट का काम संभल रखा है । गांव के लोगों का भी अब जीवन स्तर बढ़ा है तथा उन्हें अपनी फसल का उचित दाम मिलना शुरू हो गया ।

सतीश ने शुरुआत में केवल आम बेचने का फैसला किया लेकिन अपने ग्राहकों की डिमांड के बाद उन्होंने अन्य खाद्य पदार्थ और फल भी बेचना शुरू कर दिया है । ऑनलाइन माध्यम के जरिये कई ग्राहक उनसे नेचुरल पदार्थों की मांग करते है जिसे पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है ।

सतीश बताते है कि उनका लक्ष्य अपने गांव के प्रोडक्ट्स को शहर में पहचान दिलानी है तथा एक ऐसा माध्यम बनाना है जिसमे शहर के लोगों को नेचुरल प्रोडक्ट्स के लिए सीधे किसानों से संपर्क करने का मंच मिले और वो अपने ऑनलाइन पोर्टल से इसी दुरी को मिटाने में लगे हुए है ।

शहर की दौड़ भरी ज़िन्दगी के कारण शहर के लोगों के पास अपने खाने की प्लेट में परोसी जा रही सामग्री के बारे में सोचने का वक्त नहीं रहता है और वो बिना सोचे -समझे बड़ी कंपनियों के मार्केटिंग जाल में उलझ कर रह जाते है । इसीलिए हम चाहते है कि उन्हें खेतों से सीधा उनके घर पर अनाज एवं अन्य मसाले मिले जो गुणवत्ता के साथ ही बिना केमिकल प्रोसेसिंग और प्राकृतिक स्वाद दे पाए ।

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शुरुआती दौर में कई समस्याओं का सामना करने के बाद सतीश ने अपने दोस्तों के मदद से एक ऑनलाइन पोर्टल बनाया जो किसानों को उनकी फसल का उचित दाम दिलवा रहा है , वही ग्राहकों को वाजिब दाम एवं उच्च गुणवत्ता के खाद्य पदार्थ दिलाने में मदद कर रहा है । अभी उनकी कंपनी को केवल एक साल का समय हुआ है लेकिन उन्होंने अपनी आक्रामक रणनीति के तहत सप्लाई चैन और मार्केटिंग पर फोकस करना शुरू कर दिया है ।

Be Positive सतीश और उनके दोस्तों के किसानों के जीवन स्तर को उठाने के प्रयास और जज्बे को सलाम करता है और उम्मीद करता है कि भारत के अन्य गांवों से भी उनके जैसे युवा किसानों की तकदीर बदलने के लिए काम करने ले लिए प्रेरित होंगे ।

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