जितने बड़े सपने होंगे, उतनी ज्यादा मुश्किलें होगी। जितना ज्यादा संघर्ष होगा, मंजिल उतनी ही बड़ी होगी।

हरियाणा के फतेहाबाद के दौलतपुरा गांव की एक लड़की पर यह पंक्तियाँ सटीक बैठती है। हरियाणा की गिनती देश के सबसे कम लिंगानुपात वाले राज्यों में होती है। बाल श्रम और लैंगिक भेदभाव के चलते कई लड़कियों को देश में अपनी पढाई छोड़नी पड़ती है। लेकिन एक लड़की ने परिवर्तन का हिस्सा बनकर परिवर्तन ला दिया है।

अपने गांव से बाल अधिकारों और बाल मजदूरी के खिलाफ आवाज़ उठायी। लड़कियों के परिवारों से मिली, उनकी गालियां खायी लेकिन बुलंद हौसले और कभी न हार मानने के जज्बे ने उनके गाँव को बाल-मजदूरी से मुक्त करा दिया।

उनकी नियति और काम को देखकर गान के सरपंच और बड़े-बुजुर्ग भी उनसे जुड़े। एक छोटी सी शुरुआत को उन्होंने एक आंदोलन बना दिया। 16 वर्ष की उम्र में गांव की लड़कियों की दिशा एवं दशा बदलने वाली सामाजिक कार्यकर्ता है अंजू वर्मा (Anju Verma)

हरियाणा के फतेहाबाद के दौलतपुर गांव की अंजू ने अपने घर से परिवर्तन की शुरुआत की और अब वो एक आंदोलन का चेहरा बन चुकी है। अपने गांव को बाल मजदूरी एवं लड़कियों को शिक्षा से जोड़ने के बाद वो अन्य गाँवो में जागरूकता फैला रही है।

इन्होने ‘बुलंद उड़ान‘ नाम की संस्था की स्थापना की जो महिला अधिकारों, लैंगिक समानता, बाल श्रम और बालिका शिक्षा पर काम करती है। वो देश को बाल श्रम से मुक्त करना चाहती है। अब तक वो अपनी संस्था के माध्यम से 695 बच्चों को शिक्षा से जोड़ चुकी है। हरियाणा के गाँवो में 15 बाल-विवाह रोके है और 10 से ज्यादा यौन शोषण के मामलों में महिलाओं की मदद की है।

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बच्चों के साथ अंजू वर्मा

अंजू वर्मा ने बी पॉजिटिव इंडिया से बातचीत में बताया कि मेरी क्लास में एक लड़की पढ़ती थी जो कभी भी होम वर्क पूरा करके नहीं लाती थी। जिसके चलते उसे हमेशा डांट पड़ती थी। जब मैंने उससे इसका करना पुछा तो उसने बताया कि घर के काम के कारण मुझे पढ़ने का बिल्कुल समय नहीं मिलता है।

मैंने सोचा कि क्यों न इसके माता-पिता से बात की जाए। जब मै उसके घर पहुंची तो उसके माता-पिता ने मुझे भी दांत फटकार कर भगा दिया। यह बात मैंने अपने पिता को बताई तो उन्होंने भी मुझे मेरी पढाई पर ध्यान देने की नसीहत दी।

मै इस वाकये से डर गयी थी लेकिन मुझे मेरी सहेली के लिए कुछ करना था। इसी बीच हमारे गांव में ‘Save Children‘ नाम के एनजीओ की वर्कशॉप हुई जिसमे हमें बाल अधिकारों और खासकर महिला अधिकारों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद मैंने भी वीडियो देखकर बाल अधिकारों के बारे में जानकरी इकठ्ठा की। मैंने मेरे गांव के सरपंच से इस मुद्दे पर बात की, उन्हें मेरी बात समझ में आयी और उन्होंने मेरा साथ देने का फैसला किया।

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बच्चों के साथ अंजू वर्मा

एक बार फिर मै मेरी सहेली के घर पहुंची और सरपंच के साथ मैंने उनके परिवार को समझाया। जब हमने बाल-अधिकारों के हनन पर सजज एवं जेल के बारे में बात की तो उनका परिवार डर गया और उन्होंने मेरी सहेली को पढ़ने के लिए समय देना शुरू किया। मेरी सहेली ने भी इस मौके को भुनाया और अच्छे अंको से उत्तीर्ण हुई।

इसके बाद मैंने मेरे गांव में ‘बाल सरंक्षण समिति‘ के तत्वाधान में गांव की सभी लड़कियों को स्कूल भेजने के बारे में काम करना शुरू किया। गांव के सरपंच और बुजर्ग भी हमारे काम से जुड़े तो काम करना आसान हो गया। इसके चलते मेरे गांव की सारी लड़कियां अभी पढ़ रही है और मुझे उम्मीद है कि वो अपने जीवन में कुछ अच्छा जरूर करेगी।

इसके बाद मैंने मेरे गांव के दूसरे मुद्दे यानि ‘बाल मजदूरी‘ के ऊपर काम करना शुरू किया। मेरे गांव में गेंहू और कपास की खेती होती है। घर के छोटे बच्चों को भी गांव में कपास चुनने और गेंहू कटाने के लिए ले जाया जाता है। कई घंटो तक उनसे काम करवाया जाता है और बहुत ही कम पैसा भी देते है। कई बच्चे और खासकर लड़कियां अपने परिवार की आजीविका में योगदान देने के लिए पढाई तक छोड़ देती थी।

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बच्चों के साथ अंजू वर्मा

एक बार फिर इस मुद्दे पर संघर्ष शुरू हुआ। शुरुआत में बच्चों के माता-पिता से लेकर खेत मालिक नाराज़ हुए लेकिन हमारी नियत और अपने बच्चों का भविष्य देखते हुए उन्होंने बच्चों से काम करवाना बंद कर दिया। जो बच्चे कभी खेतों में काम कर रहे थे, उनके पास अब कला थी।

अंजू वर्मा ने अपने दोस्तों और गांव वालों के साथ मिलकर ‘कोमल हाथ कलम के साथ‘ नाम की मुहीम शुरू की थी जिसने उनके गांव को बाल मजदूरी मुक्त बना दिया। इसी के साथ जो लड़कियां घर के काम में लगी रहती थी, वो आज पढाई कर रही थी।

एक सामान्य परिवार से आने वाली अंजू वर्मा के पिता ट्रक ड्राइवर है जबकि माँ गृहणी है। अभी अंजू बारहवीं की विद्यार्थी है। सामाजिक कार्यों में लगी अंजू आगे जाकर ह्रदय रोग विशेषज्ञ बनना चाहती है। वो न केवल अपने गांव बल्कि पुरे देश से लैंगिक असमानता, बाल मजदूरी और लड़कियों की शिक्षा के हालात बदलना चाहती है।

Anju Verma award from PM
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के हाथों सम्मान ग्रहण करती अंजू वर्मा

अंजू वर्मा के काम की कई मंचो पर सराहना हो चुकी है। उन्हें प्रतिष्ठित ‘अशोका फाउंडेशन‘ की अशोका फ़ेलोशिप से भी सम्मानित किया गया है। ‘द हिन्दू‘ समाचार पत्र समूह का अवार्ड भी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के हाथों मिला है। इसी के साथ यूनाइटेड नेशन के वालंटियर अवार्ड, आइकॉन युथ, UNV इंडिया, युथ फॉर सेवा सम्मानित कर चुके है। उन्हें TEDx के साथ ही कई मंचो पर अपनी बात रखने का मौका मिला है।

अगर आप भी अंजू वर्मा से जुड़ना चाहते है तो उनके फेसबुक पेज से जुड़ सकते है।

बी पॉजिटिव इंडिया, अंजू वर्मा और उनकी टीम के कार्यों की सराहना करता है और भविष्य के लिए शुभकामनाए देता है।

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