जब भी किसी सरकारी अफसर या मुलाजिम की बात होती है तो लाव-लश्कर और गाड़ियों का काफिला नजर आता हैं. वीवीआईपी कल्चर के कारण कई समस्याए आती हैं लेकिन समय-समय पर ऐसे कई उदहारण देखने को मिलते हैं जिससे सरकारी अफसरों की कार्यप्रणाली और संस्थान में विश्वास बढ़ जाता हैं. ऐसा ही कुछ देखने को मिला राजस्थान के अलवर शहर में.

राजस्थान हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस साधारण वेशभूषा में जिला कोर्ट पहुँच जाते हैं. कोर्ट रूम में बेंच पर बैठकर अदालती कार्यवाही सुनते हैं. बीच में जब जिला जज उन्हें पहचान लेते हैं और सम्मान के लिए खड़े होते हैं तो इशारों में ही उन्हें बिठा देते हैं. बार असोसिएशन से मिलते हैं और उनकी समस्यायों को हल करने के लिए तत्पर दिखाई देते हैं.

राजस्थान हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एस रविंद्र भट्ट ने रजिस्ट्रार जनरल सतीश कुमार शर्मापीपीएस राजेंद्र टुटेजा के साथ अलवर जिला मुख्यालय की अदालतों का सामान्य नागरिक बनकर आकस्मिक निरीक्षण किया. भट्ट ने इस दौरान पहचान जाहिर नहीं होने दी.

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, चीफ जस्टिस अपनी गाड़ी कचहरी से बाहर खड़ी कर बिना सुरक्षाकर्मी के अदालतों में पहुंचे. उनका यह निरीक्षण इतना गोपनीय था कि इसकी किसी भी न्यायिक अधिकारी को भनक तक नहीं लगी. चीफ जस्टिस रजिस्ट्रार जनरल के साथ आम नागरिकों की तरह जिला मुख्यालय पर अदालतों के बाहर घूमकर जायजा लेते रहे.

उन्होंने एसीडी कोर्ट, एडीजे कोर्ट व मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत की कार्यवाही बेंच पर बैठकर देखी. उन्होंने किसी को अपना परिचय नहीं दिया. सफेद शर्ट व काली पेंट पहने चीफ जस्टिस जिला एवं सेशन न्यायालय के कोर्ट रूम में आम आदमी की तरह जाकर बैठ गए. जैसे ही जिला जज मनोज कुमार व्यास की नजर उन पर पड़ी, तो वे उन्हें सम्मान देने के लिए खड़े हुए. चीफ जस्टिस ने कहा अपना काम करते रहिए.

बी पॉजिटिव इंडिया, चीफ जस्टिस एस रविंद्र भट्ट की सकारात्मक पहल का स्वागत करता हैं और उम्मीद करता हैं इन बदलावों से देश की न्यायपालिका में आमजन में विश्वास बढ़ेगा.

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