कैंसर का नाम सुनते ही मरीज की जान चली जाती है और महंगे इलाज के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति डगमगा जाती हैं. समय पर पता चलने पर कैंसर रोगी का इलाज संभव हैं लेकिन अस्पतालों द्वारा कैंसर को लेकर माहौल बनाया जाता हैं, वो वाकई खतरनाक हैं.

अस्सी के दशक में मलेरिया और कुष्ठ रोग के बारे में भी यही कहा जाता हैं लेकिन अब इसे सामान्य बीमारी माना जाता हैं और सटीक इलाज उपलब्ध हैं. समय के साथ कई नए यंत्रो एवं उपकरणों का अविष्कार हुआ हैं जिन्होंने बिमारियों को हराने में मदद की. ऐसी ही खोज बेंगलुरु के डॉक्टर विशाल राव हैं जिन्होंने केवल पचास रुपये में गले के कैंसर के कारण गयी आवाज़ को वापस लाने वाला यंत्र बना दिया हैं.

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डॉ. विशाल राव | तस्वीर साभार : द बेटर इंडिया

कैंसर को लेकर सरकार तरह तरह के जागरुक अभियान चलाती है लेकिन लोगों में तम्बाकू की लत ऐसी है कि आए दिन कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं. सबसे ज्यादा मुंह के कैंसर के मरीज सामने आते हैं. डॉ. विशाल ने कैंसर के मरीजों के लिए ऐसा यंत्र बनाया है जो मुंह के कैंसर के मरीजों को खाने में और बोलने में मदद करेगा. ऐसे यंत्र को गले में लगाने की क्रिया को प्रोस्थेसी कहते हैं. कई अस्पतालों में इसकी कीमत 30-40 हजार होती है लेकिन डॉक्टर विशाल सिर्फ 50 रुपए में उसे लगा रहे हैं.

डॉ विशाल बताते हैं कि अभी बाजार में कई यंत्र उपलब्ध हैं लेकिन उनकी कीमत 30-40 हज़ार होती हैं और उन्हें हर छह महीने में बदलना पड़ता हैं. हमने पचास रुपये में सिलिकॉन से ऐसा यंत्र बनाया हैं जो बोलने में मदद करेगा. ‘ॐ’ नाम के इस यंत्र को कई मरीजों में इस्तेमाल कर चुके हैं और अब तक के परिणाम शानदार रहे हैं.

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‘ॐ’ उपकरण जिसके जरिये आवाज़ वापस लाइ जा रही हैं | तस्वीर साभार : द बेटर इंडिया

एक मरीज का इलाज़ करने के दौरान मुझे शशांक मिला और हमने महंगे उपकरण की जगह प्रोटोटाइप तैयार किया और इसके परिणाम काफी शानदार रहे. हमने मरीजों पर इस्तेमाल भी किया हैं और पेटेंट भी करवा चुके हैं.

डॉ. राव एक ओंकोलोजिस्ट है और बेंगलुरु में हेल्थ केयर ग्लोबल (HCG) कैंसर सेंटर में सिर और गले की बीमारियों के सर्जन है. अगर आप को ऐसे इलाज की जरूरत है तो आप डॉक्टर विशाल से मिल सकते हैं.

( मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित )

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