2007 में राजस्थान की तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अकबर के खिलाफ महाराणा प्रताप को लड़ने के लिए अपनी सारी सम्पदा देने वाले भामाशाह के नाम पर योजना चलाई थी. शुरुआती दौर में प्रदेश की महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए 1500 रुपये उनके अकाउंट में डालने की योजना थी.

उद्योगपतियों एवं सक्षम लोगों से राज्य सरकार की मिलने वाली दान राशि से इस योजना की कार्यपद्धति बनाई गयी. इसके बाद 2008 में सरकार परिवर्तित होने के बाद यह योजना ठन्डे बस्ते में चली गयी.

इस योजना को एक बार फिर गति मिली 2013 चुनावों के बाद बनी वसुंधरा राजे सरकार में. इस बार इस दान के भरोसे न छोड़कर जन-धन अकाउंट के माध्यम से बड़ी तादाद में ग्रामीण एवं शहरी महिलाओं के बैंक खाते खोले गए.

इसके बाद परिवार के मुखिया के रूप में महिलाओं के नाम पर भामाशाह कार्ड जारी किये गए. यह राजस्थान में महिला सशक्तिकरण का पहला कदम बना.

bhamashah yojana
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इसके बाद इस भामाशाह कार्ड को विभिन्न योजनों से जोड़ा गया जिनमे मुफ्त इलाज, पेंशन, सरकारी सहायता, अनाज एवं सब्सिडी की रकम भामाशाह बैंक अकाउंट में जमा कराना शुरू किया. देखते ही देखते यह योजना राजस्थान में डिजिटल गवर्नेंस का प्रयाय बन गयी. उज्ज्वला योजना के साथ ही स्वच्छ भारत अभियान एवं प्रधानमंत्री आवास योजना को भी इस से जोड़ दिया गया.

आंकड़े खुद इस योजना की गवाही देते हैं. भामाशाह योजना के लाभार्थियों में 2018 में राज्य की कुल 7.7 करोड़ की आबादी में से 1.67 करोड़ परिवारों के कुल 6.15 करोड़ लोग शामिल हैं.

अधिकारी इसके आंकड़ों में हेराफेरी नहीं कर सकते क्योंकि सिस्टम में हर लाभार्थी की पहचान उसके परिवार समेत फोटो व अन्य पहचानों के साथ अंकित है. कुल मिलाकर राज्य की 54 योजनाओं के लाभार्थियों के व्यक्तिगत खातों में 2,300 करोड़ रु. की राशि जमा कराई गई है.

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सरकार ने बड़ी होशियारी के साथ इस वृहद कवायद को विशाल गवर्नेंस मॉडल में समाहित कर लिया है ताकि सरकारी अधिकारियों के साथ लाभार्थियों के प्रत्यक्ष संवाद को यथासंभव कम किया जा सके. ई-गवर्नेंस मॉडल के दायरे में दस हजार पंचायतें शामिल हैं जहां पर सरकार ने औसतन 4 करोड़ रु. खर्च किए हैं.

यह सफल रहा क्योंकि वसुंधरा सरकार ने पंचायत चुनावों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण के साथ-साथ एक तय स्तर की स्कूली शिक्षा को अनिवार्य कर दिया था. लिहाजा नए पंच शिक्षित हैं और उनमें से कई युवा हैं और महिलाओं का उनमें 58.29 फीसदी हिस्सा है.

राजस्थान महिलाओं को ग्रामीण प्रतिनिधित्व देने वालों में देश का दूसरा राज्य है. ग्रामीण राजस्थान का डिजिटाइजेशन दरअसल 55,000 ईमित्र कियोस्क धीरे-धीरे खड़ा करने की प्रक्रिया का ही विस्तार है. करीब 550 सेवाएं प्रदान करने वाले ये तमाम कियोस्क मोटे तौर पर पहले बेरोजगार युवा ही संचालित कर रहे थे.

Bhamasha yojana
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आज ईमित्र रोजाना दस लाख से ज्यादा काम निबटाते हैं जिसमें ऑनलाइन फॉर्म भरने और ड्राइविंग लाइसेंस की फीस जमा करने से लेकर आरक्षित श्रेणी का प्रमाणपत्र हासिल करने तक, सब शामिल हैं.

इसी के साथ राजस्थान सरकार ने निजी कंपनी जिओ टेलीकॉम के साथ मिलकर ग्रामीण महिलाओं के लिए पचास लाख स्मार्टफोन भी बांटे गए. इन प्रयासों से डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा मिला.

नोट : बी पॉजिटिव मीडिया किसी भी राजनैतिक पार्टी का समर्थन नहीं करता है. सफल योजनाओं के बारे में लिखने का उद्देश्य यह है कि देश के अन्य हिस्सों में भी इस तरह के काम हो सके.

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