भारत में किसानों की हालत किसी से छुपी हुई नहीं है , दिन-ब-दिन बढ़ते किसान आत्महत्या के आंकड़े और उनकी मजबूरिया दिल को झकझोर कर रख देती है । सरकार अपनी योजनाओं के माध्यम से 2022 तक किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए प्रयत्न कर रही है लेकिन धरातल पर इन योजनाओं का लाभ अभी भी संघर्षरत किसानों से दूर है । इसी कारण किसानों को कभी जंतर-मंतर तो कभी सड़कों पर अपने हक़ की लड़ाई लड़ने के लिए प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है ।

बचपन में अपने दादाजी को पैदा की गयी फसल के उचित मूल्य के लिए संघर्ष करते देखकर एक पोती को बड़ा दुःख होता था लेकिन सीमित संसाधनों एवं जानकारी के अभाव में बचपन में वो ज्यादा कुछ नहीं कर सकीं । अपनी प्रतिभा के बदौलत देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT दिल्ली से ग्रेजुएशन के पश्चात् अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक कंपनी की नींव रखीं। इस कंपनी के माध्यम से वो अपने दादाजी के साथ ही देश के किसानों की समस्या भी हल करने की कोशिश कर रही है । राजस्थान के छोटे से गांव से आने वाली इस युवा उद्यमी का नाम है अनु मीणा (Anu Meena) जो एग्रोवेव (Agrowave) के माध्यम से किसानों के हालात सुधारने की कोशिश कर रही है ।

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एग्रोवेव के माध्यम से अनु और उनकी टीम राजस्थान, हरियाणा एवं दिल्ली-एनसीआर के किसानों से उनकी फसल सीधे उनके खेतों से उठाती है । इस फसल को वो बिना किसी दलाल एवं बिचोलिये की मदद से रेस्टोरेंट , होस्टल्स एवं अपार्टमेंट्स में सीधे ग्राहकों के पास पहुंचती है । इसके कारण ग्राहकों को न केवल ताज़ा फल एवं सब्जियाँ मिलती है बल्कि मार्किट की तुलना में उनके दाम भी कम होते है । एग्रोवेव किसानों को उनकी फसल के मार्केट भाव से 10-25 % दाम अधिक देती है और उन्हें व्यापरियों एवं मंडियों के चक्कर लगाने से भी मुक्ति मिल जाती है । इसके साथ सीधे खेत से ही बिक जाने के कारण भण्डारण एवं रख-रखाव का खर्चा भी बच जाता है जिससे किसानों की आय में वृद्धि के साथ ही मुनाफा भी बढ़ता है ।

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एग्रोवेव पर उपलब्ध कृषि-उत्पाद

अनु के अनुसार ” देश की 70% जनसँख्या कृषि क्षेत्र से जुडी हुई है लेकिन उनका जीडीपी में योगदान केवल 13% ही योगदान खेती-बाड़ी से होता है । देश में कृषि क्षेत्र सबसे ज्यादा असंगठित एवं अपार संभावनाओं वाला क्षेत्र है लेकिन परंपरागत खेती और मानसून पर निर्भरता ने किसानो की हालात ख़राब कर रखीं है । ”

किसानों के साथ यह भी दिक्कत है कि वो कृषि से जुड़ी वस्तुए जैसे खाद-बीज एवं यंत्र खुदरा मार्केट से खरीदते है लेकिन जब फसल पैदा हो जाती है तो उन्हें अपनी फसल थोक के भाव में बेचनी पड़ती है और कृषि ही एक ऐसा क्षेत्र है जिसमे उत्पादनकर्ता किसान, अपने उत्पाद की कीमत तय नहीं कर सकता बल्कि अन्य उद्योगों में मैन्युफैक्चरिंग करने वाले ही अपने उत्पाद का मूल्य तय करते है ।

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अनु ने एग्रोवेव को एक सफल कंपनी बनाने के लिए एक लम्बा सफर तय किया है । राजस्थान के ग्रामीण इलाके में पैदा होने के बाद अपने गांव के ही सरकारी स्कूल से प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त की। उसके बाद उन्होंने कोटा से IIT प्रवेश-परीक्षा के लिए तैयारी की और 2011 में देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT दिल्ली में बायो टेक्नॉलजी में दाखिला लिया । अपनी पढाई के दौरान उन्हें देश एवं विदेश की कई नामी-गिरामी कंपनियों एवं संस्थानों के साथ काम करने का मौका मिला । खेलकूद में अव्वल रहने वाली अनु ने अपने संस्थान के कई खेल-आयोजनों में भाग लिया ।

2016 में अपनी पढाई ख़त्म होने के बाद उसने कॉलेज में सहपाठी रह चुकी पायल जावलकर के साथ एग्रोवेव की नींव रखीं और कुछ समय में ही कृषि क्षेत्र में खासा अनुभव रखने वाले अरुण यादव ने एग्रोवेव की टीम में शामिल हो गए । एग्रोवेव , डाटा एवं तकनीक के माध्यम से किसानों की समस्या सुलझाने के लिए काम करना शुरू कर दिया । उन्होंने ट्रांसपोर्ट तथा सप्लाई चैन पर अपना ध्यान केंद्रित किया क्योंकि किसानों को सबसे ज्यादा समस्याए इसी फेज में आती है ।

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एग्रोवेव की टीम अनु के साथ

शुरुआत में उन्होंने 50 किसानों की एक टीम बनाकर सीधे उनके खेतों से फसल खरीदना शुरू किया और उसके बाद दिल्ली और NCR में अपने कृषि उत्पाद बेचना शुरू किया । ग्राहकों को जब कम दाम और उच्च गुणवत्ता वाले कृषि उत्पाद मिलाने लगे तो एग्रोवेव के ग्राहकों की संख्या में तेजी देखने को मिली । अनु ने अपनी टीम के साथ रिसर्च में पाया है कि कृषि उत्पादों की कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण बिचौलियों का कमीशन एवं फसलों का भण्डारण है जिसके के कारण आम आदमियों को ज्यादा पैसा चुकाना पड़ता है लेकिन कीमत 20-25% ही किसानो के पास जाता है ।

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एग्रोवेव कंपनी की सफलता ने जल्द ही निवेशकों को अपनी ओर आकर्षित करना शुरू कर दिया है और उन्हें देश के नामी निवेशक से भी कंपनी में पूंजी निवेश मिला है । इस निवेश की मदद से अनु और उसकी टीम कंपनी के विस्तार की योजना पर काम कर रही है । अभी उनकी कंपनी 30 से ज्यादा ग्राहकों और 50 से अधिक किसानों के साथ मिलकर लगभग एक लाख रुपये का व्यवसाय कर रही है और अगले एक साल में टर्नओवर को 2 करोड़ रुपये करने का लक्ष्य रखा है ।

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किसानों के चहरे पर मुस्कान लाती एग्रोवेव टीम

एक साल के कम समय में ही एग्रोवेव ने कई किसानों के जीवनस्तर को सुधारने का काम किया है लेकिन पुरे देश के किसानों को अपने पोर्टल से जोड़ने के लिए अभी लम्बा एवं संघर्षमय रास्ता तय करना है । अनु ने कई सरकारी एजेंसियों को भी अपनी कंपनी का प्रोपोजल दिया है जिससे कि वो ज्यादा से ज्यादा किसानों की मदद कर सके।

अनु में अपने दादाजी की समस्या के समाधान के लिए टेक्नॉलजी, डाटा एवं एनालिटिक्स के प्रयोग से एक बेहतरीन आईटी उत्पाद बना दिया है जो उनके दादाजी जैसे लाखों किसानों की मदद कर सकता है । कई बहुराष्ट्रीय कम्पनिया भी खेत से सीधे आपके प्लेट में कृषि उत्पाद पहुंचा रही है लेकिन इस असंगठित क्षेत्र में एग्रोवेव ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करवाई है ।

Be Positive, अनु और उनके दोस्तों के किसानों के जीवन स्तर को उठाने के प्रयास और जज्बे को सलाम करता है और उम्मीद करता है कि भारत के अन्य गांवों से भी उनके जैसे युवा किसानों की तकदीर बदलने के लिए काम करने के लिए प्रेरित होंगे ।

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