भारत एक कृषि-प्रधान देश है और ज्यादातर आबादी कृषि से होने वाली आय पर निर्भर होती है । बढ़ती महंगाई के कारण खेती-बाड़ी की लागत में बेतहाशा वृद्धि हुई है लेकिन उसके अनुरूप खेती-बाड़ी से आय में आशातीत वृद्धि नहीं हुई है । मौसम पर निर्भरता और तकनीक के अभाव में किसानों को बहुत नुकसान झेलना पड़ता है । बढ़ते कर्ज और सरकार की बेरुखी ने किसानों को आत्महत्या जैसे कड़े कदम उठाने पर मजबूर हो गया है । देश के किसान शिक्षा एवं जागरूकता के अभाव में आधुनिक देशी एवं विदेशी तकनीक का इस्तेमाल तो नहीं कर पाते है लेकिन अपनी समझ और जरूरत के हिसाब से कई तकनीक विकसित कर लेते है जो किताबों और प्रयोगशालाओं में नहीं होती है ।

आज हम ऐसे ही एक युवा किसान से मिला रहे है जिन्होंने डिजिटल मीडिया के बेहतरीन उपयोग से खेती-बाड़ी में नयी तकनीक का इस्तेमाल कर रहे है । अपने फेसबुक पेज और यूट्यूब चैनल के माध्यम से अपनी ईजाद की गयी तकनीकों को सभी कृषकों तक पहुंचा रहे है । राजस्थान के चित्तौडग़ढ़ जिले के बस्सी क़स्बे के पास जयसिंहपुरा के 19 वर्षीय किसान नारायण लाल धाकड़ (Narayan Lal Dhaker)  ने अपनी देशी तकनीक और ज्ञान से कई तरह के सफल प्रयोग किये है ।

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नारायण ने यूट्यूब चैनल के माध्यम से खेती-बाड़ी पर आधारित वीडियो बनाकर कई लोगों को फायदा पहुँचाया है ।नारायण के यूट्यूब चैनल को लगभग 60 हज़ार तथा  फेसबुक पेज पर 30,000 लोग फॉलो करते है । आपको जानकार आश्चर्य होगा कि नारायण के पास लैपटॉप भी नहीं है लेकिन मोबाइल के उपयोग से कई ज्ञानवर्धक वीडियो बनाये ।

Be Positive से खास बातचीत में नारायण ने बताया कि ” मेरे पिता की मृत्यु मेरे जन्म के कुछ दिनों पहले हो गयी थी और परिवार पर आर्थिक संकट आ गया लेकिन उनकी माँ ने खेती-मजदूरी करके उन्हें बड़ा किया । कम उम्र में ही मुझे खेतों में जाना पड़ा और खेती-बाड़ी की परख बहुत जल्द ही सीखने लग गया । हमारे पास 2 हेक्टेयर जमीन खेती-बाड़ी योग्य थी लेकिन तकनीक एवं जानकारी के अभाव में हमें ज्यादा फायदा नहीं होता था ।”

नारायण के क्षेत्र में गेंहू , मक्का , ज्वार, कपास एवं मूंगफली की खेती होती है लेकिन किसानों को ज्यादा आय नहीं हो पाती है । जागरूकता की कमी एवं नीलगाय और मौसम के प्रकोप के कारण अक्सर खेती घाटे का सौदा साबित होती है । नारायण ने उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से नवाचार करने की योजना बनायीं । इसके लिए जाँच-पड़ताल से सामने आया कि खेतीबाड़ी में लागत का बड़ा हिस्सा रसायन एवं कीटनाशकों में चला जाता है । महंगे उर्वरक और रसायनों के कारण कई बार किसानों को क़र्ज़ भी लेना पड़ता है ।

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नारायण ने बताया कि “एकदम से रसायनों को खेती-बाड़ी से दूर नहीं ले जाया सकता है क्योंकि आर्गेनिक खेती में उपज कम होती है । इसके साथ ही दूरदराज क्षेत्रों में आर्गेनिक प्रोडक्ट्स के लिए मार्केट नहीं मिलता है जिसके कारण किसान चाहते हुए भी आर्गेनिक खेती नहीं कर आप रहा है ।

नारायण ने अपने क्षेत्र की समस्याओं को समझते हुए कई तरह की तकनीक विकसित की जिनमे दीमक नियंत्रण , नीलगाय रोकथाम और फसलों की बीमारियां शामिल है । इनके द्वारा की गयी विकसित की गयी इतनी कारगार है कि उनसे लागत में कमी के साथ ही बहुत जल्द ही लाभ मिलता है ।

Narayan work
नारायण लाल धाकड़ के कार्य की झलक

उन्होंने एक ऐसी ही तकनीक हमारे साथ भी साझा की है जिन्हे आम भाषा में जुगाड़ कहा जाता है । नारायण ने बताया कि केवल 10 रुपये के खर्च में वो अपने खेत को नीलगाय एवं कीटों से सुरक्षित रखते है । नीलगाय के बढ़ते खतरे के कारण कई किसानों को सर्द रात में भी खेत पर रखवाली करनी पड़ती है ।

इस समस्या से बचने के लिए नारायण ने एक नुस्खा बताया जो कि इस प्रकार है : पुरानी घास या भूसा और केरोसिन का इस्तेमाल किया जाता है । खेत में उच्चे स्थान पर भूसे पर केरोसिन छिड़क कर हलकी आग एवं धुआँ कर दिया जाता है जिससे खेत में आये कीट-पतंगे आकर्षित होकर आग के पास आते है तथा मर जाते है । खेत के आसपास आग होने के कारण नीलगाय भी खेतों में नहीं आती है । इस प्रकार छोटे से जुगाड़ से फसल को दोहरे नुकसान से बचाया जाता है ।

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अपनी जानकारी को लोगों तक पहुंचाने के लिए एक यूट्यूब चैनल शुरू करने का विचार किया लेकिन बिना तकनिकी ज्ञान के कारण उन्हें कई दिनों तक इंतज़ार करना पड़ा । नारायण के पास कोई लैपटॉप भी नहीं है जिसके कारण वीडियो बनाने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है लेकिन बुलंद हौसलों और लोगों को जानकारी देने के जज्बे ने एक सफल यूट्यूब चैनल बना दिया । यूट्यूब के बाद उन्होंने फेसबुक और Whats App के माध्यम से भी अपनी जानकारी पहुँचाना शुरू कर दिया ।

नारायण ने अपने क्षेत्र के कई किसानों से मिल कर उनकी तकनीकों एवं समस्याओ को जाना तथा कृषि सेवा केंद्र एवं कृषि वैज्ञानिकों की मदद से समस्याओं का हल ढूंढने की कोशिश की । नारायण इस जानकारी को एक वीडियो के तौर पर इंटरनेट के माध्यम से देश के अन्य किसानों तक पहुंचाते है ।

नारायण चाहते है कि सभी किसानों को आर्गेनिक खेती करनी चाहिए क्योंकि रसायन से उपजी फसल किसान के परिवार को भी नुकसान पहुंचाती है । किसानों को कम से कम अपने परिवार के लिए आर्गेनिक खेती से उपज लेनी चाहिए । नारायण जैविक खेती पर ज्यादा काम कर रहे है और अपने खेत को वो रसायन मुक्त करने के मिशन पर लगे हुए है ।

19 वर्ष की उम्र में नारायण ने सफलता की एक इबारत लिख दी है । उनके काम को देखते हुए वर्ष 2018 के भारतीय कृषि मंत्रालय के द्वारा दिए जाने वाले कृषि अवार्ड के लिए नामित किया है । सोशल मीडिया के माध्यम से नारायण देश के लाखों किसानों की मदद कर रहे है ।

Be Positive, नारायण  के साहस एवं किसानों की हालत को बदलने के जज्बे को सलाम करता है । उम्मीद करता है कि आपकी सार्थक पहल से देश की किसान आत्मनिर्भर बनेंगे तथा निश्चित रूप से हमारे पाठक आपके सफर को पढ़कर प्रेरित होंगे ।

नारायण के यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ क्लिक करे ! आप उन्हें इस +91-7742684130 नंबर पर भी संपर्क कर सकते है ।

नारायण लाल धाकड़ का छाछ से कीटनाशक बनाने का नुस्खा देखिये !

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