अपने सपने तो सभी देखते हैं मगर चंद लोग ही ऐसे होते हैं जो दूसरे के सपनों को साकार करते हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं एक ऐसे ही शख्स की जो अपनी मेहनत और प्रयास से लोगों के बीच प्यार और ख़ुशियां बांट रहे हैं। इनका नाम है बिक्रम सिंह

पेशे से पत्रकार हैं बिक्रम सिंह पिछले 6 साल से दिल्ली व देश के अन्य राज्यों में पत्रकारिता कर रहे हैं। पत्रकारिता के साथ ही बिक्रम 3 साल से दिल्ली में ‘लिट्टी चोखा और संवाद‘ नाम का एक कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं। इस कार्यक्रम के ज़रिए लोगों को एक मंच प्रदान करने की कोशिश की जाती हैं। जहाँ पर विभिन्न क्षेत्रों के लोग मिलकर समाज एवं संस्कृति के विकास के लिए संवाद करते हैं। बिहार के प्रसिद्ध लिट्टी चोखा और लोक कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों के जरिये प्यार बांटने की कोशिश का नाम हैं लिट्टी चोखा और संवाद

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लिट्टी चोखा और संवाद – 2019 की कुछ झलकियां
‘दिल से लोकल, सोच से ग्लोबल है’

इस कार्यक्रम का टैगलाइन ही इसको ख़ास बनाता है। ये कार्यक्रम उन सभी का है, जो समाज में बदलाव चाहते हैं। ज़मीन से जुड़े रहने वाले और दुनिया जीतने वालों के लिए ही ये कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम में एक ऑटोवाले भी आते हैं, सब्ज़ी बेचने वाले भी आते हैं, रिक्शे वाले भी आते हैं, डॉक्टर भी आते हैं, वैज्ञानिक भी आते हैं और आम इंसान से लेकर ख़ास मेहमान आते हैं।

क्यों इतना ख़ास है ‘लिट्टी चोखा और संवाद?’

‘लिट्टी चोखा और संवाद’ में लिट्टी चोखा के अलावा देश का स्वाद है। वो स्वाद है, जो हम अपने गांव छोड़ कर आ गए हैं। देश की सभी संस्कृतियों का उत्सव मनाया जाता हैं। देश में कई कार्यक्रम होते हैं, मगर लिट्टी चोखा और संवाद सभी कार्यक्रमों से बेहद अलग है। इसे कार्यक्रम कहना ही बेईमानी होगा। ये त्योहार है।

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हाल ही में टीम द्वारा वृक्षारोपण भी शुरू किया गया

इस कार्यक्रम में समाज के सभी वर्ग के लोग आते हैं और एक दिन अपनी ज़िंदगी बिना बंधन के जीते हैं। लोग अपने परिवार के साथ आते हैं, ऐसा लगता है जैसे कोई मेले में जा रहे हों। यहां सकारात्मक सोच वाले लोगों से मिलते हैं, उनकी कहानियां जानते हैं और प्रेरित होते हैं। साथ ही साथ संगीत का आनंद भी उठाते हैं। मंच सभी के लिए है, यहां जिनके पास टैलेंट होता है, वो माइक लेकर अपनी बात लोगों तक पहुंचाते हैं।

कैसे शुरु हुआ ये कार्यक्रम?

इस कार्यक्रम के मुख्य आयोजनकर्ता बिक्रम सिंह बताते हैं कि एक ख़बर के सिलसिले में वो यमुना नदी के किनारे बसे किसानों से मिलने गए थे। वहां उन्होंने देखा कि जंगल में करीब 1200 से ज्यादा लोग रहते हैं। उनके साथ करीब 250 बच्चे भी रहते हैं, जो बिल्कुल भी पढ़ाई नहीं करते थे। ऐसे में बिक्रम ने उन बच्चों को पढ़ाना शुरु किया। उनके सपनों को जाना और उसपर काम करना शुरु कर दिया।

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लिट्टी चोखा और संवाद – 2019 की कुछ झलकियां

बिक्रम आगे बताते हैं कि बच्चे 2-3 महीने में इतने घुल-मिल गए कि वो अपने लगने लगे। जंगल में रहने वाले सभी बच्चे पढ़ने लगे और सपने देखने लगे। कोई डॉक्टर बनना चाहता था, तो कई इंजीनीयर। छोटे-छोटे बच्चों के सपने बहुत बड़े-बड़े थे। लिट्टी चोखा और संवाद की शुरुआत यहीं से हुई। 25 दिसंबर को अक्षरधाम मंदिर के ठीक पीछे जंगल में बसे किसानों के बीच इस कार्यक्रम की शुरुआत हुई।

‘लिट्टी चोखा और संवाद’ के पीछे है एक ख़ास मक़सद

पहला लिट्टी चोखा और संवाद 25 दिसंबर को हुआ था। इस जंगल में करीब 550 से ज्यादा लोग आए थे। इनमें से कई ऐसे लोग थे जिन्होंने बच्चों की मदद की। कार्यक्रम के ज़रिए बिक्रम बच्चों की मदद करना चाह रहे थे और वे सफ़ल भी हुए। इस कार्यक्रम के ज़रिए 40 बच्चों को पढ़ने की सुविधा मिली। 100 बच्चों के लिए एक स्कूल की व्यवस्था की गई।

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लिट्टी चोखा और संवाद – 2019 की कुछ झलकियां

स्थिति ये है कि 150 से ज्यादा बच्चे नियमित रूप से पढ़ रहे हैं। इतना ही नहीं गांव की महिलाओं को पहली बार सैनिटरी पैड के बारे में बताया गया। जंगल में रह रहे लोग अपने बच्चों के पढ़ाई के प्रति जागरूक हो गए हैं। दूसरा ‘लिट्टी चोखा और संवाद’ कार्यक्रम उसी गांव में हुआ। इस बार और बेहतरीन तरीके से मनाया गया। कार्यक्रम से पहले जंगल की सफाई हुई और लोगों को प्रकृति के प्रति उदार होने की शपथ भी दिलाई गई।

लोकल से ग्लोबल होने की कहानी

2019 का लिट्टी चोखा और संवाद कई मायनों में बेहतरीन रहा। इस बार इसकी इतनी लोकप्रियता थी इस कार्यक्रम को जंगल से हटाकर इंदिरा गांधी आर्ट एंड कल्चर सेंटर में करवाया गया।

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लिट्टी चोखा और संवाद – 2019 में शामिल हुए मेहमान

इस कार्यक्रम में 2500 से अधिक लोग सम्मिलित हुए। कार्यक्रम में करीब 27 राज्यों के लोग और कुछ विदेशी मेहमान भी शामिल हुए। कुछ ऐसे कलाकार भी शामिल हुए जिन्होंने अपने-अपने राज्यों की संस्कृति को सुर और कला से मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम में समाज के लगभग सभी वर्गों से सम्बन्ध रखने वाले लोग जैसे बुद्धजीवी, पत्रकार, समाजसेवी, प्रशासनिक, राजनैतिक सहित अन्य कई वर्गों के लोग भी शामिल हुए।

वैभव ना होते तो शायद हम ग्लोबल भी नहीं होते!

बिक्रम बताते हैं कि अगर लिट्टी चोखा और संवाद ग्लोबल हुआ है तो उसमें वैभव मिश्रा का महत्वपूर्ण योगदान है। वैभव शुरु से ही इस कार्यक्रम से जुड़े हैं। एक सोच को ग्लोबल बनाने के लिए वैभव ने जी तोड़ मेहनत की है। आज उनकी मेहनत के कारण ही ये ग्लोबल हुआ है।

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लिट्टी चोखा और संवाद में वैभव मिश्रा की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही
क्यों लोग ‘लिट्टी चोखा और संवाद’ को प्यार देते हैं?

देश में कई ऐसे लोग हैं, जिन्हें कोई प्लेटफॉर्म नहीं मिलता है। कई ऐसी कहानियां हैं, जो बाहर नहीं आ पाती हैं। वो मेहनत तो करते हैं, मगर उनके बारे में बहुत कम ही लोग जान पाते हैं। लिट्टी चोखा और संवाद एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जो लोगों को अपनी उपलब्धियां बताने का मौका देता है। यह मंच सभी को बराबर मौका देता है। इस मंच पर आए कई मेहमान आज आसमान छू रहे हैं।

बिक्रम इस कार्यक्रम को एक मिशन मानते हैं। ये प्लेटफॉर्म आम हिन्दुस्तानियों का है। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लोग अपने गांव से आते हैं। राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, जम्मु एवं कश्मीर, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से लोग आते हैं। इसकी लोकप्रियता को देखकर बिक्रम इसे देश के कोने-कोने में इस कार्यक्रम को लेकर जाना चाहते हैं।

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मुस्कान ड्रीम के सह-संस्थापक अभिषेक के साथ बिक्रम सिंह

दिल से लोकल, सोच से ग्लोबल है‘ ​इसी टैगलाइन के साथ बिक्रम आगे बढ़ना चाहते हैं। लिट्टी चोखा और संवाद की सोच को पूरी दुनिया में फैलाना चाहते है। इस कार्यक्रम को एक बड़ा अंतर्राष्ट्रीय मंच बनाना चाहते हैं। अब अमेरिका में ‘लिट्टी चोखा और संवाद’ का झंडा गाड़ना चाहते हैं।

बिक्रम सिंह और ‘लिट्टी चोखा और संवाद‘ से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करे !

बी पॉजीटिव इंडिया, बिक्रम सिंह और ‘लिट्टी चोखा और संवाद‘ के कार्यों की प्रशंसा करता हैं और भविष्य के लिए शुभकामनाए देता हैं।

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