एक संकल्प हूँ तो एक जीत भी, एक संघर्ष हूँ तो एक मंजिल भी !

यह पंक्तियाँ बिहार की एक समाजसेविका पर सटीक बैठती हैं. शिक्षा के जरिये गरीब एवं पिछड़े वर्ग के बच्चों के संघर्ष और सफलता में सहभागी बन रही हैं. रिश्तेदारों के दबाव के कारण अपनी शादी के खिलाफ लड़ी तो खुद में एक आत्मविश्वास आया. बाल-विवाह और दहेज़ के खिलाफ आवाज़ उठाई.

गाँधी फ़ेलोशिप और सामाजिक संस्थानों के साथ काम करते हुए देश की समस्याओं को करीब से जाना और उनके हल भी ढूंढे. बच्चों को मुफ्त में पढ़ाने के लिए उनके माता-पिता से कई बार बात की. सरकारी विद्यालय के बच्चों से शुरू हुआ सफर अब दो सेंटर्स का रूप ले चूका हैं. शिक्षा के जरिये गरीब एवं पिछड़े वर्ग के बच्चों को सक्षम बना रही हैं दिव्या सिंह(Divya Singh).

बिहार के सीतामढ़ी और पटना में काम करने वाले संगठन ‘नव्या (NAVYA – Nation Advancement Vision by Youth Alliance)‘ की संस्थापक दिव्या सिंह गरीब बच्चों को मुफ्त में ट्यूशन पढ़ा रही हैं. सरकारी विद्यालय के बच्चों को स्कूल से जोड़ते हुए शिक्षा में उनकी रूचि बढ़ा रही हैं. पटना एवं सीतामढ़ी में लगभग 100 के आसपास विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान कर रही हैं. वो न केवल बच्चो के ड्राप-आउट रेट कम कर रही हैं बल्कि लड़कियों के माता-पिता को समझा बुझा कर बाल-विवाह रोक रही हैं.

with kids in school
बच्चों के साथ दिव्या सिंह

बी पॉजिटिव इंडिया से बातचीत के दौरान दिव्या सिंह बताती हैं कि बिहार के पटना शहर में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्म हुआ. पिताजी पेशे से अध्यापक हैं जबकि माँ गृहणी. माता-पिता ने शुरू से ही शिक्षा के लिए प्रेरित किया. लेकिन जब 17 वर्ष की उम्र में रिश्तेदारों के दबाव के कारण मेरी शादी की बात चली तो मैंने मना कर दिया. पिताजी ने मेरा हमेशा से ही सपोर्ट किया और इस फैसले में भी उनकी रज़ामंदी रही. इस तरह मेरी शादी तो टल गयी लेकिन इस घटना ने मुझे अंदर से झकझोर दिया.

मैं हमेशा से ही मेरे आसपास बाल-विवाह और दहेज़ प्रथा को देखती रही हूँ लेकिन बिहार के गाँवो एवं कस्बों में यह एक सामान्य प्रक्रिया मानी जाती हैं. इसके बाद मुझे गाँधी फ़ेलोशिप के जरिये सामाजिक कार्य करने का मौका मिला. गुजरात के सूरत जिले में मांडवी के आसपास के गांवों में ग्रामीण महिलाओं के साथ काम किया. दो वर्ष तक बाल विवाह, दहेज़ प्रथा, अशिक्षा एवं माहवारी जैसे मुद्दों को करीब से जानने और समझने का मौका मिला.

divya singh with kids
बच्चों के साथ दिव्या सिंह

पोलिटिकल लीडर से बातचीत से लेकर कम्युनिटी सेण्टर पर बच्चों पर पढाने तक काम किया. इस फ़ेलोशिप ने मुझे अपनी क्षमताए पहचान का मौका मिला और साथ ही सामाजिक समस्याओं का जमीनी स्तर पता चला. सूरत के अमलसाडी ब्लॉक में जन शिक्षण संस्थान के औरतों से बात करके उनको ज्वेलरी निर्माण की ट्रेनिंग के जरिये उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का काम किया.

गाँधी फ़ेलोशिप के बाद मैं वापस बिहार लौट आयी और पीरामल फाउंडेशन से जुड़ गयी. मुझे सीतामढ़ी जिले का काम सौंपा गया. सीतामढ़ी आने के बाद मुझे मह्सूस हुआ कि जो मेरे साथ घटित होने वाला था, वो यहाँ की हर लड़की की कहानी हैं. बचपन में शादी, घर का काम और दहेज़ उत्पीड़न सामान्य बात थी. शिक्षा के प्रति लोगो का जुड़ाव न के बराबर था.

मैंने शिक्षा क्षेत्र में ही काम करने का फैसला किया. शुरुआत में लोगो ने अपने बच्चों को स्कूल भेजने से मना कर दिया. कई सप्ताह के संघर्ष के बाद कुछ पेरेंट्स अपने बच्चे को स्कूल भेजने को राज़ी हुए. 6 बच्चो के साथ सितम्बर 2018 में मैंने प्रशासन की मदद से राजकीय विद्यालय भवन में ही ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया.

Divya SIngh Navya NGO Patna school
बच्चों के साथ दिव्या सिंह

गांव के लोगो के साथ ही सरकारी विद्यालय के अध्यापक भी बच्चों एवं उनके माता-पिता को भड़काते थे लेकिन हर दिन मैंने एक नयी शुरुआत करते हुए बच्चों को पढाने का काम किया. लोग मेरे काम का मज़ाक उड़ाते थे लेकिन बच्चे मेरे पढ़ाने के तरीके से बहुत खुश थे.

पढ़ाई के साथ ही आर्ट एंड क्राफ्ट, संगीत एवं गायन को शिक्षा से जोड़ने का काम किया. इस तरह बच्चों ने जब अपने घर पर पढ़ाई के बारे में बताया तो और बच्चे जुड़ने लगे और आज 92 बच्चे सीतामढ़ी में पढ़ रहे हैं और पटना में भी एक नया सेण्टर शुरू कर दिया गया.

दिव्या सिंह ने बच्चों को पढ़ाने के साथ ही बाल विवाह के विरोध में भी अपनी आवाज़ बुलंद की. कई लड़कियों के बाल विवाह रुकवा कर उन्हें आगे पढने के लिए प्रेरित किया. इसके साथ ही लड़कियों में सुरक्षा, मासिक धर्म के प्रति जागरूकता का काम भी किया.

Awards to Divya Singh
दिव्या सिंह एवं नव्या टीम को कई मंचों से सम्मानित किया गया

दिव्या सिंह के काम को सोशल मीडिया के साथ ही कई मंचों ने सराहा हैं. सीतामढ़ी के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने उनके सेण्टर का दौरा किया और उनके काम की तारीफ की. हाल ही में उन्हें ऑल इंडिया एनजीओ एसोसिएशन ने सम्मानित किया हैं.

दिव्या सिंह अपने काम को पटना से बाहर निकालकर पुरे देश में फैलाना चाहती हैं. लड़कियों एवम महिलाओं के अधिकारों पर काम करके उन्हें सक्षम एवं आत्मनिर्भर बनाना उनका लक्ष्य हैं.

अगर आप भी दिव्या सिंह या ‘नव्या‘ से जुड़ना चाहते हैं तो यहाँ क्लिक करे !

बी पॉजिटिव इंडिया, दिव्या सिंह और ‘नव्या‘ टीम के कार्यों की सराहना करता हैं और भविष्य के लिए शुभकामनाए देता हैं.

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