संकल्प की प्रतिमूर्ति हूँ मैं, मेहनत की परिभाषा हूँ मैं ।
त्याग और साहस का दूसरा नाम हूँ मैं, हां नारी हूँ मैं ॥

यह पंक्तियाँ उत्तराखंड की एक बेटी पर सटीक बैठती हैं. प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी जिसे सभी सुख-सुविधाए उपलब्ध थी. सामने लाखो की नौकरी थी लेकिन उन्होंने चुना भारतीय सेना को. देश में राजनेता जहाँ अपने बेटों को व्यवसाय या राजनीति में उतारते हैं लेकिन इस बेटी ने इस अवधारणा को तोड़ दिया. सामाजिक अवधारणाओं को तोड़कर मिसाल पेश करने वाली बेटी एवं भारतीय सेना में कैप्टन के रूप में काम कर रही हैं डॉ. श्रेयशी निशंक.

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारत सरकार में एचआरडी मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक की बेटी श्रेयशी निशंक ने सेना की मेडिकल कोर ज्वाइन की. उनकी तैनाती रुड़की के आर्मी अस्पताल में की गई है, जहां वो घायल सैनिकों का इलाज करेंगी.

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अपने पिता डॉ, रमेश पोखरियाल निशंक के साथ डॉ. श्रेयशी निशंक | तस्वीर साभार : ट्वीटर

वैसे तो अक्सर देखा जाता है कि नेताओं के परिजन, खासतौर से बेटे और बेटियां राजनीति में अपना भविष्य तलाशते हैं. शायद ही कोई दल हो, जहां किसी के परिजन, बेटा या बेटी राजनीति में न हों लेकिन श्रेयशी ने कुछ अलग कर दिखाया है.

पिछले दिनों लखनऊ में आयोजित सेना की पासिंग आउट परेड में श्रेयशी के समक्ष स्वयं डॉ. निशंक भी मौजूद रहे. दून के स्कॉलर्स होम सीनियर सेकेंडरी स्कूल से 12वीं के बाद श्रेयशी निशंक ने हिमालयन मेडिकल कॉलेज जौलीग्रांट से एमबीबीएस की पढ़ाई की है. श्रेयशी का पहले से ही सेना में जाकर देश सेवा करने का सपना था. इसलिए सेना के मेडिकल कोर को ज्वॉइन किया.

डॉ. रमेश पोखरियाल कहते हैं कि ‘उत्तराखण्ड वीर भूमि रही है, जहां हर परिवार से औसतन एक व्यक्ति सेना में भर्ती होकर देश की रक्षा करता है. मेरे लिए अत्यंत गौरवशाली विषय है क्योंकि मेरी बेटी श्रेयशी निशंक ने विधिवत सेना में आर्मी मेडिकल सर्विसेज के एमओबीसी-224 कोर्स को सफलता पूर्वक पूरा कर लिया है. 

खुशी है कि मेरी बेटी ने उत्तराखण्ड की उच्च परंपरा को जीवित रखने में योगदान दिया है. मैं प्रदेश और देश की सभी बेटियों को आह्वान करना चाहता हूं कि उन्हें सेना को बतौर कैरियर चुनकर उत्तराखण्ड और देश को गौरवान्वित करना चाहिए.

श्रेयषी की बड़ी बहन एवं विश्व विख्यात नृत्यांगना अरुषि निशंक कहती हैं कि उत्तराखंड में पहले से ही युवाओं में सेना के प्रति उत्साह रहा है. यहां ‘हर घर फौजी’ की कहावत को उनकी छोटी बहन श्रेयशी ने भी चरितार्थ किया है. पूरे परिवार को श्रेयशी पर गर्व है.

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अपने पिता डॉ, रमेश पोखरियाल निशंक के साथ डॉ. श्रेयशी निशंक | तस्वीर साभार : ट्वीटर

आपको बता दे कि उत्तराखंड में भारतीय सेना में जाने की एक परंपरा हैं. यहां के एक प्रमुख इलाके गढ़वाल के नाम पर एक सैन्य दल ‘गढ़वाल रेजीमेंट‘ भी है. इस समय देश की रक्षा एजेंसियों में कई टॉप पदों पर उत्तराखंड के लोग नियुक्त हैं. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, सेना प्रमुख बिपिन रावत, रॉ प्रमुख अनिल धस्माना, डीजीएमओ राजेंद्र सिंह, कोस्ट गार्ड प्रमुख अनिल भट्ट उत्तराखंड के ही हैं. यहां के एक पूर्व मुख्यमंत्री बी.सी. खंडूरी भी थल सेनाध्यक्ष रह चुके हैं.

कारगिल युद्ध में उत्तराखंड के सर्वाधिक रणबांकुरों ने दुश्मन को देश की सरहद से बाहर खदेड़ते हुए अपने प्राणों को न्यौछावर किया. राज्य के 75 रणबांकुरें कारगिल युद्ध में शहीद हुए.दिल मांगे मोर‘ का नारा देने वाले परम वीर चक्र से सम्मानित कैप्टन विक्रम बत्तरा, कारगिल में परमवीर चक्र से सम्मानित रेजीमेंट के दूसरे सैनिक संजय कुमार उत्तराखंड के ही गौरव हैं

बी पॉजिटिव इंडिया, डॉ. श्रेयशी निशंक की सफलता एवं सेना में जाने के निर्णय की प्रशंसा करता हैं और भविष्य के लिए शुभकामनाए देता हैं.

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