भारत में पिछले कुछ वर्षों से इ-कॉमर्स का क्रेज बढ़ा है. अमेज़न, फ्लिपकार्ट, पेटीएम और अन्य कंपनियों ने भारतीयों की खरीददारी की शैली को बदला है. पिछले दस वर्षों में कई कीर्तिमान स्थापित करने वाली इन कंपनियों ने अभी तक कोई मुनाफा नहीं कमाया है.

मतलब घाटे में चल रही है. निवेशकों से मिले हज़ारों करोड़ों से यह कम्पनिया चल रही है. लेकिन भारत में कई छोटी इ-कॉमर्स कम्पनिया है. जो अभी मुनाफे में चल रही है. इन्ही में से एक है अक्षय जैन (Akshay Jain) की कस्टमबाबा.कॉम (Custombaba.com).

अक्षय की कंपनी ने पिछले साल 2 करोड़ का टर्नओवर पार किया था. इस वर्ष यही आंकड़ा 4-5 करोड़ के बीच रहने की उम्मीद है.इ-कॉमर्स के प्रतिस्पर्धा के दौर में बिना निवेशकों के पैसे के बाद भी अक्षय ने अपनी कंपनी को मुनाफे में ला दिया है.

अक्षय ने उन लोगो के सामने मिसाल पेश की है जो सफल होने के लिए निवेशकों का इंतजार करते है.

2012 में अपनी इंजीनियरिंग की पढाई करने के बाद अक्षय को कोई नौकरी नहीं मिली. परिवार एवं दोस्तों की सलाह के बाद उन्होंने SAP में ट्रेनिंग करने का फैसला किया. लगभग एक वर्ष एवं पांच लाख खर्च करने के बाद भी उन्हें 5000 रुपये प्रति महीने की नौकरी मिली.

इसके बाद भी उन्होंने कड़ी मेहनत जारी रखी और 2013के अंत तक उन्हें अच्छी नौकरी मिल चुकी थी. अपनी जॉब के साथ ही उन्होंने ऑनलाइन टी-शर्ट बेचने का काम शुरू किया. शुरुआत में ज्यादा सफलता नहीं मिली लेकिन हार नहीं मानी.

इसी बीच 2013 के अंत में उन्हें जापान की एक कंपनी ने जापान में काम करने का ऑफर दिया. अक्षय ने अपनी जॉब से इस्तीफा दे दिया लेकिन दो महीने बाद उन्हें जापान की कंपनी ने काम पर रखने से मना कर दिया.

इसके साथ ही अक्षय के पास उस समय कोई नौकरी नहीं थी. अब वो नौकरी के लिए भटकते रहे. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ज्यादा कंपनियों में काम करने के चलते उन्हें कही पर भी जॉब नहीं मिलती दिख रही थी.

उनका ऑनलाइन पोर्टल भी महीने के 200 से ज्यादा टी-शर्ट ही बेच रहा था. इस मुसीबत के समय में अक्षय का पुणे में रहने के लिए भी संघर्ष करना पड़ा.

इसी बीच उनके पोर्टल ने अगले एक से डेढ़ साल में अच्छी प्रगति की.उनके संघर्ष के समय ने उन्हें वो सिखाया जो वो कभी भी बिज़नेस स्कूल में MBA करके नहीं सीख़ सकते. धीरे-धीरे उनका कस्टम टी-शर्ट डिज़ाइन एवं प्रिंटिंग का काम चल निकला.

custombaba work
custombaba की फैक्ट्री में काम करते कर्मचारी

2015 की शुरुआत में उन्होंने नरेंद्र मोदी के कैंपेन के लिए टीशर्ट डिज़ाइन किये जो बहुत जल्द ही प्रसिद्द हो गए. इसके बाद अक्षय ने भारतीय सेना के साथ ही देशभक्ति के नारों वाले टीशर्ट बाज़ार में उतारे. यह कदम अक्षय के लिए बहुत फायदेमंद रहा.

इसके बाद अक्षय ने कुछ सामाजिक संस्थाओं के साथ भी काम किया.सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं सामाजिक संस्थानों ने कस्टमबाबा की मार्केटिंग में कोई कमी नहीं रखी. इसी बीच उन्हें आदित्य बिरला समूह के ऑनलाइन पोर्टल Abof.com से एक बड़ा आर्डर मिला.

उस आर्डर को पूरा करने के लिए उन्होंने लुधियाना में अपनी एक टीशर्ट मैन्युफैक्चरिंग की फैक्ट्री लगाई. Abof.com में काम मिलने से अक्षय का काम आसान हो गया लेकिन कुछ ही समय में अबॉफ(Abof.com) ने काम करना बंद कर दिया.

कॉर्पोरेट से मिले अच्छे रिस्पांस से कस्टमबाबा और अक्षय को कई नए आर्डर दिलवाये जिसमे फ्लिपकार्ट, मिंत्रा जैसी कंपनियां भी शामिल है.

इसके बाद बड़ी कंपनियों के आर्डर पुरे करने के लिए उनोने बैंक से एक करोड़ का लोन लिया. बैंक लोन से उन्होंने अपनी एक और टीशर्ट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाई.

अभी अक्षय की पचीस फीसदी कमाई कस्टम प्रिंटिंग से होती है और 75% कमाई बड़ी कंपनियों के आर्डर से होती है. अक्षय के पास अभी 500 लोगों की बड़ी टीम है और इस वित्त वर्ष में पांच करोड़ रेवेन्यू का लक्ष्य रखा है.

शौकिया तौर पर खोले टी-शर्ट प्रिंटिंग बिज़नेस को अक्षय ने अपनी मेहनत से उसे एक बड़ी कंपनी में तब्दील कर दिया. मुसीबतों से हार मारने के बजाय नए मौको को भुनाना अक्षय की सफलता का राज़ है.

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