जिस उम्र में बच्चे सिर्फ स्कूल जाने, खेलने-खाने और मस्ती करने में लगे रहते हैं, उस उम्र में कनाडा में रहने वाले 15 वर्षीय तन्मय बख्शी (Tanmay Bakshi) जाने माने ऐप डिवेलपर (मोबाइल एप्लीकेशन) के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं।

मात्र पांच साल की उम्र से ही कंप्यूटर प्रोग्राम्स बनाना शुरू करने वाले तन्मय को पहचान मिली 2016 में। बेंगलुरु में IT कंपनी आईबीएम द्वारा आयोजित डिवेलपर कनेक्ट कॉन्फ्रेंस में उनके दिए गए भाषण को टेक जगत के सभी लोगों ने सराहा।

आज तन्मय 15 वर्ष की उम्र में न केवल एक प्रसिद्द सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर है बल्कि खुद से सींखकर आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) के एक्सपर्ट भी बन चुके है। AI के क्षेत्र में प्रसिद्द IBM के वाटसन प्लेटफार्म पर सबसे कम उम्र के एप्लीकेशन डेवलपर है तन्मय बक्शी। तन्मय ने बच्चों को iOS एप्लीकेशन बनाने में मदद करने के लिए एक किताब भी लिखी है।

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इसके साथ ही भी यूट्यूब के जरिये भी लोगों को प्रोग्रामिंग सींखने में मदद कर रहे है। उनके यूट्यूब चैनल (Tanmay Teaches) पर तीन लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर है तथा हज़ारों की संख्या में लोग उनसे जुड़े रहते है।

वो यूट्यूब में वीडियोस बनाने के साथ ही विभिन्न टेक्निकल कॉन्फ्रेंस और शोज में बतौर वक्त के तौर पर शामिल होते है। वो IBM कंपनी के सबसे युवा AI एक्सपर्ट है और IBM के चीफ टेक्नोलॉजी अफसर उनके मेंटर है।

तन्मय 9 साल की उम्र में पहला आईओएस एप्प बनाकर दुनिया के सबसे छोटे एप डेवलपर्स में से एक बन गए।

तन्मय ने नौ साल की उम्र में पहला iOS एप्लीकेशन tTables बनाया जो बच्चों को पहाड़े याद करने में मदद करता है। 

आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस पर तन्मय की पकड़ देखकर बड़े-बड़े विशेषज्ञ भी दांतों तले उंगली दबा लेते हैं। उन्होंने आईबीएम वाटसन का उपयोग करके विश्व का पहला वेब आधारित नॉन लीनियर क्वेश्चन आंसरिंग सिस्टम (AskTanmay)  बनाया है, जो कई तरह के साधारण प्रश्नों के जवाब दे सकता है।

Tanmay Bakshi with Family
अपने माता-पिता के साथ तन्मय बक्शी

भारतीय मूल के तन्मय के पिता का नाम पुनीत बख्शी और माता सुमिता बख्शी है। बख्शी परिवार 2004 में भारत से कनाडा जाकर बसा। अभी तन्मय अपने माता-पिता के साथ कनाडा के ओंटारियो प्रान्त के ब्रैम्प्टन शहर में रहते हैं। उनके पिता पुनीत स्वयं कंप्यूटर प्रोग्रामर हैं और उनकी मां घर संभालती हैं।

तन्मय अपने पिता को प्रोग्रामिंग करते देखा करते थे, उन्हें देखकर ही तन्मय की प्रोग्रामिंग में रुचि जगी। उनके पिता पुनीत ने उनकी रुचि को देखकर ही उन्हें कोडिंग करना सिखाया। प्रोग्रामिंग ही पिता और पुत्र दोनों के रिश्तों को मजबूत बना देती हैं। आज तन्मय इतने पारंगत हैं कि उनके पिता भी उनसे प्रोग्रामिंग से जुड़ी कई बातें सीखते हैं।

तन्मय एक इंटरव्यू में कहते हैं कि कम्प्यूटर मुझे जादू की तरह लगते थे। मैं आश्चर्यचकित हो जाता था कि कैसे कम्प्यूटर हर काम पलक झपकते ही कर लेते हैं। तन्मय ने जब प्रोग्रामिंग शुरू की तो उन्हें यह भी पता नहीं था कि यह एक प्रोफेशन है और लोगों को इसके लिए पैसे मिलते हैं। शुरुआत में उन्होंने Foxpro, Bash और Visual Basic में प्रोग्रामिंग की।

व्यस्त कार्यक्रम होने के कारण उन्हें और बच्चों की तरह स्कूल जाने का समय नहीं मिल पाता। पिछले कुछ वर्षों से तन्मय  घर पर रह कर ही पढ़ाई कर रहे हैं।

जब वह कोडिंग नहीं कर रहे होते हैं, तब वह एप्पल, वालमार्ट, आईबीएम जैसी कम्पनियों में लेक्चर दे रहे होते हैं । जब वे बिल्कुल फ्री होते हैं, उस वक्त उन्हें बाइकिंग करना और टेबल टेनिस खेलना पसंद है।

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FICCI की कॉन्फ्रेंस में भाग लेते हुए तन्मय बक्शी

इन दिनों तन्मय बख्शी द कॉग्निटिव स्टोरी नाम के प्रोजेक्ट में व्यस्त हैं, जिसका मकसद हाथ-पैर से अक्षम हो चुकी महिला को कम्युनिकेट करने में मदद करना है। तन्मय एपल के संस्थापक स्टीव जॉब्स और एलोन मस्क  को अपना आदर्श मानते हैं।

उनकी पुस्तक की एक प्रति पर अमिताभ बच्चन ने हस्ताक्षर किए हैं, जिसे उन्होंने प्यार से संजो कर रखा है।

तन्मय इंटरनेट ऑफ थिंग्स(IoT) पर आधारित एक डिवाइस पर भी काम कर रहे हैं, जिससे आप किसी भी सेक्योर एरिया में प्रवेश करने की प्रक्रिया आसान हो जाएगी।

ऐसा होने पर आप किसी डिवाइस को पासवर्ड या फिंगरप्रिंट से एक्सेस करने के बजाय अपने Face Recognition से ही एक्सेस कर सकेंगे।

तन्मय का सपना है कि एक दिन ऑपरेटिंग सिस्टम बनाने और बेचने वाली उनकी अपनी एक कम्पनी हो।

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