अगर एक शिक्षक या गुरु चाहे तो शिष्य को सफलता के सातवे आसमान पर पहुंचा सकता है. इतिहास ऐसे कई उदाहरणो से भरा पड़ा है लेकिन हरियाणा के एक शिक्षक ने बच्चों को अंग्रेजी में इतना निपुण बना दिया कि हरियाणा सरकार को स्कूल के माध्यम को हिंदी से अंग्रेजी करना पड़ा. देश में भले ही शिक्षा के स्तर को लेकर कितनी भी बाते हो लेकिन अगर शिक्षक ठान ले तो सुविधाएँ केवल बहाना बन कर रह जाती है. ऐसे ही एक शिक्षक का नाम है अजय लोहान(Ajay Lohan).

अंग्रेजी शिक्षा के साथ ही अजय लोहान प्रतिवर्ष 10 गरीब लड़कियों के शिक्षा का खर्च भी उठाते है. यह नेक कार्य पिछले 12 से अधिक वर्षों से अनवरत जारी है. वर्ष 2006-07 में हरियाणा के नारनौंद जिले के गवर्नमेंट सीनियर सेकंडरी स्कूल में अंग्रेजी अध्यापक के तौर पर काम शुरू किया था. आपको जानकार आश्चर्य होगा कि अजय लोहान जिस स्कूल में अपनी सेवाएं दी हैं उनके पिता भी उसी स्कूल में शिक्षक रह चुके हैं.

अजय के पिता स्वर्गीय रामनिवास लोहान इसी स्कूल में राजनीती शास्त्र के प्राध्यापक रह चुके हैं. उनके पिता ने गरीबी की हालत में भी पढाई की और एम् फील तक पढाई करने के बाद स्कूल से जुड़े. अपने पिता के संघर्ष से मिली प्रेरणा और गाइडेंस से अजय ने भी शिक्षक बनने का निर्णय किया. उनके पिता के वंचित लड़कियों के शिक्षा देने के सपने को अजय पूरा कर रहे है.

देश की नामी आईटी कंपनी इनफ़ोसिस भी मान चुकी है जलवा

अजय लोहान की प्रतिभा का लोहा हरियाणा सरकार के साथ ही देश के बड़ी आईटी कंपनी इनफ़ोसिस ने भी माना. बच्चों को औद्योगिक भ्रमण के दौरान इनफ़ोसिस के ऑफिस में जाने का मौका मिला. बच्चों के बौद्धिक विकास और प्रतिभा को देखते हुए इनफ़ोसिस समूह ने स्कूल को 10 कंप्यूटर दान देने का फैसला किया था. जिससे आज बच्चे तकनिकी शिक्षा और कंप्यूटर का लाभ ले रहे है.

लेफ्टिनेंट बने छात्र के साथ अजय लोहान | तस्वीर साभार : अजय लोहान के फेसबुक पेज से

सत्र 2007 के समय यह सरकारी स्कूल भी आम हरियाणा के स्कूल जैसा ही था. अंग्रेजी पढ़ना और समझाना बच्चों के लिए बहुत मुश्किल काम माना जाता था लेकिन अजय लोहान ने साल दर साल मेहनत करके अंग्रेजी को रुचिकर बनाते हुए बच्चों को पढ़ाया. जो बच्चे अंग्रेजी समझ नहीं पाते थे, वो आज फर्राटेदार अंग्रेजी में बात करते है.

अन्य शिक्षकों के सहयोग के चलते स्कूल से 7 स्टूडेंट्स लेफ्टिनेंट बने हैं. तीन बच्चे आईआईटी व 6 पीएमटी में गए है. वहीं 116 स्टूडेंट्स दिल्ली व पंजाब की यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे हैं.

अंग्रेजी शिक्षण के लिए अपनाते है खास रणनीति

अजय ने अंग्रेजी सींखाने के लिए खास रणनीति बनाई. उन्होंने शुरुआत में डिक्शनरी के माध्यम से बच्चों को प्रतिदिन कुछ शब्द सींखाना शुरू किया. 10 शब्दों से शुरू हुआ सफर प्रतिदिन एक पेज अंग्रेजी में लिखना एवं बोलने तक पहुँच जाता है.

बच्चों के साथ अजय लोहान | तस्वीर साभार : अजय लोहान के फेसबुक पेज से

इसके बाद व्याकरण और वाक्य निर्माण करना सिंखाया. धीरे-धीरे एक पेज राइटिंग के लिए दिया. 5-5 शब्दों के मीनिंग बनवाए. हर रोज दो लाइन तीन लाइन बढ़ाते रहे. इसके चलते उन्हें इंग्लिश स्पीकिंग में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी.

अजय लोहान ने पाबड़ा के नवोदय स्कूल से 1999 में 10वीं व 2001 में 12वीं की, इसके बाद जींद के सेंटर से बीएड की. बीएड करते ही अंग्रेजी शिक्षक की नौकरी करने लग गए. इसके बाद भी एम ए अंग्रेजी, एमफिल, मास कम्यूनिकेशन में की. इसके बाद अभी वो अंग्रेजी में पीएचडी भी कर रहे हैं.

मिल चुके है कई सम्मान

अजय लोहान के प्रयासों ने इनको कई मंचों पर सम्मान भी दिलाया है जिनमे हरियाणा गौरव अवार्ड, बेस्ट स्टेट मोटिवेशन अवार्ड, बेस्ट टीचर अवार्ड, प्राणनाथ प्रणामी अवार्ड, हरियाणा संस्कृति संरक्षक अवार्ड, बेस्ट पार्लियामेंट आर्गेनाईजेशन अवार्ड व कक्षा तत्परता कार्यक्रम के तहत उत्कृष्ठ सेवाओं के लिए गोल्ड मेडल मिल चुका है.

एक अवार्ड समारोह के दौरान अजय लोहान | तस्वीर साभार : अजय लोहान के फेसबुक पेज से

अजय 7 बार बेस्ट टीचर अवार्ड जीत चुके हैं. पिछले वर्ष उन्हें ह्यूमन राइट्स राष्ट्रीय गौरव अवार्ड-2018 जैसा प्रतिष्ठित सम्मान भी मिल चूका है.

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