शाहरुख खान की मूवी का एक डायलॉग है कि किसी चीज़ को चाहों तो पूरी कुदरत आपको उस चाहत को पूरा करने में जुट जाती हैं। ऐसा ही इस बच्चे के साथ होता हैं क्योंकि मुंबई की झुग्गियों से निकलकर न्यूयॉर्क के प्रसिद्ध डांस स्कूल तक पहुंचना एक फिल्मी कहानी या सपने जैसा लगता है। कंस्ट्रक्शन कंपनी में वेल्डर के रूप में काम करने वाले एक व्यक्ति का सात संतानों में से एक बेटा आज उस मुकाम तक पहुंचा है कि उसके संघर्ष और प्रतिभा पर एक बॉलीवुड फिल्म बनने जा रही है। इस प्रतिभा के धनी और संघर्ष की प्रतिमूर्ति का नाम है अमीरुद्दीन शाह (Amiruddin Shah)

16 वर्ष के अमीरुद्दीन का चयन न्यूयॉर्क के प्रसिद्ध बैले डांस स्कूल “Jacqueline Kennedy Onassis School (JKO) ” में  हुआ है और वो भी स्कॉलरशिप के साथ।  उनको लंदन के प्रसिद्ध ओपेरा हाउस से भी स्कॉलरशिप मिली लेकिन उन्होंने न्यूयॉर्क जाने का फैसला किया।

मुंबई की झुग्गी बस्तियों में जन्मे अमीरुद्दीन का बचपन बेहद गरीबी में बीता। उनके पिता एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में वेल्डर के रूप में काम करते हैं और घर का खर्चा बमुश्किल निकाल पाते हैं। उनके पांच भाई एवं दो बहनें हैं जो छोटा मोटा काम करके अपने परिवार की आर्थिक मदद करने की कोशिश करते हैं। आर्थिक तंगी के चलते उन्हें स्कूल में पढ़ने का भी मौका नहीं मिला लेकिन उनको बचपन से ही संगीत और डांस का शौक़ रहा है।

छह वर्ष की उम्र से वो शादी समारोह में बतौर डांसर अपना काम कर रहे हैं। 2013 तक उन्होंने बैले डांस के बारे में कभी सुना भी नहीं था लेकिन नैसर्गिक प्रतिभा के धनी अमीरुद्दीन ने मौका मिलते हैं,  इस डांस विधा में मास्टरी हासिल कर ली।  अमीरुद्दीन लगातार हिप हॉप डांस में अपने आप को पारंगत कर रहे थे तभी एक ऑडिशन में उनकी किस्मत बदली और वो एक डांस स्टूडियो में पहुंच गए।

इस स्टूडियों को बॉलीवुड के मशहूर कोरियोग्राफर ऐश्ले लोबो (Ashley Lobo) ने बनाया था । लोबो पहले ही अपनी कला का जलवा “जब वी मेट”, रॉकस्टार जैसी मूवीज में बिखेर चुके थे। 2013 में उन्होंने ग्रोइंग होम नाम से एक प्रोग्राम शुरू किया जिसके जरिए वो गरीब बच्चों को डांस सिखाना चाहते थे। इसी ऑडिशन में अमीरुद्दीन भी सेलेक्ट हो जाता हैं। डांस में ट्रेनिंग के लिए उसे अपना घर छोड़ना पड़ता है । इस समय तक अमीरुद्दीन को बैले डांस के बारे में कुछ भी नहीं पता था क्योंकि एक तो यह डांस स्टाइल बहुत मुश्किल है, साथ ही इसकी ट्रेनिंग भी बहुत महंगी होती हैं । बैले डांस को लड़कियों के लिए ही मुफीद माना जाता हैं।

एश्ले लोबो के दोस्त येहूदा माओर(Yehuda Maor) जो कि विश्व प्रसिद्ध बैले डांस मास्टर है, भी उनके स्टूडियो में बच्चों को देखने के लिए आते हैं। एक दिन प्रैक्टिस करते वक्त उनकी नजर अमीरुद्दीन पर पड़ी तो उन्हें अमीरुद्दीन की डांस शैली और शारीरिक लचीलापन बैले डांस के मुफीद लगी। माओर ने अमीरुद्दीन को हिप हॉप डांस छोड़कर बैले डांस करने की सलाह दी।

इसके बाद से अमीरुद्दीन ने बैले डांस में प्रैक्टिस करना शूरू किया और माओर के मार्गदर्शन में इस नृत्य शैली की बारीकियां सीखना शुरू कर दिया। वो रोज छः से आठ घंटे कड़ी मेहनत करते रहें और तीन साल में वो इस नृत्य शैली में पारंगत हो गए। यह नृत्य शैली काफी कठिन मानी जाती हैं और इसको पूरा सीखने में आठ से दस साल लग जाते हैं लेकिन अमीरुद्दीन ने अपने गुरु के मार्गदर्शन एवं कड़ी मेहनत से बहुत मुश्किल नृत्य शैली को कम समय में ही सीख लिया।

मुंबई में प्रैक्टिस करने के दौरान ही उनका एक वीडियो बनाकर अमेरिका के पोर्टलैंड स्तिथ बैले डांस एकेडमी में भेजा । अमीरुद्दीन और उनके साथियों के डांस को बहुत पसंद किया गया और उन्हें पोर्टलैंड में आकर सीखने का न्यौता मिला। अमीरुद्दीन देश से बाहर पहली बार विदेशी धरती पर अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए अमेरिका के पोर्टलैंड शहर पहुंच जाते हैं।

वो अमेरिका में अपनी पढ़ाई कर ही रहे थे कि उन्हें न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित बैले डांस एकेडमी JKO से पढ़ने का न्यौता मिलता है और स्कॉलरशिप भी साथ में ऑफर की गई। वीजा दिक्कतों के कारण उन्हें अमेरिका जाने में थोड़ा समय जरूर लगा लेकिन अब वह विश्व के जाने माने बैले डांसर के साथ बैले डांस में पारंगत हो रहे हैं। अमीरुद्दीन को अमेरिका भेजने में उनके गुरु माओर तथा एश्ले लोबो का बहुत बड़ा योगदान रहा हैं जिन्होंने उनके लिए फीस एवं रहने के लिए पैसों की व्यवस्था भी की।

अमीरुद्दीन ने अपनी प्रतिभा और मेहनत से बता दिया है कि मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती हैं और किस्मत भी उन्हीं का साथ देती हैं जो अनवरत परिश्रम करते हैं। अपनी पढ़ाई के बाद वो भारत में ही बैले डांस एकेडमी खोलना चाहते हैं जिससे कि उनके जैसे बच्चों को बैले डांस सीखने में मदद मिले।

भारतीय परिवारों में आज भी लड़कों के डांस करने पर उन्हें हेय दृष्टि से देखा जाता हैं क्योंकि डांस पर लड़कियों  एकाधिकार  माना जाता हैं लेकिन अमीरुद्दीन ने अपनी मेहनत से वो मुकाम हासिल किया है जिसे पाना लगभग असम्भव है।

Be Positive, अमीरुद्दीन के कठिन संघर्ष एवं सफलता को सलाम करता है तथा उम्मीद करता हैं कि आप से प्रेरणा लेकर हमारे पाठक भी अपने जीवन में कुछ अच्छा करने की कोशिश करेंगे।

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