उड़ने का जज्बा हो तो पंख अपने आप लग जाते है ।
कदम जमीं पर रहे, गगन कदम चूमने खुद आते है ॥

ये पंक्तियाँ बिहार के सत्रह साल के युवा पर सटीक बैठती हैं. खेलने-कूदने की उम्र में सामाजिक उद्यम चलाते हैं और ग्रामीण महिलाओं एवं पुरुषों को रोज़गार दे रहे हैं. अपने संस्थान के जरिये सामाजिक समस्याओं को हल करते हुए जरूरतमंद लोगो को आत्मनिर्भर बना रहे हैं. कम उम्र में पिता को खोया और माँ की मदद करते हुए अपनी पढाई की. घर में आर्थिक तंगी बढ़ी तो छोटी-मोटी नौकरियां की और अपनी प्रतिभा के बलबूते नवोदय परीक्षा पास की. अभी बारहवीं में पढाई कर रहे हैं लेकिन कई परिवारों की उम्मीद बन चुके हैं बिपुल राज़.

बिपुल राज़ अपने संस्थान ‘सनेह फॉउन्डेस्ट्री‘ के जरिये सामाजिक कार्यों के साथ ही बिहार की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी को ख़त्म करने का प्रयास कर रहे हैं. सनेह के जरिये अगरबत्ती, रुई से बनी बात्ती और मोमबत्ती का निर्माण किया जाता हैं. इसके जरिये 35 महिलाओं और 15 पुरुषों को रोजगार मिला हुआ हैं. इसके साथ ही सामाजिक कार्यों में भी यह संस्थान सकारात्मक कार्य कर रहा हैं.

bipul with kids
बच्चों के साथ बिपुल

बी पॉजिटिव इंडिया से बातचीत के दौरान बिपुल राज बताते हैं कि मेरा जन्म बिहार के अररिया जिले के फारबिसगंज में सामान्य परिवार में हुआ. पिता ठेकेदार थे इसलिए कुछ समय मुंबई में रहने का मौका भी मिला लेकिन बीमारी के चलते पिता की 2011 में असमय मौत हो गयी. इसके बाद मेरा एवं दो बहनों का जिम्मा माँ पर आ गया. हम मुंबई से वापस गांव लौट आये और जीवन जीने के लिए संघर्ष शुरू हो गया.

मां ने पूरी शिद्दत से हमें पालने की कोशिश की लेकिन मैंने उनका हाथ बंटाने के लिए कोल्ड-ड्रिंक एवं घड़ी की दूकान पर हेल्पर के रूप में काम करना शुरू किया. काम और पढ़ाई के साथ ही मैंने नवोदय स्कूल की प्रवेश परीक्षा के लिए तैयारी की. 2013 में बिना किसी कोचिंग के मेरा चयन नवोदय विद्यालय में हो गया.

नवोदय विद्यालय में चयन के बाद घर पर आर्थिक बोझ कम हुआ और मुझे गुणवत्तायुक्त शिक्षा भी मिलने लगी. यही पर हमने सामाजिक कार्यों की शुरुआत की.

work at factory
सनेह फॉउंडस्ट्री पर काम करती महिलाये

पढ़ने के लिए किताबे बहुत महँगी आती हैं. इसके लिए हमने बुक डोनेशन शुरू किया और जल्द ही दोस्तों के साथ मिलकर 150 किताबो का सेट हमारे पास उपलब्ध हो गया. इन किताबों को जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त में देना शुरू किया. साल के अंत में बच्चे पुरानी किताबे हमें वापस दे जाते थे. इसके बाद हमने वस्त्र दान के जरिये कपड़े जुटाना भी शुरू किया.

इस तरह से सामाजिक कार्य चलते रहे लेकिन बिहार की बेरोजगारी की समस्या को ख़त्म करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया था. जनवरी 2018 में दोस्तों के साथ मिलकर ‘सनेह फॉउंडस्ट्री‘ की नींव रखी जिसका उद्देश्य इंडस्ट्री को फाउंडेशन से जोड़ना हैं. 29 हज़ार से हमने काम शुरू किया और अगरबत्ती, रुई की बात्ती और मोमबत्ती का निर्माण करना शुरू किया. शुरुआती संघर्षों के बाद काम चल निकला और आज पचास से ज्यादा लोग हमारे साथ काम कर रहे हैं.

bipul with kids
बच्चों के साथ बिपुल

‘सनेह फॉउंडस्ट्री’ ने उद्यमिता के साथ ही सामाजिक सरोकारों को अपनी प्राथमिकता में रखा. गरीब बच्चों के लिए शिक्षा, किताबे, कपड़े एवं करियर काउन्सलिंग की व्यवस्था की गयी हैं. इसके साथ ही स्पोर्ट्स एवं अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए भी मंच प्रदान किया जाता हैं. बिहार की प्रसिद्ध गायिका पल्ल्वी जोशी ने ‘सनेह फॉउंडस्ट्री’ के कार्यों से प्रभावित होकर ब्रांड एम्बेसडर बनने के लिए राज़ी हुई.

बिपुल राज़ उद्यमिता के साथ ही एकेडेमिक्स में भी अपना जलवा बिखेर रहे है. वो न केवल परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन करते हैं बल्कि राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवा चुके हैं. उनके ‘सिगरेट के टुकड़े’पर बनाया गया प्रोजेक्ट राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया हैं.

एक वक्त था जब बिपुल अपने जीवन के लिए संघर्ष कर रहे थे लेकिन आज केवल सत्रह वर्ष की उम्र में न केवल पारिवारिक जिम्मेदारियां उठा रहे हैं बल्कि समाज के सामने उदाहरण पेश कर रहे हैं.

Bipul Raj awards
अवार्ड समारोह के दौरान बिपुल राज़

सामाजिक एवं उद्यमिता क्षेत्र में काम करने के लिए बिपुल को कई मंचो पर सम्मानित किया जा चूका हैं जिनमे राष्ट्रीय प्रेरणा अवार्ड- 2019 (इंदौर), यंगेस्ट इंटरप्रेन्योर ऑफ़ बिहार, यंग अचीवर अवार्डी, डिस्ट्रिक्ट इंटरप्रेन्योरशिप अवार्ड शामिल हैं.

अगर आप भी बिपुल राज या ‘सनेह फॉउंडस्ट्री‘ से जुड़ना चाहते हैं तो यहाँ क्लिक करे !

बी पॉजिटिव इंडिया, बिपुल राज और ‘सनेह फॉउंडस्ट्री‘ की टीम के सामाजिक उद्यमिता के क्षेत्र में किये गए कार्यों की प्रशंसा करता है और उम्मीद करता है कि आप से प्रेरणा लेकर देश के युवा आत्मनिर्भर बनेंगे.

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