भारत गांवों का देश है और गांव में रहने वाले कई ग्रामीणों को ट्रैन या हवाई सफर करने का मौका नहीं मिलता है. लोगों की ज़िन्दगी निकल जाती है लेकिन हवाई जहाज को वो सिर्फ देखते रह जाते है. लेकिन पंजाब के एक गांव के बुजुर्गों की इच्छा पूरी की है, उनके गांव के ही बेटे ने. पायलेट बनने से पहले उन्होंने गांव के बुजुर्गो से वादा किया था कि वो उनको हवाई सफर करवाएगा.

कड़ी मेहनत और परिश्रम से इस नौजवान ने पायलेट बनकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया. लेकिन उसने अपना वादा कभी नहीं भुला. कुछ वर्ष नौकरी करने के बाद उसने अपने गांव के 40 बुजुर्ग महिलाओं और पुरुषों को दिल्ली से अमृतसर तक हवाई सफर करवाया.

इतना ही नहीं उन्हें अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से लेकर वाघा बॉर्डर तक यात्रा करवाई. गांव के बुजुर्गों के लिए यह यात्रा किसी रोमांचकारी यात्रा के साथ ही तीर्थयात्रा से कम नहीं थी.

ऐसे ही एक शख्स का नाम है विकास जयानी (Vikas Jyani). वह पंजाब के सारंगपुर गांव के रहने वाले हैं. उन्होंने अपने बुजुर्गों की दिली ख्वाहिश को पायलट बनने के बाद पूरा किया.

पायलट बनने के बाद जयानी जब अपने गांव वापस लौटे तो उन्होंने नई दिल्ली से अमृतसर के बीच अपने गांव के 70 साल से ऊपर के लोगों के लिए हवाई यात्रा का इंतजाम किया. 

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यात्रा के दौरान हवाई जहाज में बैठे बुजुर्ग | Image Credits : Zee News

हवाई यात्रा से खुश इन बुजुर्गों में कभी सोचा भी नहीं था कि वह कभी विमान में सफर करेंगे. यात्रियों का कहना था कि विकास को पूरा विश्वास था कि एक दिन वह पायलट बनेगा. विकास के पिता महेंद्र जयानी एक बैंक में वरिष्ठ प्रबंधक हैं.

विकास के पिता ने एक न्यूज़ चैनल से बातचीत में कहा कि यह यात्रा किसी तीर्थयात्रा से कम नहीं थी. उन्होंने कहा कि उनका बेटा हमेशा से ही बुजुर्गों की इज्जत करता रहा है और यह उसका सपना था. अपने बेटे पर गर्व करते हुए उन्होंने कहा कि सभी युवाओं को उनके बेटे के नक्शेकदम पर चलना चाहिए.

बुजुर्ग यात्रियों में से एक ने कहा कि उन्होंने कभी विमान में सफर करने का सपना तक नहीं देखा था. हालांकि बहुत से लोगों ने बुजुर्गों से वादा किया था लेकिन विकास ने अपना वादा पूरा किया.

इसके अलावा उन्होंने सहयात्रियों को धन्यवाद दिया जिन्होंने जरूरत पड़ने पर उनका सहयोग किया. उन्होंने कहा कि विकास ने हमारे देश के युवाओं के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत किया है.

देश में बुजुर्गों से उपेक्षित व्यवहार करने के बढ़ते चलन के बीच विकास ने उनको सम्मान दे कर समाज के सामने मिसाल कायम की है.

Be Positive, विकास के इस सराहनीय कदम की प्रशंसा करता है तथा उम्मीद करता है कि आज के युवा अपने बुजुर्गों को पूरा सम्मान देंगे .

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