माता-पिता चाहे कितना भी संघर्ष करे लेकिन अपने बेटे-बेटियों को काबिल बनाने में लगे रहते है. अपने बच्चों को जीवन में सफल बनाने के लिए कई बार भूखे तक रह जाते है. जीवन-यापन के लिए छोटे-मोटे काम करने के बाद भी अपने बच्चों को सभी सुविधाए दिलाने में लगे रहते है.

ऐसी ही एक कहानी है पंजाब के अबोहर के रहने वाले आशारानी और बलबीर सिंह की. उन्होंने सड़क किनारे तंदूर लगाकर छोटा सा रेस्टोरेंट खोला. तंदूर की आग में रोटियां तपाकर वो अपने बच्चों का भविष्य लिखने की जद्दोजहद में लगे रहे. उनकी आमदनी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वो कैसे अपने परिवार को चलाते होंगे.

इसी बीच उनके बेटे अजय सिंह ने पंजाब न्यायिक सेवा परीक्षा में पास होकर अपने माता-पिता के संघर्षों का सुखद परिणाम दिया. गरीबी में रहकर भी अजय सिंह ने पढ़ना नहीं छोड़ा और समय मिलते ही वो अपने माता-पिता के काम में हाथ बंटाने से भी नहीं चूकते.

अजय ने न्यायिक सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर न सिर्फ अपने माता-पिता का सम्मान बढ़ाया बल्कि इस बात को भी साबित कर दिया कि सफलता किसी भी हालात में पाई जा सकती है.

अपनी पढाई में कोई आर्थिक दिक्कत नहीं आये इसके लिए अजय ने एक वरिष्ठ वकील के यहाँ क्लर्क की नौकरी. कॉलेज की पढाई, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी और अपने माता-पिता के तंदूर पर उनकी मदद करने में भी कोई चूक नहीं की.

इन सब कामों में अजय सिंह ने गजब का तालमेल बिठाया. अब वो जज बन गए है और गरीबों एवं वंचितों को न्याय दिलाने के लिए कटिबद्ध है.

भले ही अजय सिंह के परिवार में आर्थिक कमजोरी के कारण दसवीं से आगे कोई नहीं पढ़ पाया लेकिन माँ-बाप की जिद्द के चलते अजय सिंह को आगे बढ़ने और पढ़ने का पूरा मौका मिला.  उनके माता-पिता का सपना था कि उनका बेटा पढ़-लिखकर बड़ा अधिकारी बने और अजय ने यह सपना सच करके दिखाया.

अपनी कामयाबी पर खुद अजय काफी खुश हैं और वे इस कामयाबी का सारा श्रेय भी अपने माता-पिता को ही देना चाहते हैं. सफलता मिलने के बाद अजय ने बड़े ही भावुक होकर कहा कि उनकी मां ने तंदूर में तपकर रोटियां बनाती रहीं, ताकि मैं बड़ा आदमी बन जाऊं, और मैंने कड़ी मेहनत के बाद अपने माता-पिता को खुश होने का मौका दिया .

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