चित्र साभार : गांव कनेक्शन

भारत के किसानों की हालत किसी से छुपी हुई नहीं है, मौसम पर निर्भरता और आधुनिक तकनीक के अभाव में आज कई किसान आत्महत्या जैसे खतरनाक कदम उठाने के लिए मजबूर है। खेती-बाड़ी किसानों के लिए और उनके परिवारों के लिए एक बोझ बन गयी है और उनकी आर्थिक स्थिति दयनीय होती जा रही है ।

भारत में मुख्यतया: खाद्यानों की ही खेती की जाती है लेकिन फल एवं फूलों की खेती से बहुत कम किसान जुड़े हुए है । तकनीक के इस्तेमाल से फूलों की खेती में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है क्योंकि इसमें मौसम पर कम निर्भरता के साथ ही पानी का भी कम इस्तेमाल होता है । फूलों के व्यापार में अभी तेजी देखने को मिल रही है क्योंकि आधुनिकता के दौर में  फूल साज-सज्जा,  दिखावट एवं विलासता का प्रतीक  बन चूका है ।

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आज हम ऐसे किसान की बात कर रहे है जिन्होंने फूलों की खेती में एक छोटी सी शुरुआत करके केवल खेतीबाड़ी से आज करोड़ों रुपये कमा रहे हैं। इसका एक बड़ा कारण यह है कि उन्होंने फूलों की खेती करने से पहले आधुनिक कृषि तकनीकों के बारे में जानकारी हासिल की और फिर इन वैज्ञानिक खेती की तकनीकों को अपनी खेती में लागू किया और आज फूलों की खेती और व्यापार में उनका एक जाना-माना नाम हैं। आईये आपको बताते हैं कि हाईटेक किसान बोलापल्ली श्रीकांत के बारे में, जिन्होंने बेहद कम समय में बड़ी उपलब्धि हासिल की।

बोलापल्ली श्रीकांत की आर्थिक हालत आम किसानों की तरह ठीक नहीं थी और उन्हें रोजगार के लिए अपने गृह क्षेत्र को छोड़कर शहर की तरफ पलायन करना पड़ा । 22 साल पहले, तेलंगाना के एक छोटे से शहर से ताल्लुक रखने वाले बोलापल्ली श्रीकांत का सपना था कि वह अपनी जमीन पर खेती करें। मगर गरीबी की वजह से घर-परिवार की स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह जमीन खरीद सकें।

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हालात बिगड़ने पर श्रीकांत को अपना शहर निजामाबाद छोड़ना पड़ा और वह वर्ष 1995 में बेंगलुरु अपना करियर बनाने के लिए आ गये। उस समय डोड्डाबल्लापुरा क्षेत्र के पास श्रीकांत को फूलों की खेती से जुड़ी एक कंपनी में नवस्थापित ग्रीन हाउस परियोजना में बतौर पर्यवेक्षक के रूप में काम मिला। उस समय श्रीकांत की सैलरी 1000 रुपये महीना थी।

श्रीकांत ने दो साल तक इस कंपनी में काम किया और फूलों की खेती में वैज्ञानिक खेती के बारे में काफी जानकारी हासिल की। इस बीच श्रीकांत ने अपनी दो साल की सैलरी यानी 24000 हजार रुपये से बैंगलुरु में ही फूलों का छोटा सा व्यापार शुरू किया और विभिन्न कंपनियों, किसानों और वितरकों से संपर्क साधकर फूलों का व्यापार करना शुरू कर दिया। पहले श्रीकांत अकेले ही फूलों को एकत्र करते थे और फिर पैकिंग और पार्सल किया करते थे। मगर मांग बढ़ने पर उन्होंने दो और कर्मचारियों को अपने साथ जोड़ लिया।

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काफी लंबे समय तक फूलों का व्यापार करने के बाद साल 2012 में श्रीकांत ने डोड्डाबल्लापुरा में ही 10 एकड़ जमीन खरीदी और इस जमीन पर आधुनिक कृषि तकनीक से फूलों की खेती करना शुरू की। मगर आज पांच साल बाद श्रीकांत 30 एकड़ जमीन पर फूलों की वैज्ञानिक खेती कर रहे हैं।

श्रीकांत ने फूलों की खेती से पिछले साल 9 करोड़ रुपये का बड़ा मुनाफा कमाया और अब इस वर्ष 12 करोड़ लाभ कमाने की अनुमान लगा रहे हैं। बड़ी बात यह भी है कि इन 20 सालों में श्रीकांत के साथ काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या 40 तक पहुंच चुकी है।

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बोलापल्ली श्रीकांत बताते है कि “कोई भी व्यक्ति जो खेती करना चाहता है, उसके लिए जरूरी यह है कि वह खुद पूरी तरह से खेती में समय दे और आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग करे।” श्रीकांत के साथ अब उनकी पत्नी रागा श्रीवंथी और उनके बच्चे भी साथ देते हैं। वे उपभोक्ताओं से संपर्क करते हैं और ऑर्डर लेते हैं। इतना ही नहीं, पत्नी के अलावा अब उनके बच्चे भी खेती में ही अपनी रुचि रखते हैं।

बोलापल्ली श्रीकांत ने अपनी अगली पीढ़ी को भी खेतीबाड़ी करने के लिए प्रेरित किया है और उनको साबित करके दिखाया है कि खेतीबाड़ी घाटे का सौदा नहीं है । Be Positive बोलापल्ली श्रीकांत के खेती में नवाचार के लिए शुभकामनाए देता है और ईश्वर से आशा करता है कि वो ऐसे ही भारत के किसानों को प्रेरित करते रहेंगे ।

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