छतीसगढ़ की राजधानी रायपुर में साप्ताहिक छुट्टी यानी रविवार के दिन अगर किसी स्थान की नाली साफ़ करते या चौक चौराहे पर रंग रोगन करते कुछ युवा दिख जाएं तो समझिए के ये बंच ऑफ फूल्स (Bunch Of Fools) हैं.

छत्तीसगढ़ के रायपुर में एक संस्था हर रविवार शहर के लोगो को सफाई के प्रति जागरूक करती है. संस्था का नाम है बंच ऑफ़ फूल्स अर्थात मूर्खो की टोली, मुर्ख इसलिए क्योंकि शहर को समझदार लोगो ने गन्दा कर रखा हे.

पढ़े-लिखे और समझदार लोग फैलाते है गन्दगी इसलिए नाम रखा बंच ऑफ़ फूल्स ..

अगर परिवर्तन लाना है, तो कुछ लोगो को तो मुर्ख बनना ही होगा। इस संस्था में स्टूडेंट्स, सी. ए, इंजीनियर, डॉक्टर, बिज़नेसमेन एवं प्रोफेसर शामिल है.

bunch of fools on work
रायपुर शहर की दीवारों का सौंदर्यीकरण करते हुए बंच ऑफ़ फूल्स के सदस्य | Image Credits : Bunch of Fools Facebook Page

2 अक्टूबर 2014 को, मोदी के स्वच्छ भारत अभियान ने रायपुर के आठ युवा दोस्तों को इतना प्रभावित किया कि इन लोगों ने अपनी छुट्टियां शहर को साफ़ करने में बिताने के लिए बाकायदा एक ग्रुप बना लिया.

इनका मानना है कि पढ़े लिखे बेवकूफ ही ज़्यादा गंदगी फैलाते हैं और सफ़ाई करने वालों को बेवकूफ़ कहकर मज़ाक उड़ाते हैं। इसलिए ग्रुप का नाम रखा ‘बंच ऑफ फूल्स‘.

पूरी प्लानिंग और अनुशासन से होता है सफाई का काम ..

जागरूकता के लिये बंच ऑफ फूल्स ने एक मॉडल बनाया है. पहले ग्रुप के युवा सदस्यों की टोली शहर के गंदे स्थानों का चयन करती है और फिर इसे साफ़ करने की बाकायदा योजना बनाकर काम शुरू करती हे. रविवार या अन्य छुट्टियों के दिन सुबह छ: बजे से ग्रुप के लोग पूर्वनिश्चित स्थान पर सफ़ाई के लिए पहुँच जाते हैं.

 bunch of fools work

bunch of fools work

सफाई के बाद आस पास की दीवारों पर सामाजिक संदेश देने वाली आकर्षक चित्रकारी की जाती है, जिससे वह जगह हमेशा के लिये साफ़ रहे.

शुरुआत छोटी जरूर थी लेकिन आज जन आंदोलन का रूप ले चुकी है..

जब संस्था की नींव रखी गई थी तो इसमें मात्र सात सदस्य ही थे, लेकिन आज सदस्यों की संख्या 100 पार कर चुकी है।अब तक 200 हफ्तों में 219 से ज़्यादा स्पॉट्स की सफाई कर इस संस्था ने एक मिसाल कायम की है.

इस संस्था की विशेष बात यह है कि आपको इसका सदस्य बनने के लिए कोई फॉर्म नहीं भरना है और न ही किसी प्रकार की औपचारिकता निभानी है. आप बस झाड़ू उठाकर लगातार 4 हफ्ते सफाई में अपना योगदान करे और सदस्य बन जाइये.

bunch of fools work
bunch of fools work

संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि वेबसाइट पर लोग अपने आस-पास की गंदगी वाली जगहों की फोटो लेकर अपलोड कर सकते हैं. पहले संस्था की रिसर्च और विकास समिति का दल जाकर स्थान देखता है. फिर सन्डे को पूरी टीम जाकर वहां साफ-सफाई कर लोगो को जागरूक करने का काम करती है.

मिल चुके है अवार्ड और प्रधानमंत्री मोदीजी ने भी की है तारीफ ..

बंच ऑफ फूल्स को क्लीन इंडिया कैम्पेन के तहत 2015 में मुम्बई में ‘स्वच्छता सेनानी‘ का एवार्ड मिल चुका है. इनके कामों को सराहने वालों में ख़ुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हैं.

जब बंच ऑफ फूल्स ने रायपुर शहर में चौक चौराहों पर लगी महापुरुषों की प्रतिमाओं को धोकर चमकाना और प्रतिमाओं के आसपास के क्षेत्र को साफ़ रखने की शुरुआत की. इनके कार्य की प्रशंसा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह भी कई बार कर चुके है.

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बंच ऑफ़ फूल्स के सदस्यों के साथ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह

ट्विटर पर इसे पोस्ट किया तो स्वयं प्रधानमंत्री ने इनके इस ट्वीट को रीट्वीट किया और अपने रायपुर दौरे के दौरान उन्होंने बंच ऑफ़ फूल्स की टीम के साथ विशेष मुलाकात भी की थी.

शहर की दीवारों को चुनाव से पहले गन्दा होने से बचा रहे है ..

बंच ऑफ़ फूल्स चुनाव से ठीक 3-4 महीने पहले ही एक विशाल जन जागरूकता अभियान चला रही है जिसके माध्यम से छत्तीसगढ़ के सभी राजनैतिक दलों से निवेदन कर रही है कि इस चुनाव से दीवारों को रंगना बंद कर दे.

bunch of fools campaign
bunch of fools campaign

इस विशाल मुहीम में देश के सभी राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय दलों के अध्यक्ष एवं सचिव को पत्र लिखकर इस प्रथा को बंद करने का निवेदन किया गया है. इसके साथ-साथ वालंटियर्स इस मुहीम में निरंतर काम कर सभी दल के कार्यकर्ताओं को जागरूक कर रहे हैं.

साथ ही वोटर्स को भी समझा रहे हैं कि वे प्रचार-प्रसार के ऐसे तरीके का किसी भी रूप में समर्थन न करें. सोशल मीडिया के माध्यम से अब तक 1 लाख लोग इसका समर्थन कर दीवारों को साफ़ रखने की शपथ ले चुके हैं.

अब तक 200 हफ्तों तक बिना किसी अवकाश के कर रहे है शहर की सफाई ..

बंच ऑफ़ फूल्स के सभी सदस्य गर्व से कहते है कि अच्छी आदतों को अपनाने के लिए पागलपन जरुरी है, अब तक 200 हफ्तों तक बिना किसी अवकाश के निरंतर रायपुर शहर के गंदे स्पॉट्स को साफ़ करना अपने आप में अद्भुत है. इन सदस्यों के जोश को आंधी, तूफ़ान, बारिश, ठण्ड भी नहीं रोक पाई.

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नुक्कड़ -नाटक के जरिये जागरूकता फैलाते बंच ऑफ़ फूल्स के सदस्य

बंच ऑफ़ फूल्स के सदस्यों ने यह साबित कर दिया कि बड़े बदलाव के लिए छोटे-छोटे कदम उठाने पड़ते है और आज संस्था दिवार रंगने की इस प्रथा को ख़त्म कर एक सकारात्मक बदलाव के लिए तेज़ी से अग्रसर है.

बंच ऑफ़ फूल्स से संपर्क करने के लिए आप उनकी वेबसाइट अथवा फेसबुक पेज पर जा सकते हैं!

बी पॉजिटिव, बंच ऑफ़ फूल्स टीम के कार्य की सराहना करता है तथा उम्मीद करते है कि आप से प्रेरणा लेकर के देश के अन्य शहरों और गांवों में भी ऐसी ही मूर्खों की टोलिया बनेगी !

स्टोरी साभार : द बेटर इंडिया और इंटरनेट

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