मरीजों की सेवा ही जिसके जीवन का एक मात्र लक्ष्य हो। सुबह से शाम तक अस्पताल की ओपीडी में वक्त गुजारना जिसकी फेहरिश्त में शामिल हो, जो अपने अक्खड़पन के लिए विख्यात हो, अस्पताल के अलावा और कहीं किसी से न मिलना जिसकी फेहरिश्त में शामिल हो, उसे भला कौन डिगा सकता है उनके आदर्शों से।

फिर वो सीएम हों या पीएम कोई फर्क नहीं पड़ता। ऐसे शख्स से सीएम योगी आदित्यनाथ के मिलने का प्रोग्राम बना दिया जिले के आला अफसरों ने। लेकिन अपने वसूलों के पक्के इस चिकित्सक ने साफ इंकार कर दिया। उसके बाद से जिला प्रशासन ही नहीं बल्कि समूची बीजेपी में हड़कंप मचा है।

जान कर आश्चर्य हो सकता है कि इस भौतिकवादी युग में भी एक ऐसा डॉक्टर है जिसके लिए पैसे का कोई महत्व नहीं। केंद्र सरकार की नौकरी से सेवानिवृत्ति के बाद भी निःशुल्क सेवा दे रहे हैं, बीएचयू अस्पताल को। बदले में पूरा वेतन तक नहीं लेते।

BHU के कार्डियोलॉजिस्ट सर्जन पद्मश्री टी. के. लहरी (Dr T K Lahiri) रिटायरमेंट के 14 साल बाद भी पेसेंट्स की सेवा कर रहे हैं। इनके सेवा भाव को देखकर लोग इन्हें महापुरुष और भगवान भी कहते हैं।

पद्मश्री डॉ. लहरी का जन्म कोलकाता में हुआ। अमेरिका से डॉक्टरी की पढ़ाई करने के बाद 1974 में बीएचयू में लेक्चरर के पद पर 250 रुपए महीने पर उनकी पोस्टिंग हुई। गरीबों की सेवा करने के लिए इन्होंने शादी नहीं की।

Dr T K Lahiri
Dr T K Lahiri : BHU के कार्डियोलॉजिस्ट सर्जन

इसके बाद 1997 से इन्होंने सैलरी लेना बंद कर दिया और अपनी सैलरी को जरूरतमंद मरीजों को डोनेट कर दिया। 1997 में उनकी सैलरी 84,000 थी। अन्य भत्तों को मिलाकर ये एक लाख के ऊपर थी।

इतना ही नहीं, 2003 में सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली पेंशन से सिर्फ अपने भोजन के लिए पैसा लेते है। शेष पैसा बीएचयू को दान दे देते है। उनकी इस कर्तव्यनिष्ठा को देखते हुए ही उनकी सेवा इमेरिटस प्रोफेसर के तौर पर अब तक ली जा रही है।

डॉ. लहरी (Dr T K Lahiri) ने बताया, रिटायरमेंट के बाद उन्हें अमेरिका के कई बड़े हॉस्पिटल से ऑफर था, लेकिन उनका मन यहीं लग गया था। रिटायरमेंट के बाद भी रेग्युलर सुबह 6 बजे वे बीएचयू जाते हैं और 3 घंटे ड्यूटी करने के बाद वापस आते हैं। शाम को भी इसी तरह ड्यूटी करते हैं। इसके बदले बीएचयू से केवल आवास के आलावा कोई सुविधा नहीं ली।

बीएचयू के डॉ. लखोटिया ने बताया, ऐसी शख्स‍ियत हमेशा हम सब के लिए आइडियल है। उनके जैसा एक्सपीरियंस सभी के काम में आता है। मरीजों के लिए वो लाइफ का एक-एक पल डोनेट करते हैं। वो मानते हैं कि कर्म ने उनको डॉक्टर इसीलिए बनाया कि हर जरूरतमंद मरीज की वो मदद कर पाएं।

केंद्र सरकार ने 26 जनवरी 2016 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर पद्मश्री से नवाजा। लेकिन जिस ख्वाब को संजोकर मदन मोहन मालवीय ने बीएचयू की स्थापना की , उस ख्वाब को टीके लहरी आज भी जिंदा रखे हैं, 2003 में बीएचयू के सर सुंदर लाल चिकित्सालय से सेवानिवृत्त होने के बाद भी अपनी सेवाएं दे रहे है।

75 साल की उम्र में भी Dr T K Lahiri वक्त के इतने पक्के हैं कि उनके आने-जाने के समय से लोग अपनी घड़ियों का समय मिलाते हैं। घर से पैदल ही अस्पताल तक जाते हैं। शरीर एक दम से हड्डियों के ढांचे में तब्दील हो चुका है। लेकिन मरीजों के लिए भगवान् से कम नहीं। 

1974 से 2018 तक वह बीएचयू अस्पताल से जुड़े हैं लेकिन कभी किसी विवाद में नहीं पड़े। जिसने भी देखा उन्हें धरती के भगवान के रूप में ही पूजा।

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