Captain Adya Prasad Dubey : कहते है कि अगर व्यक्ति सेना में चला जाता है तो कभी रिटायर नहीं होता है. आर्मी की मुश्किल ड्यूटी के बाद भी वो अपने वतन को आगे बढ़ाने के लिए लगा रहता है. अपने क्षेत्र में बढ़ती बेरोज़गारी ने एक सेवानिवृत कप्तान के दिल को झकझोर दिया.

अपने गांव में ही प्राथमिक शाळा के खाली पड़े मैदान को ट्रेनिंग सेण्टर में तब्दील कर दिया. आज उनके सेण्टर से निकलकर 3500 से ज्यादा नौजवान भारतीय सेना, वायु सेना , जल सेना के साथ ही CRPF और राज्य पुलिस में अपनी सेवाए दे रहे है.

यह सब कुछ कर दिखाया है उत्तर प्रदेश के गोरखपुर क्षेत्र के मिठाबेल गांव के रहने वाले कैप्टन आद्या प्रसाद दुबे (Captain Adya Prasad Dubey) ने.

ढाई दशक से कैप्टन आद्या प्रसाद दुबे बेरोजगारों की फौज में से तीन हजार से ज्यादा लोगों को प्रशिक्षण देकर सेना, नेवी, एनडीए, एयरफोर्स के साथ यूपी सहित कई राज्यों के फोर्स में भर्ती करा चुके हैं. 45 से ज्यादा लड़कियां भी पूर्वांचल के इस द्रोणाचार्य की पाठशाला से निकल फोर्स जॉइन कर चुकी हैं.

सेना की पेंशन से गांव में खोला ट्रेनिंग सेण्टर . 

सेना से 1992 में रिटायर होने के बाद कैप्टन आद्या प्रसाद दुबे ने पूर्वांचल में बेरोजगारी को देखकर युवाओं को सेना में भर्ती कराने के लिए सैनिक करियर सेंटर साल 1996 में खोला. मुफ्त में सेना में भर्ती कराने के लिए खोले गए सेंटर में युवाओं की दिलचस्पी साल-दर-साल बढ़ती ही जा रही है.

कैप्टन आद्या ने सेना से मिलने वाली पेंशन से अपने पैतृक गांव चौरीचौरा के मिठाबेल ग्राम के प्राथमिक स्कूल के बंजर खेल मैदान में युवाओं को भर्ती के लिए प्रशिक्षण देना शुरू किया.

युवाओ को ट्रैनिग करते कैप्टन आद्या प्रसाद दुबे । चित्र साभार : नवभारत टाइम्स

शुरुआती दिनों में प्राइमरी पाठशााला के खेल मैदान में प्रशिक्षण देने के लिए बहुत मुश्किलें पैदा हुई . गांव वालों के विरोध के साथ ही युवाओ की बेरुखी का भी सामना करना पड़ा. लेकिन सेना में कार्यरत उनके पुराने सहयोगी ने इस नेक काम में हाथ बंटाने के लिए आगे आना का फैसला किया .

काम को मिली पहचान तो पड़ौसी राज्य के युवक भी आते है ट्रेनिंग के लिए . .

इस करियर सेण्टर को सफलता मिलने के बाद यूपी के कई जिलों के साथ बिहार और झारखंड से भी युवा प्रशिक्षण के लिए आ रहे हैं. गोरखपुर जिले के छोटे से गांव के आसपास किराए का मकान लेकर रह रहे हैं.

वह प्रशिक्षण के दौरान पसीना बहाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ते. कैप्टन (Captain Adya Prasad Dubey) के इस गुरुकुल में दो सौ से ज्यादा युवा प्रशिक्षण लेते हुए दिख जाते है.

सत्तर वर्ष की उम्र में भी फिट और हिट . .

तीन हजार से ज्यादा युवाओं के नाम, पते के साथ तैनाती स्थल और फोन नंबर रजिस्टर में दर्ज हैं. यहां से निकलकर देश की सैन्यशक्ति का हिस्सा बने युवा जब भी मौका पाते हैं तो फोन करके कैप्टन का आर्शीवाद लेने से नहीं चूकते.

सेना के सेवानिवृत्त कैप्टन आद्या प्रसाद दुबे (Captain Adya Prasad Dubey) अपने को सेवानिवृत्त कहलाना पसंद नहीं करते हैं .उनके अनुसार मानव जीवन जब तक है तब तक समाज की सेवा करके अपने आप को फिट रखना ही सफलता की कुंजी है. सत्तर बसंत देख चुके कैप्टन का का मकसद स्वस्थ युवाओं को अपने पैरों पर खड़ा करना है.

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