भारत आज सूचना प्रौद्योगिकी का सिरमौर बना हुआ है, जिस देश को सपेरे एवं बाबाओं के देश के रूप में जाना जाता था । आज वही देश सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दुनिया का मार्गदर्शन कर रहा है । यह भारत के प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रोफेसर्स एवं भारतीय इंजीनियर की कड़ी मेहनत से संभव हो पाया है । कई लोगों ने अपनी व्यक्तिगत क्षमता तो कइयों ने नयी कम्पनीज खोल कर इस आंदोलन में योगदान दिया है ।

आज हम एक ऐसे युवा के बारे में बात कर रहे है जिन्होंने भारत में पिछले कुछ वर्षों में आयोजित लगभग सारे हैकथॉन ( एक तरह की कंप्यूटर प्रोग्रामिंग प्रतियोगिता जिसमे आपको रियल टाइम प्रोब्लेम्स पर आईटी उत्पाद या सोलूशंस बनाने होते है ) में अपना जलवा बिखेरा है । वो आज भारत के नंबर वन हैकर और प्रोग्रामर के रूप में जाने जाते है और उन्हें यह तमगा लगभग 14 हैकथॉन जीतने के बाद मिला । उस 27 वर्षीय प्रोग्रामर का नाम है रवि सुहाग (Ravi Suhag)

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रवि न केवल भारत सरकार अपितु अमेरिका के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय  हार्वर्ड यूनिवर्सिटी  के साथ भी काम कर रहे है । गौरव ने भारत सरकार के लिए आजीविका मिशन एवं नरेगा योजना के लिए रियल टाइम डैशबोर्ड डिज़ाइन करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया । जुलाई 2013 में गुरुग्राम में एक वेब डेवलपर के रूप में शुरुआती कार्यकाल के दौरान हैकॉथन में हैकिंग पर अपना पहला हाथ चलाने बाद से, रवि कोडिंग में खुद का नाम बना रहे हैं। हाल ही में, जब रवि को भारत के राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया।

रवि मुलत; हरियाणा के रहने वाले है और इनका जन्म 1990 में एक जाट किसान परिवार में हुआ । शुरआती पढाई अपने गांव से पूरी करने वाले गौरव, पढाई के साथ-साथ अपने पिताजी की खेतों में भी मदद किया करते थे । उन्होंने IIT की पढाई के लिए अंग्रेजी माध्यम से पढाई करना शुरू किया लेकिन अंग्रेजी में दिक्कतों के कारण उनकी पढाई में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

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रवि हमेशा से आईआईटी में पढ़ना चाहते थे लेकिन अंग्रेजी भाषा की कम जानकारी और सही समय पर उपयुक्त ट्रेनिंग न मिल पाने की वजह से वे वहां प्रवेश नहीं पा सके थे। इस बात का उन्हें हमेशा अफसोस रहता है। उनका मानना है कि छोटे शिक्षण संस्थानों में भी शिक्षा की बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए। पढाई में शुरू से ही तेज गौरव IIT में जाकर फिजिक्स की पढाई करना चाहते थे लेकिन उन्हें IIT की प्रवेश परीक्षा में सफलता नहीं मिली और उनका IIT में पढ़ना एक अधूरा सपना बन कर रह गया ।

IIT की प्रवेश परीक्षा में मिली विफलता के बाद भी गौरव ने अपना मनोबल नहीं गिरने दिया और गुरुग्राम ( तत्कालीन गुड़गांव ) के कामराह इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फोर्मेशन टैक्नोलॉजी में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन ब्रांच में प्रवेश ले लिया । यही पर उन्हें पहली बार कंप्यूटर पर काम करने का मौका मिला और उन्हें कंप्यूटर पर काम करने में मजा आने लगा ।

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रवि को बचपन से ही इलेक्ट्रॉनिक यंत्र और उत्पादों में काफी रूचि थी और एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया कि ” जब सातवीं कक्षा में पिता जी एक नए गैजेट के साथ घर आए, जो कि एफएम रेडियो और एक टेप रिकॉर्डर का संयोजन था, उसके बाद से मेरे अंदर इलेक्ट्रॉनिक्स में गहन रुचि उत्पन्न हो गई थी। मैंने उस यंत्र को पूरा तोड़ दिया। उसके टुकड़े यहां-वहां पड़े थे। मैं उसे वापस नहीं जोड़ नहीं सका। मैंने सोचा ‘मेरे पिताजी तो मुझे मार ही डालेंगे’। कुछ महीनों तक इस बारे में अध्ययन करने के बाद, मैंने इसे वापस जोड़ दिया। उस मशीन ने दोबारा काम करना शुरू कर दिया। उसके बाद रवि ने सभी तरह के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ प्रयोग करना शुरू कर दिया, जैसे ट्यूबलाइट्स, स्पीकर, रेडियो।”

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कॉलेज में पढाई के दौरान ही रवि बाहर की दुनिया में वास्तविक प्रतिस्पर्धा को समझते थे, वह जानते थे कि वह कॉलेज में अच्छे से अच्छे ग्रेड लाने की आवश्यकता होती है ताकि वह भीड़ से अलग दिखें। वह अपनी पढाई के साथ अपना खर्चा निकालने के लिए अन्य बच्चों एवं विद्यार्थियों को कंप्यूटर के साथ ही गणित जैसे विषयों में ट्यूशन देने का काम भी करने लगे ।

कॉलेज में अध्ययन के दौरान ही उन्होंने अपनी कंसल्टेशन फर्म “Inspiration Edge ” की नींव रखी जो सूचना प्रौद्योगिकी उत्पादों के निर्माण एवं मेंटेनेंस में अपनी सेवाए देना शुरू किया और कंपनी से होने वाली आय से वो ज्यादा से ज्यादा बचत कर रहे थे क्योंकि उनको उस वक्त नहीं मालूम था कि उनका भविष्य क्या होगा इसलिए उन्होंने कॉलेज लाइब्रेरी से कंप्यूटर डिजाइन और कोडिंग की पुस्तकों का अध्ययन भी शुरू कर दिया। वे जानते थे कि भविष्य में इसका कुछ तो उपयोग होगा।

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कॉलेज से निकलने के बाद रवि ने विभिन्न हैकथॉन में भाग लेना शुरू किया और 27 वर्षीय रवि ने पिछले चार वर्षों में 16 हैक कॉम्पटीशन में से 14 में जीत हासिल की है। वो हैकथॉन में भाग लेने के अलावा विभिन्न निजी कंपनियों में गेस्ट लेक्चर और प्रेजेंटेशन भी देते है और उन्होंने एक रीसर्च पेपर भी पब्लिश किया है ।

रवि ने एक इंटरव्यू में बताया कि ” हममें से ज्यादातर को कभी मौका नहीं मिलता है, हम एक बुरे कॉलेज में जाते हैं, बुरे कॉलेज में खराब शिक्षक होते हैं, वे आपको प्रोत्साहित नहीं करते। लोगों के लिए उस से बाहर आना मुश्किल है। सभी अच्छे संकाय आईआईटी में चले जाते हैं। जरूरत यह है कि छोटे महाविद्यालयों में बेहतर प्रोफेसर होने चाहिए, वहां छात्रों को अधिक ध्यान और प्रोत्साहन और एक्सपोजर की आवश्यकता होती है।”

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आज रवि किसी परिचय के मोहताज नहीं है क्योंकि उन्होंने अपनी लगन और प्रतिभा के दम पर काबिलियत साबित कर चुके थे । एक किसान परिवार में पैदा होने वाले रवि ने कभी नहीं सोचा था कि वो अपना करियर आईटी क्षेत्र में बनाएंगे । उन्होंने समय के साथ मौको को भुनाने में कोई कमी नहीं रखी और अपनी मेहनत के दम पर हर उस पड़ाव को पर किया जो उन्हें सफलता के शिखर पर पहुंचाने में उपयोगी सिद्ध हुआ ।

Be Positive रवि सुहाग के संघर्ष और मेहनत को सलाम करता है और उम्मीद करता है कि आप ऐसे ही भारत के नौजवानो को प्रेरित करते रहेंगे ।

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