विश्व क्रिकेट में क्रिकेट के सबसे बड़े मंच इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2018 की नीलामी शनिवार-रविवार को बेंगलुरु के एक पांच सितारा होटल में हुई । न्यूजीलैंड में चल रहे अंडर-19 विश्वकप में 149 किमी/घंटा की रफ्तार से गेंदबाजी करके विरोधी बल्लेबाजों के होश उड़ाने वाले कमलेश नागरकोटी (Kamlesh Nagarkoti) का आईपीएल नीलामी में जलवा देखने को मिला । ‘बाड़मेर एक्सप्रेस‘ के नाम से मशहूर नागरकोटी को कोलकाता नाइटराइडर्स ने 3 करोड़ 20 लाख की भारी-भरकम रकम में खरीदा । अब उन्हें दुनिया के तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क के साथ खेलने का मौका मिलेगा और उनके साथ गेंदबाजी के गुर भी सीखने का सुनहरा अवसर प्राप्त होगा।

अंडर-19 विश्वकप में बिखेर रहे है जलवा

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विश्वकप के मैच में कमलेश की बॉलिंग स्पीड

कमलेश नागरकोटी ने अंडर-19 विश्वकप के पहले ही मैच में अपनी गेंदबाजी की एक अलग छाप छोड़ी है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वर्ल्ड कप के अपने पहले ही मैच में कमलेश ने 149-150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकी और दिग्गजों को हैरान करके रख दिया। इस मैच में कमलेश ने कई गेंदें 145 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ऊपर की फेंकी। मैच के दौरान नागरकोटी ने सबसे तेज गेंद 149 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से फेंकी।

बचपन बिता था आर्मी कैंट में

कमलेश नागरकोटी के पिता लच्छम सिंह भारतीय सेना से मानद कैप्टन (Honorary Captain) पद से दिसंबर 2014 में रिटायर हुए थे। एक सैनिक का बेटा होने के नाते कमलेश आर्मी स्कूल से पढ़े हैं । आर्मी बैकग्राउंड का होने की वजह से कमलेश में अनुशासन भी काफी है। कमलेश नागरकोटी तीन भाई-बहन हैं, जिनमें कमलेश सबसे छोटे हैं। कमलेश के बड़े भाई विनोद सिंह नागरकोटी भी क्रिकेट खेलते हैं और एक एकेडमी में कोचिंग भी देते हैं।

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कमलेश के पिता ने एक इंटरव्यू में बताया कि शुरुआत में वह राजस्थान के बाड़मेर से खेलता था, लेकिन 2004 में पोस्टिंग जयपुर हो गई तो वे पूरे परिवार के साथ यहीं आ गए । कमलेश फिर यहीं जयपुर में खेलने लगा । कमलेश आर्मी स्कूल से पढ़े हैं। इसके साथ ही कमलेश ने संस्कार क्रिकेट एकेडमी में दाखिला लिया और यहां से क्रिकेट खेलने लगा। क्रिकेट की पहली एबीसीडी उन्होंने इसी एकेडमी में सीखी है।

गुरु सुरेंद्र सिंह ने निखारा कमलेश को

लच्छम सिंह नागरकोटी बताते हैं, ”कमलेश ने सात साल की उम्र से क्रिकेट खेलना शुरू किया था। उस वक्त कमलेश के कोच सुरेंद्र सिंह राठौड़ आर्मी कैंट में आए थे। उन्होंने कमलेश को खेलते हुए देखा और कहा कि यह लड़का अच्छा क्रिकेट खेलता है। यह कुछ बन सकता है । इस तरह कमलेश ने संस्कार क्रिकेट एकेडमी में दाखिला किया।”

शुरुआत में कमलेश के एक्शन में दिक्कत थी। जिस पर उनके कोच सुरेंद्र ने काम किया। उस वक्त कमलेश की उम्र महज 12 साल की थी। जिसके साथ वे 7वीं क्लास की पढ़ाई कर रहे थे। उनके परिवार ने उन्हें हमेशा क्रिकेट खेलने के लिए सपोर्ट किया। फिलहाल वे कॉलेज के फर्स्ट इयर की पढ़ाई भी कर रहे हैं, लेकिन लगातार प्रेक्टिस और खेल के बीच पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते।

उन्होंने बताया कि कमलेश का ज्यादा झुकाव यूं तो शुरू से ही गेंदबाजी की तरफ ही रहा है. हालांकि, वह बल्लेबाजी भी करता था, लेकिन गेंदबाजी में शुरू से ही स्पीड अच्छी रही इसलिए उसने तेज गेंदबाजी पर ही अपना ज्यादा ध्यान लगाया।

राहुल द्रविड़ भी है इनके दीवाने

कमलेश नागरकोटी ने अंडर-14, अंडर-16 और अंडर-19 में राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया है। कमलेश ने राहुल द्रविड़ को खासा प्रभावित किया है। राहुल से कमलेश इतना प्रभावित थे कि उन्होंने उसे बांग्लादेश का दौरा करने वाली अंडर-23 टीम में भी शामिल किया था।

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राहुल द्रविड़ के साथ कमलेश

स्कूल में फीस देने के लिए नहीं थे पैसे

कमलेश ने बताया कि स्कूल में पढ़ाई के दौरान उन्हें स्ट्रगल का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि वे संस्कार वैली स्कूल में पढ़ना चाहते थे, लेकिन उनका फैमिली बैकग्राउंड ऐसा नहीं था कि वे स्कूल की फीस दे पाएं। ऐसे में स्कूल के टीचर्स और उनके कोच सुरेंद्र राठौर ने उन्हें काफी सपोर्ट किया। उन्होंने स्कूल के प्रिंसिपल से कमलेश के लिए बात की। जिसके बाद स्कूल की प्रिंसिपल ने भी कमलेश की मदद की और स्कूल फीस माफ कर दी।

इसके साथ ही कमलेश ने बताया कि क्रिकेट कोचिंग के लिए भी उन्हें शुरुआत में कुछ दिन भी फीस देनी पड़ी। जिसके बाद वो भी नहीं देनी पड़ी। जिसके बाद उन्होंने पहले बाड़मेर की तरफ से खेलना शुरू किया और उसके बाद धीरे-धीरे अंडर 19 टीम में जगह बनाई।

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कमलेश के पिता का कहना है, ”क्रिकेट का जुनून कमलेश को बचपन से ही रहा है। गर्मियों में राजस्थान में पड़ने वाली कड़ी धुप में भी कमलेश दिनभर खेलता रहता था। कोई साथी मिल जाए तो ठीक नहीं तो पेड़ से गेंद बांधकर ही दिनभर खेलता रहता था। साथ में एक पानी की बोतल ले जाता था और जब वह खत्म हो जाती थी तब घर आता। पानी की बोतल भरता और फिर खेल में लग जाता था।”

आशीष नेहरा और मोहम्मद शमी हैं आदर्श

कमलेश आशीष नेहरा और मोहम्मद शमी को अपना आदर्श मानते हैं। अपने हर इंटरव्यू में कमलेश यही बताते हैं कि आशीष नेहरा ने जो स्पीड शुरुआती दौर में बनाई थी। वही स्पीड 36 साल में रिटायर हुए तब तक उनकी स्पीड वही बनी रही। कमलेश नेहरा की सिर्फ स्पीड ही नहीं, बल्कि उनकी फिटनेस से भी खासे प्रभावित हैं । मोहम्मद शमी की स्पीड के साथ उनकी लाइन और लैंथ को भी कमलेश काफी पसंद करता है। अगर भारत के बाहर के गेंदबाजों की बाद करें तो कमलेश पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज वसीम अकरम से काफी प्रभावित हैं।

टीम इंडिया और विराट कोहली के साथ खेलने की इच्छा

कमलेश की बस एक ही तमन्ना है कि वह बस विराट कोहली के साथ ही टीम इंडिया में खेलें। राहुल द्रविड़ से कमलेश को काफी सीखने को मिलता है। वह छोटी-छोटी बारिकियां बताते हैं, जिनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता है।

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