अगर इंसान ठान लें तो उसके लिए कुछ भी मुश्किल नहीं है.

यह पंक्तियाँ उत्तर-प्रदेश के आगरा की एक महिला के ऊपर सटीक बैठती हैं. परीक्षा देने का ऐसा जूनून कि प्रसव के आठ घंटे बाद ही यह महिला परीक्षा हॉल पहुँच गयी. दर्द सहते हुए, बिना कुछ खाए, एक नहीं बल्कि तीनों पारियों में परीक्षा दी. प्रसव के आठ घंटे के बाद ही डॉक्टरों की सलाह के बाद एग्जाम हॉल पहुंची. परीक्षा केंद्र का स्टाफ छात्रा के साहस को देखकर दंग था. सभी ने उसके हौसले को सलाम किया. उन्होंने यह साबित कर दिया कि इंसान अगर ठान ले तो कुछ भी कर सकता हैं.

उत्तर-प्रदेश के आगरा शहर के कागारौल की रहने वाली प्रियंका वर्मा ने प्रसव के आठ घंटे के बाद ही डीएलएड (बीटीसी) की परीक्षा देने पहुंच गईं. प्रियंका वर्मा ने प्रसव के एक दिन पहले भी दोनों पारियों में परीक्षा दी थी. परीक्षा के दौरान ही उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हो गई थी, जिसके बाद परिवार के लोगों ने उसे हॉस्पिटल में भर्ती कराया.

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परीक्षा सेण्टर पर एग्जाम देती प्रियंका वर्मा | तस्वीर साभार : अमर उजाला

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार डीएलएड वर्ष-2017 के तृतीय सेमेस्टर की परीक्षाएं सात जून से शुरू हुईं थी. पहले दिन दो परियों में परीक्षा हुई. परीक्षा के दिन ही रात करीब सवा एक बजे प्रियंका ने बच्ची को जन्म दिया. उन्होंने चिकित्सक और परिवार के लोगों से परीक्षा देने की इच्छा जताई. पहले तो परिवार के लोग सहमत नहीं थे, लेकिन प्रियंका के जज्बे को देखते हुए सभी तैयार हो गए. इलाज करने वाले चिकित्सक ने भी परीक्षा के दौरान कुछ सावधानी बरतने की सलाह देते हुए परमिशन दे दी.

प्रियंका सुबह 10 बजे से पहले ही परीक्षा केंद्र एनसी वैदिक इंटर कॉलेज पहुंच गईं. उनके साथ उनकी सास, देवरानी और देवर भी थे. परिवार के लोग स्टाफ के आवास में रुके रहे. प्रियंका हर पारी की परीक्षा के बाद कुछ देर वहीं आराम कर रही थीं. कॉलेज प्रशासन ने भी हर 10 से 15 मिनट में हाल पूछा. प्रियंका ने सुबह 10 से 11 बजे, दोपहर 12 से 01 बजे और दोपहर दो से शाम चार बजे तक परीक्षा दी. परीक्षा ख़त्म होने के बाद ही प्रियंका घर गईं.

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नवजात बच्ची के साथ प्रियंका वर्मा और उनका परिवार | तस्वीर साभार : अमर उजाला

लेडी लॉयल अस्पताल की प्रमुख अधीक्षिका डॉ. कल्याणी दीक्षित ने बताया कि सामान्य प्रसव के बाद भी कम से कम 48 घंटे आराम की जरूरत होती है. छात्रा का जज्बा है कि वो आठ घंटे बाद ही परीक्षा देने पहुंच गई.

एनसी वैदिक इंटर कॉलेज के कार्यवाहक प्रधानाचार्य राजवीर सिंह ने कहा कि ऐसी बेटी को नमन करता हूं. यह बेटी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है. किसी भी परिस्थिति में हार नहीं माननी चाहिए.

प्रियंका ने बताया कि उनके ससुराल के लोग बहुत अच्छे हैं, पढ़ाई करा रहे हैं. इस फैसले में भी साथ दिया. इससे एक वर्ष बर्बाद होने से बच गया. अब प्रियंका आगे की परीक्षाओं के लिए तैयारी कर रही हैं.

बी पॉजिटिव इंडिया, प्रियंका वर्मा के साहस और जज्बे को सलाम करता हैं. आप से प्रेरणा लेकर जरूर देश की लड़कियां जीवन में अच्छा करेगी.

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