एशियाई गेम्स में गोल्ड, कबड्डी मास्टर्स में स्वर्णपदक और कबड्डी वर्ल्डकप में विजेता के साथ ही लगभग भारतीय कबड्डी के चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल अजय ठाकुर (Ajay Thakur) किसी परिचय के मोहताज़ नहीं है.

प्रो कबड्डी के दौर में बेंगलुरु बुल्स के साथ ही पुणेरी पलटन तक का प्रतिनिधित्व किया लेकिन असली पहचान मिली सचिन तेंदुलकर की टीम तमिल थलाईवाज में. पिछले सीजन से शामिल इस टीम की कप्तानी करते हुए अजय ठाकुर ने सभी कबड्डी प्रशसंकों का दिल जीता है.

प्रो कबड्डी सीजन-6 की शुरुआत भले ही अच्छी नहीं रही हो लेकिन मंजीत चिल्लर और जसप्रीत सिंह की मौजूदगी में अजय ठाकुर की टीम ख़िताब की प्रबल दावेदारों में से एक है.

अजय ठाकुर ने अभी तक प्रो कबड्डी सीजन में भाग लिया लेकिन ख़िताब नहीं जीत पाए. कबड्डी खेल में केवल यही एक ख़िताब है जिसकी तलाश अजय ठाकुर को है.

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विश्व कप विजेता भारतीय कबड्डी टीम के सदस्य अजय ठाकुर ने कहा है कि भले ही हम आठ बार के विश्व चैंपियन है, लेकिन कबड्डी लीग ने खिलाड़ियों को नई पहचान दी है। गांव में मिट्टी पर खेलते हुए कभी सोचा नहीं था कि क्रिकेट की जबर्दस्त लोकप्रियता के बावजूद कबड्डी  का खेल भी लोगों को पसंद आएगा।

अजय ठाकुर प्रो-कबड्डी लीग में  600 पॉइंट करने वाले सीजन के तीसरे कबड्डी प्लेयर है.

अजय ठाकुर अभी भारतीय कबड्डी टीम के भी कप्तान है तथा पिछले वर्ष दुबई में आयोजित कबड्डी मास्टर्स में ख़िताब भी दिलाया. एशियाई खेल-2018 में भले ही भारतीय टीम स्वर्ण पदक नहीं जीत पायी हो लेकिन अजय ठाकुर के गेम के प्रति समर्पण की सभी न तारीफ की. चोट के बावजूद वो सेमीफइनल में खेले लेकिन टीम की हार नहीं टाल सके.

कबड्डी खेल अजय ठाकुर के खून में है और वो कई बार कबड्डी मैच खेलने के लिए कॉलेज से भाग जाया करते थे. अजय ठाकुर का जन्म हिमाचल प्रदेश के नलगढ़ जिले के दहोता गांव में 1 मई 1986 को हुआ.

उनके पिता भी कबड्डी प्लेयर तथा कोच रह चुके है. उनके भाई राकेश ठाकुर ने भी भारतीय कबड्डी टीम का प्रतिनिधित्व किया. उन्होंने अपनी पढाई भी नलगढ़ के गवर्नमेंट कॉलेज से ही पूरी की.

अजय ठाकुर कबड्डी के प्रति अपने समर्पण के लिए जाने जाते है. 2014 में वो टाइफाइड से पीड़ित होने के बाद भी उन्होंने प्रो-कबड्डी लगे के मैच खेले. बीमारी के चलते उनका वजन 11 किलोग्राम कम हो गया था.

Ajay Thakur frog jump
Ajay Thakur frog jump | Image Credits : Pro Kabaddi 

जब उनका सेलेक्शन भारतीय कबड्डी टीम में हुआ तो उनके दुबलेपन को लेकर काफी मज़ाक उड़ाया जाता था लेकिन अजय ने 15 दिनों में 10 किलोग्राम वजन बढाकर आलोचकों का मुंह बंद कर दिया.

अजय ठाकुर ने अपने कॉलेज से खेल की शुरुआत की जिससे उन्हें जल्द ही हिमाचल प्रदेश टीम में जगह मिल गयी. नेशनल गेम्स में अच्छे प्रदर्शन के बाद उन्हें इंडियन नेवी से खेलने का मौका मिला.

यहाँ पर उन्होंने अपने स्किल्स और फिटनेस सुधारने पर ज्यादा ध्यान दिया. इसके बाद उन्होंने एयर इंडिया की तरफ से खेलना शुरू किया और जल्द ही उन्हें प्रो-कबड्डी लीग में खेलने का मौका मिला.

प्रो-कबड्डी लीग के पहले सीजन में उन्हें बेंगलुरु बुल्स ने ख़रीदा और उनकी टीम लीग की टॉप चार टीमों में शामिल रही. 1.85 मीटर लम्बे कद वाले अजय ठाकुर ने अपने प्रदर्शन से सभी का दिल जीत लिया. टच पॉइंट के साथ ही फ्रॉग जम्प उनकी पहचान बन गया. डू और डाई रेड के वो स्पेशलिस्ट बन गए.

दो सीजन के बाद उन्हें पुणेरी पलटन का प्रतिनिधित्व किया और अपने खेल में सुधार करते हुए वो लीग के टॉप रेडर्स में शामिल हो गए. इसी बीच उन्हें सार्क गेम्स और एशियाई गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला और दोनों ही जगह स्वर्ण पदक अपनी झोली में डाल दिया.

प्रो-कबड्डी ने अपने फॉर्मेट में चेंज करते हुए अन्य टीम को भी शामिल किया जिसके चलते तमिल थलाईवाज को पांचवे सीजन में शामिल किया गया. पांचवे सीजन में अजय ठाकुर को रेडिंग के साथ ही कप्तानी की अतिरिक्त भूमिका भी मिल गयी.

पिछले सीजन में उनकी टीम का प्रदर्शन भले ही आशानुरूप नहीं रहा लेकिन इस सीजन में अजय ठाकुर से काफी उम्मीदे है.

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