दिव्यांग शब्द सुनते ही लोग हीन भावना का शिकार हो जाते है। दिव्यांग को दया का पात्र समझते है लेकिन कई ऐसी कहानियां है जहाँ पर दिव्यांग जनों ने इतिहास रच दिए। देश की सबसे कठिन परीक्षा IAS से लेकर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में दिव्यांग देश निर्माण में अपना योगदान दे रहे है।

दो दिव्यांगजन जो बोल एवं सुन नहीं पाते है लेकिन उनके दिल के तार जुड़े हुए है। उन्होंने एक साथ रहने का निर्णय किया तो दोनों ने परिवारों ने मिलकर इस शादी के लिए रज़ामन्दी दी है और समाज के सामने एक उदाहरण पेश किया है।

गायत्री तीर्थ शांतिकुंज की संस्कारशाला में दो दिव्यांग जनों ने पवित्र अग्नि की साक्षी में एक दूसरे के गले में वरमाला डालकर सात फेरे लिये। समाज के सामने एक नज़ीर पेश की और इन्होने बता दिया कि वो विशेषजन है और किसी से कम नहीं है।

दुल्हन सुनीता छत्तीसगढ़ से आती है और जन्म से ही दिव्यांग हैं। सुनीता बोल व सुन नहीं पाती। वे बधिरों के लिए चलाये जाने वाले स्पीकिंग हेण्ड्स नेशनल इंस्टीट्यूट, पंजाब से एमसीए, बीएड व एनटीटी की पढ़ाई कर चुकी है। इस समय सुनीता छत्तीसगढ़ सरकार के शिक्षा विभाग में सेवारत हैं।

इसी तरह ग्राम हरियाणा के पानीपत जिले के धनसौली गांव के दूल्हे यशपाल भी जन्म से दिव्यांग हैं। वे भी सुन व बोल नहीं पाते। यशपाल भी उच्च प्रशिक्षित हैं और हिमाचल प्रदेश में एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत हैं।

yashpal and sunita
यशपाल और सुनीता शादी के दौरान

उनके विवाह में दोनों पक्षों से करीबी रिश्तेदार और गायत्री परिवार के सदस्य सम्मिलित हुए। वहां मौजूद सब लोगो ने इस शादी को अनुपम बताते हुए दूल्हे और दुल्हन को नवजीवन की शुभकामनाए दी।

शांतिकुंज व्यवस्थापक पं. शिवप्रसाद मिश्र व श्री बालरूप शर्मा ने वैवाहिक संस्कार के वैदिक कर्मकांड सम्पन्न कराया। पं मिश्र ने कहा कि विवाह दो आत्माओं का पवित्र बन्धन है। दो प्राणी अपने अलग-अलग अस्तित्वों को समाप्त कर एक सम्मिलित इकाई का निर्माण करते हैं। स्त्री और पुरुष दोनों में परमात्मा ने कुछ विशेषताएँ और कुछ अपूर्णताए दी हैं। विवाह सम्मलेन से एक-दूसरे की अपूर्णताओं की अपनी विशेषताओं से पूर्ण करते हैं, इससे समग्र व्यक्तित्व का निर्माण होता है।

बी पॉजिटिव इंडिया इस सकारात्मक पहल की सराहना करता है और उम्मीद करता है कि आप से प्रेरणा लेकर दिव्यांगजनों के जीवन में भी बदलाव आएंगे।

( ये स्टोरी बी पॉजिटिव इंडिया के साथी सुमित बृजवासी ने की )

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