दुसरो की मदद करते समय यदि दिल संतुष्ट है तो वही सेवा है.

यह पंक्तियाँ छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर क्षेत्र के एक सामाजिक कार्यकर्त्ता पर सटीक बैठती हैं. महिला स्वास्थ्य और मासिक धर्म के बारे में जागरूकता के साथ ही बच्चों को शिक्षा प्रदान करने का काम किया जा रहा हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी महिलाओं को होने वाले मासिक धर्म को एक प्रथा मानकर परिवार एवं समाज में रूढ़िवादी तरीके से व्यवहार किया जाता हैं.

शारीरिक पीड़ा के साथ ही महिलाओं को मानसिक तनाव से गुजरना पड़ता हैं. उन्हें चार-पांच दिन घर के काम-काज के साथ ही रसोई में नहीं घुसने दिया जाता हैं. ग्रामीण भारत में इसी संकीर्ण सोच को ख़त्म करने के लिए सरगुजा साइंस ग्रुप लगा हुआ हैं. मासिक धर्म के साथ ही सिलाई एवं बुनाई प्रशिक्षण के द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाले शख्स का नाम हैं अंचल कुमार ओझा (Anchal Kumar Ojha).

महिलाओं को जागरूक करने के लिए अंचल कुमार ने सरगुजा साइंस ग्रुप (Surguja Science Group) के बैनर तले ‘प्रोजेक्ट इज़्ज़त (Project Izzat)‘ का सञ्चालन किया जा रहा हैं. महिला समूह और सरकारी विद्यालयों के माध्यम से गांव-गांव में निशुल्क सेनेटरी पैड उपलब्ध करवाए जा रहे हैं. ग्रुप से जुड़े लोग महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता का ध्यान रखना, सेनेटरी पैड के साथ ही साफ़ कपड़े का इस्तेमाल करने के बारे में पोस्टर एवं गोष्ठी के जरिये बताते हैं.

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सरगुजा ग्रुप के द्वारा आयोजित कार्यक्रम

बी पॉजिटिव इंडिया से बातचीत में अंचल कुमार ओझा बताते हैं कि शुरुआती पढाई के बाद मैंने आर्ट्स में ग्रेजुएशन किया और सामाजिक कार्य में मास्टर्स किया. 2014 में जाग़ृति यात्रा के दौरान दिल्ली स्थित गूँज फाउंडेशन जाने का मौका मिला. संस्थान द्वारा चलाये जा रहे कार्यक्रमों से मुझे काफी प्रेरणा मिली और ऐसी ही शुरुआत हम छत्तीसगढ़ में करना चाहते थे. 2014 में साफ़ कपड़े उपलब्ध करवाने से शुरू हुआ सफर आज सेनेटरी पैड तक पहुँच गया. सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों का भी समुचित सहयोग मिलता हैं.

अंचल कुमार बताते हैं कि संस्था बनाने का आइडिया स्कूलों एवं काॅलेजों में साइंस (विज्ञान) को बढ़ावा देने के लिये किया. इसके बाद कार्य करते-करते कई अन्य विषयों से जुड़ते चले गये. 2006 में जब सरगुजा साइंस ग्रुप की स्थापना की थी तो साइंस गतिविधियों को प्रोत्साहन देने का विचार था, साइंस का स्टूडेंट था और स्कूलों और काॅलेजों में साइंस गतिविधियों को प्रोत्साहित करना चाहता था.

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सरगुजा ग्रुप के द्वारा आयोजित कार्यक्रम में अंचल ओझा

फिर कुछ मित्र मिले और हमने शहर के झूग्गी बस्तियों में बच्चों को निःशुल्क कोचिंग देना शुरू किया, शुरूआत अच्छी रही. 60 से 70 बच्चें इस कोचिंग में पहुंचने लगे, तब मैं, रविन्द्र कुमार और विनोद पैकरा तीन मित्र मिलकर कोचिंग चलाते थे. फिर उस कोचिंग से आगे बढ़कर हमने कम्प्युटर सेंटर की स्थापना की. जहां पर हमने लगभग 250 लोगों को 2008-09 के दरम्यिान 100 रूपये मासिक फिस लेकर कम्प्युटर सिखाना शुरू किया.

कम्प्युटर सेंटर के समीप ही स्थित गैराज से काफी की संख्या में गैरेज में काम करने वाले लोगों के अलावा उनके बच्चें कम्प्युटर सिखने आने लगे. फिर हमने संस्था को और आगे बढ़ाया और ग्रामीण क्षेत्रों में लोक-कला, संस्कृति एंव युथ एक्टिवीटी को बढ़ाना शुरू किया. इस पहल से युवा और स्कूली छात्र-छात्राएं हमसे जुड़ते चले गये. 2012 में हमने अपनी संस्था सरगुजा साइंस ग्रुप का शासकीय रजिस्ट्रेशन सरगुजा साइंस ग्रुप एज्युकेशन सोसायटी के नाम से करा लिया. इसके बाद ग्रामीण क्षेत्रों में दो स्कूल जो कि 200 रूपये मासिक की फीस पर गुणवत्ता युक्त शिक्षा देने के लिये संचालित हैं.

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सरगुजा ग्रुप के द्वारा गाँवो में विशेष अभियान

इसके साथ ही मासिक धर्म को लेकर सैनेटरी पैड एवं महिला सशक्तिकरण को लेकर स्वयं सहायता समूहों की स्थापना कर उन्हें आर्थिक रूप से सबल बनाने प्रयास शुरू किया. आज सरगुजा, बलरामपुर एवं सूरजपुर जिले के 7000 से अधिक स्कूली छात्राओं को हम अपनी संस्था के प्रयास से निःशुल्क सैनेटरी पैड उपलब्ध करा रहे हैं. वहीं 1000 से अधिक गांवों में मासिक धर्म के प्रति महिलाओं को जागरूक कर चुके हैं और यह क्रम लगातार जारी है.

वहीं दूसरी ओर ग्राम पंचायत स्तर पर समूहों को अपनी संस्था के माध्यम से सैनेटरी पैड को लेकर चलाये जा रहे प्रोजेक्ट ईज्जत से जोड़कर सैनेटरी पैड की उपलब्धता गांव-गांव तक मामूली कीमत पर करा रहे हैं, जिससे जहां स्वयं सहायता समूह की महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं एवं किशोरी बालिकाओं को कम किमत पर घर-घर सैनेटरी पैड उपलब्ध हो रहा है. स्वयं सहायता समूह की महिलाएं घर-घर जाकर जहां मासिक के प्रति सैनेटरी पैड एवं कपड़े से निर्मित पैड के स्वच्छ उपयोग को लेकर जागरूक कर रही हैं, वहीं मासिक को लेकर गांव-गांव में खुल कर चर्चा हो रही है.

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सरगुजा ग्रुप के द्वारा गाँवो में विशेष अभियान

शुरूआती दौर में कई बार काफी संघर्ष करना पड़ा, यह एक सामाजिक कार्य है, इसे प्रोफेशन के रूप में हमने अब शुरू किया है. ऐसा भी समय आया जब संस्था 0 बैलेंस पर चलती रही, किसी तरह आगे बढ़ते रहे और मित्र भी कई बार काम छोड कर चले गये, फिर किसी तरह सभी को प्रोत्साहित कर एकत्र किया और फिर संस्था काफी संघर्षों के बाद खड़ी हुई जो कि अब मजबूत स्थिति में हैं. आज संस्थान के जरिये 33 वेतनभोगी कर्मचारी हैं और 15 स्वयं सेवक निःस्वार्थ भाव से कार्य कर रहे हैं.

मासिक धर्म एवं सैनेटरी पैड की जागरूकता की हमारी कहानी अब ऐसी है कि सरगुजा में इस पर कार्य के लिये लगातार लोगों का सहयोग मिलता रहता है. स्वयं स्कूल प्रबंधन से जुड़े लोग हमसे संपर्क कर अपनी संस्थानों में इस योजना के शुरूआत हेतु प्रयास करते हैं. हमने स्कूलों एवं काॅलेजों में अब सैनेटरी पैड की वेंडिंग मशीन एवं डिस्पोजल मशीन लगाने की शुरूआत की है. जहां पर छात्राओं को 5 रूपये के सिक्का डालने पर मशीन से दो पैड उपलब्ध होंगे.

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स्कूलों में विशेष अभियान के तहत सेनेटरी पैड उपलब्ध करवाए जा रहे है

सरगुजा में यह पहली बार है कि कोई महिलाओं के बीच में जाकर ऐसी विषय पर बात कर रहा है, जिस पर महिलाएं स्वयं अपने घर पर न तो अपने पति से खुल कर चर्चा करती हैं और न ही घर के किसी अन्य सदस्य से. महिलाएं भी इस तरह के कार्यक्रमों में सामुहिक चर्चा में खुल कर हिस्सा ले रहीं हैं और औरों को जागरूक कर रही हैं. फिडबैक फार्म के माध्यम से अपना सुझाव भी दे रही हैं.

वहीं प्रोजेक्ट ईज्जत के माध्यम से हमने लोगों से पुराने सामान, कपड़े आदि इकट्ठा करना शुरू किया. उन्हें उपयोगी बनाकर ग्रामीण इलाकों में जरूरतमंद लोगो को बांटा जाता हैं. दैनिक उपयोगी वस्तुओं से वंचित लोगो की मदद की जाती हैं. स्वास्थ्य शिविर के आयोजन से लेकर मुफ्त चिकित्सा एवं दवाइयां उपलब्ध करवाई जा रही हैं. वहीं स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को सैनेटरी पैड, अगरबत्ती उद्योग, कैरी बैग निर्माण, थैला निर्माण, कपड़ा धोने का सर्फ एवं फिनायल निर्माण सहित विभिन्न गतिविधियों से जोड़कर उनके आर्थिक सशक्तिकरण हेतु प्रयासरत हैं।

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महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई कार्यक्रम चल रहे है

हमारे टीम द्वारा ईज्जत प्रोजेक्ट द्वारा सैनेटरी पैड एवं मासिक पर किये जा रहे कार्य को देखते हुए जिला प्रशासन भी समय-समय पर सहभागी बन उक्त कार्य में सहयोग करती हैं. जनप्रतिनिधियों ने विधानसभा में सवाल पुछ कर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया जिसके बाद आज प्रोजेक्ट के रूप में कुछ जिलों में कन्या हाॅस्टलों में सैनेटरी पैड उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार कार्य कर रही है. कई मंच पर सरगुजा संस्थान को सम्मानित किया जा चूका हैं.

अंचल कुमार ओझा आगे बताते हैं कि किसी भी कार्य को करने के लिये अपनी ओर से भरपुर प्रयास किया जाना चाहिए, कठिनाईयों से भागना एवं हार से डरना नहीं चाहिए क्योंकि हार के आगे ही जीत है। मैंने कई बार कठिनाईयों का सामना किया जब मेरे साथ कार्य करने वाला कोई नहीं था, लेकिन मैं अकेला कार्य को बढ़ाता रहा, साथीयों को इसके लिये प्रोत्साहित करता रहा, आज स्थिति बदल रही है, कल अकेले थे आज ईज्जत प्रोजेक्ट के साथ कारवां जुड़ता चला जा रहा है.

अगर आप भी अंचल कुमार ओझा या सरगुजा संस्थान से जुड़ना चाहते हैं तो यहाँ क्लिक करे !

बी पॉजिटिव इंडिया, अंचल कुमार ओझा और ‘सरगुजा साइंस ग्रुप‘ के सभी सदस्यों के कार्यों की सराहना करता हैं और भविष्य के लिए शुभकामनाए देता हैं.

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