शुरुआत के छोटे-छोटे कदम ही सफलता की नींव रखते हैं.

यह पंक्तियाँ हैं नोएडा के एक शख्स की हैं जो महंगाई के दौर में केवल पांच रुपये में भरपेट खाना खिलाता हैं. इनके लिए उम्र सिर्फ एक नंबर हैं और लोगो की सेवा का जज्बा ऐसा की खाने के साथ दवाइयां, कपड़े और पर्यावरण सरंक्षण के लिए वृक्षारोपण का काम भी कर रहे हैं. अपनी संस्था के जरिये मुफ्त में देने के बजाय कम पैसे में रोटी, कपड़ा और दवाई उपलब्ध करवा रहे हैं अनूप खन्ना (Anoop Khanna).

अनूप खन्ना की ‘दादी की रसोई (Dadi ki Rasoi)‘ नोएडा से निकलकर पुरे देश में चर्चा में हैं. अनूप खन्ना मानते हैं कि लोगो को मुफ्त में उनकी जरूरत की चीज़े देने से अच्छा है कि उन्हें कम पैसे में जरूरत की चीज़े उपलब्ध करवाने की कोशिश करनी चाहिए.

कम पैसे से वस्तुए मिलेगी तो गरीब भी स्वाभिमान से उन्हें खरीद पाएंगे. ऐसे ही सोच के साथ दादी की रसोई के माध्यम से दिल्ली एनसीआर के नोएडा शहर में पांच रुपये में खाना मिलता है.

दादी की रसोई’ नोएडा के सेक्टर 29 स्थित गंगा शॉपिंग काम्पलेक्स में चलाया जा रहा है. रोजाना लगभग 500 से भी ज्यादा लोग ‘दादी की रसोई’ में भोजन करते हैं. ‘दादी की रसोई‘ का मेन्यु रोजाना बदलता है. यहां ताजी व हरी सब्जियों का ही इस्तेमाल होता है. चावल भी बासमती का होता है. साथ ही साफ-सफाई के साथ गुणवत्ता का भी पूरा ध्यान रखा जाता है.

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दादी की रसोई पर लज़ीज़ खाने का आनंद उठाते हुए लोग

बी पॉजिटिव इंडिया से बातचीत के दौरान अनूप खन्ना बताते हैं कि मैं 1984 से नोएडा में रह रहा हूँ. पेशे से एक बिज़नेसमैन हूँ और मेरी नोएडा में दो फार्मेसी (मेडिकल) की दुकानें हैं. समाजसेवा का चस्का पिछले कई वर्षों से लगा हुआ हैं और खेलकूद और सामाजिक कार्यों से हमेशा से ही लगाव रहा हैं.

माँ की प्रेरणा से शुरू हुई ‘दादी की रसोई’, पिता है प्रेरणास्श्रोत

मेरे पिताजी ने देश के स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गाँधी जी के साथ काम किया था. उन्ही से मुझे सामाजिक कार्यों के लिए प्रेरणा मिली और जब से नोएडा में आया हूँ, तब से सामाजिक कार्यों में लगा हुआ हूँ. मैं पिछले 25 वर्षों से अपने व्यापार के साथ लोगो की सेवा में लगा हुआ हूँ.

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दादी की रसोई के साथ जुड़े हुए है कई लोग

अनूप खन्ना ने बताया कि उन्होंने इसकी शुरुआत अपनी माँ की इच्छा से की है. उनके मुताबिक, उनकी माँ सरोजनी खन्ना ने उनसे कहा कि अब वह सिर्फ खिचड़ी खाती हैं. जिस वजह से उनके ऊपर होने वाला खर्च काफी कम है, इसलिए बचे पैसे से गरीबों को खाना खिलाओ.

रोटी, कपड़ा और दवाई को सुलभ बना रहे है अनूप खन्ना

मेरी नजर में लोगो के लिए मूल जरूरत हैं : रोटी, कपड़ा और दवाई. मेरा सपना हैं कि देश का गरीब से गरीब आदमी के पास भी स्वाभिमान के साथ इन चीज़ों को खरीदने की क्षमता हैं. इसके दो आसान तरीके हैं या तो लोगो की आय बढ़ा दो या लोगो को मुलभुत चीज़े बहुत कम दाम में उपलब्ध करवा दो. मैंने दूसरा रास्ता चुना.

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कम दाम में कपड़े उपलब्ध करवाते है अनूप खन्ना

इसी क्रम में मैंने 21 अगस्त 2015 को ‘दादी की रसोई‘ नाम से पांच रुपये में भरपेट खाना उपलब्ध करवाना शुरू किया. यह खाना हम शुद्ध देसी घी में बनाते हैं और रोज़ लगभग 500 लोग केवल पांच रुपये में स्वादिष्ट खाने का आनंद उठाते हैं.

इसके साथ ही रोज़ाना मेनू भी चेंज होता हैं जिसमे दाल, चावल, राजमा, फल और अलग-अलग तरह की सब्जियां शामिल हैं. इसी के साथ शुद्ध पानी में भोजन का निर्माण होता है. खाने के प्लेट में चावल खिचड़ी के साथ ही गुलाब जामुन, अचार एवं पापड़ दिया जाता है.

दादी की रसोई पर एक ऑटो रिक्शावाले से लेकर प्राइवेट जॉब करने वाले लोग खाना खाते हैं. अभी हम नोएडा में दो स्टॉल चला रहे हैं और यह नोएडा का कम दाम में खाने उपलब्ध करवाने का पहला निजी प्रयास हैं. आसपास सफाई का पूरा ख्याल रखा जाता है. कागज़ से बनी प्लेट में खाना परोसा जाता है और डस्टबिन में ही कचरा डालने के लिए कहा जाता है.

हम मुफ्त में भी खाना दे सकते थे लेकिन गरीब एवं भिखारियों के स्वाभिमान को बनाये रखने के लिए पांच रुपये चार्ज करते हैं. क्योंकि लोगों को अगर मुफ्त में कोई चीज़ मिलती हैं तो उसकी क़द्र नहीं करते हैं.

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अनूप खन्ना की अनुपम पहल है ‘दादी की रसोई’

दादी की रसोई के साथ ही हमने ‘सद्भावना स्टोर‘ के नाम से एक प्रयास शुरू किया हैं जिसमें 10 रुपये में गरीब लोगो को कपड़े मिलते हैं. इस स्टोर के माध्यम से हम लोगो को उनके पुराने कपड़े, जूते, किताबे और अन्य सामान दान करने के लिए प्रेरित करते हैं. इसके बाद इन कपड़ों की रिपयेरिंग और धुलाई के बाद स्टोर पर अन्य लोगो के लिए रख देते हैं. हम शेरवानी एवं शादी के जोड़े किराये पर भी देते हैं जिससे कि गरीब लोगो को कपड़ों पर ज्यादा खर्च न करना पड़े.

इसके बाद सस्ती दवाइयां उपलब्ध करवाने के लिए ‘प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र‘ भी शुरू किया हैं. इस केंद्र पर कम मूल्य में जेनेरिक दवाइयां मिलती हैं जिनकी क़ीमत ओपन मार्केट में हज़ारों रुपये होती हैं.

प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के खिलाफ कर चुके है आंदोलन

इसके अलावा भी अनूप खन्ना District Student Guardian एसोसिएशन नाम की संस्था से जुड़े हुए हैं जो कि प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के खिलाफ विद्यार्थियों और उनके माता-पिता के हितो की रक्षा के लिए काम करता हैं. अनूप खन्ना , नॉएडा चैप्टर के सचिव हैं और प्राइवेट स्कूलों की मनमाफिक फीस वृद्धि के खिलाफ आंदोलन कर चुके हैं. उन्होंने धरना-प्रदर्शन से लेकर लीगल केस तक फाइल किया हैं. इसके बाद यह आंदोलन पुरे देश में फैला जिसके चलते हाई कोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों की फीस वृद्धि के लिए नियमानुसार काम करने का आदेश दिया.

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सोशल मीडिया पर खासी चर्चित है दादी की रसोई, टेक्निकल गुरूजी के साथ अनूप खन्ना

अनूप खन्ना पिछले 25 वर्षों से समाज सेवा के काम में सक्रिय हैं. उन्होंने केदारनाथ 2013 में आयी भयानक त्रासदी के साथ ही बिहार में बाढ़ के समय आपदा राहत और प्रबंधन में उल्लेखनीय कार्य किया. वो खुद बिहार के बनबांकी और पूर्णिया जिले में राहत सामग्री के ट्रक के साथ पहुंचे.

पर्यावरण सरंक्षण के साथ ही वोटिंग के लिए दे रहे है सन्देश

इसके साथ ही अनूप खन्ना पर्यावरण सरंक्षण के क्षेत्र में भी काम कर रहे हैं. पॉलीथिन बैग के इस्तेमाल को रोकने के लिए न केवल जागरूकता अभियान चलाया बल्कि जनता में पेपर और कपड़े के बैग वितरित किये. वृक्षारोपण के काम में भी उन्होंने शुरुआत की हैं और अपने स्टोर के सामने पेड़ लगाकर उन्हें बड़ा कर रहे है.

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अवार्ड समारोह के दौरान अनूप खन्ना

लोकसभा चुनाव के माहौल में वो वोटिंग के लिए भी काम कर रहे हैं. वोटिंग के लिए प्रेरित करने के लिए वो डिस्काउंट दे रहे हैं. कोई भी व्यक्ति अपने अंगुली पर लगी स्याही दिखाकर डिस्काउंट का लाभ उठा सकता हैं.

राष्ट्रपति भवन पहुंची ‘दादी की रसोई’ की कहानी 

नोएडा शहर में ‘दादी की रसोई’ चलाने वाले अनूप खन्ना की कहानी जब राष्ट्रपति भवन पहुंची तो उन्हें वहां से बुलावा आ गया. मकसद था कि उन जैसे और भी लोगों को साथ लेकर एक ऐसा खाका तैयार किया जाए ताकि देश में हर गरीब के लिए भोजन, दवाओं और कपड़ों का इंतजाम हो सके. उन्हें कई मंचो पर सम्मानित किया जा चूका हैं.

बी पॉजिटिव इंडिया, अनूप खन्ना और ‘दादी की रसोई‘ की पूरी टीम के कार्यो की सराहना करता हैं. हम उम्मीद करते हैं कि आप से प्रेरणा लेकर लोग सामाजिक कार्यों से जुड़ेंगे.

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